ट्रेन के टॉयलेट में फंसे पूर्व सीएम के प्रेस सलाहकार, सोशल मीडिया पर किया डरावन अनुभव शेयर

राजस्थान में कोटा-जयपुर एक्सप्रेस ट्रेन के टॉयलेट में फंसे महेन्द्र भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर अपनी मुश्किल स्थिति साझा की। रेलवे की सेवा में सुधार की आवश्यकता जताई।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

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News In Short 

  •  वसुंधरा के प्रेस सलाहकार महेन्द्र भारद्वाज को ट्रेन के टॉयलेट में फंसे।
  • मोबाइल से अपने भाई और रेलवे हेल्पलाइन से संपर्क किया, लेकिन मदद देर से आई।
  • रेलवे कर्मचारियों ने करीब 10 मिनट तक दरवाजा खोलने की कोशिश की।
  • दरवाजा तोड़ते समय भारद्वाज को हल्की चोट आई।
  • इस घटना ने रेलवे सुरक्षा मानकों पर सवाल उठाए।

News In Detail 

अगर किसी ट्रेन के टॉयलेट में आप फंस जाएं और बाहर निकलने का कोई रास्ता न हो, तो क्या होगा? यह अनुभव राजस्थान की पूर्व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के प्रेस सलाहकार महेन्द्र भारद्वाज ने किया। उन्होंने इस घटना को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है, यह खबर सुनकर हर कोई हैरान है।

क्या था पूरा मामला 

महेन्द्र भारद्वाज 30 जनवरी को कोटा से जयपुर आ रही कोटा-श्रीगंगानगर एक्सप्रेस ट्रेन (संख्या 22981) में यात्रा कर रहे थे। सवाईमाधोपुर से आगे वे ट्रेन के टॉयलेट का उपयोग करने गए थे। अंदर लगी डोर लैच (कुंडी) अचानक फेल हो गई और दरवाजा जाम हो गया। भारद्वाज ने पूरी ताकत से दरवाजे को खोलने की कोशिश की, लेकिन उनकी सारी कोशिशें विफल हो गईं।

भयावह स्थिति का सामना

कुंडी के जाम होने के बाद टॉयलेट में घुटन और बदबू के कारण भारद्वाज घबरा गए। वे मदद के लिए चिल्लाये। लेकिन ट्रेन की आवाज और दूरी के कारण कोई भी उनकी आवाज नहीं सुन सका। इस स्थिति में उनका मोबाइल फोन ही उनकी जिंदगी का सहारा बना। उन्होंने अपने भाई हरीश शर्मा और बेटे दिव्यांश को फोन किया और पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने रेलवे हेल्पलाइन से भी संपर्क किया, लेकिन कोई सहायता नहीं मिली।

सही समय पर सहायता न मिलना

महेन्द्र भारद्वाज ने लिखा कि धीरे-धीरे वे घुटन और अवसाद की स्थिति में पहुंच रहे थे। लेकिन काफी समय बाद रेलवे कर्मचारी मौके पर पहुंचे। वे लगभग 10 मिनट तक दरवाजा खोलने की कोशिश करते रहे। लेकिन दरवाजा पूरी तरह से जाम था।

दरवाजा तोड़ने की जरूरत पड़ी

आखिरकार, रेलवे कर्मचारियों ने दरवाजे को तोड़ने का निर्णय लिया। यह स्थिति बेहद जोखिमपूर्ण थी। क्योंकि दरवाजा टूटने से अंदर मौजूद व्यक्ति पर गिर सकता था। जैसे ही दरवाजा टूटने लगा, भारद्वाज ने दोनों हाथों से दरवाजे को थामने की कोशिश की। लेकिन फिर भी दरवाजा उनके हाथों पर गिर गया, जिससे उन्हें हल्की चोट आई।

रेलवे में सुधार की आवश्यकता

यह घटना यह दर्शाती है कि भारतीय रेलवे में सुरक्षा उपायों और सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है। टॉयलेट में फंसे किसी व्यक्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करना जरूरी है, और ऐसी स्थितियों में तत्काल सहायता मिलनी चाहिए।

स्मार्टफोन का महत्व

इस घटना में महेन्द्र भारद्वाज का मोबाइल फोन ही उनका सहारा बन सका, जो यह बताता है कि जीवन और मृत्यु के बीच में स्मार्टफोन और सही सूचना का कितना महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है।

क्या हो सकती है भविष्य में सुधार?

रेलवे को इस घटना से सीख लेकर टॉयलेट की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए, साथ ही यात्रियों के लिए और अधिक सहायता केंद्र और रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम विकसित किए जाने की आवश्यकता है, ताकि ऐसे हादसों से बचा जा सके।

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