उदयपुर फाइल से जयपुर तक हड़कंप, हनीट्रैप के दलदल में धंस रही राजनीति, जानिए ऐसे नेताओं की पूरी कुंडली

The Sootr | Mar 09, 2026, 15:55 IST
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udhaipur fils
Photograph: (the sootr)

राजस्थान के उदयपुर में एक भाजपा नेत्री के वीडियो से उठी चिंगारी ने जयपुर तक हड़कंप मचा हुआ है। देखा जाए तो मेवाड़ से लेकर मारवाड़ तक सफेदपोशों के दामन पर दाग की लंबी फेहरिस्त है।

News In Short

  • राजस्थान में भाजपा नेत्री से जुड़े ब्लैकमेलिंग और बलात्कार मामले ने सियासी तेज कर दी है।
  • उदयपुर में भाजपा नेता के वीडियो से जुड़ी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा तक पहुंच चुकी है।
  • राजस्थान के इतिहास में कई सेक्स स्कैंडल्स ने राजनीति को शर्मसार किया है।
  • राजस्थान में हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के मामले नेताओं के लिए सख्त चुनौती बन चुके हैं।
  • उदयपुर मामले से प्रदेश भाजपा की साख पर सवाल उठ रहे हैं, जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करना होगा।

News In Detail

योगेंद्र योगी@​जयपुर

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। सियासी गलियारों में चर्चा विकास कार्यों की नहीं, बल्कि उन 'बंद कमरों' की हो रही है, जहां सत्ता और रसूख के नशे में मर्यादाएं तार-तार हुईं। उदयपुर में एक भाजपा नेत्री से जुड़े सनसनीखेज वीडियो, ब्लैकमेलिंग और बलात्कार के मामले ने प्रदेश भाजपा की नींद उड़ा दी है। यह मामला महज एक एफआईआर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने प्रदेश के उन तमाम 'सेक्स स्कैंडल्स' की यादें ताजा कर दी हैं, जिन्होंने समय-समय पर प्रदेश की राजनीति को शर्मसार किया है।

​उदयपुर फाइल्स: जब अपनों ने ही बढ़ाई संगठन की मुश्किल

उदयपुर का ताजा घटनाक्रम सीएम भजनलाल शर्मा की मेज तक पहुंच चुका है। 11 फरवरी को भूपालपुरा थाने में दर्ज हुई एक भाजपा नेत्री की रिपोर्ट ने संगठन के भीतर भूचाल ला दिया है। आरोपी वकील विशाल गुर्जर फिलहाल पुलिस की गिरफ्त में है, लेकिन इस मामले के तार जिस तरह से राजनीतिक हितों को साधने और ब्लैकमेलिंग से जुड़े हैं, उसने पार्टी की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोपी ने वीडियो के जरिए भाजपा नेता को ब्लैकमेल करने की साजिश रची थी। अब सबकी निगाहें संगठन की गाज पर टिकी हैं, क्योंकि रिपोर्ट सीधे 'ऊपर' तक पहुंच चुकी है।

​इतिहास के वे पन्ने, जिन्हें सियासत मिटाना चाहती है

​राजस्थान का राजनीतिक इतिहास जितना गौरवशाली रहा है, इसके कुछ पन्ने उतने ही स्याह हैं। चाहे कांग्रेस हो या भाजपा, 'काम और कांड' का चोली-दामन का साथ रहा है। आइए नजर डालते हैं, उन बड़े मामलों पर, जिन्होंने दिग्गजों का करियर राख कर दिया:

भंवरी देवी कांड : सत्ता की हनक और मौत का वो खौफनाक मंजर

​साल 2011 का वो दौर कोई नहीं भूल सकता, जब एक एएनएम भंवरी देवी की गुमशुदगी ने अशोक गहलोत सरकार की चूलें हिला दी थीं। तत्कालीन दिग्गज मंत्री महिपाल मदेरणा और मलखान सिंह बिश्नोई के साथ भंवरी की अश्लील सीडी ने पूरे देश में तहलका मचाया। नतीजा, मदेरणा को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी, सालों जेल में बीते और अंततः बीमारी के चलते उनका निधन हो गया। इस कांड ने मारवाड़ के एक कद्दावर राजनीतिक घराने की साख को मिट्टी में मिला दिया।



अजमेर ब्लैकमेल कांड: जब सिसक उठी थीं बेटियां

​90 के दशक में अजमेर के एक प्रतिष्ठित गर्ल्स कॉलेज में हुआ कांड आज भी रूह कंपा देता है। यूथ कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष फारूक चिश्ती और उसके साथियों ने अश्लील फोटो और वीडियो के दम पर सैकड़ों छात्राओं का शोषण किया। बदनामी के डर से चार छात्राओं ने आत्महत्या कर ली थी। इस कांड ने साबित किया था कि जब रसूखदार अपराधी बन जाएं, तो समाज कितना असुरक्षित हो जाता है।

बाबूलाल नागर: मंत्री पद से सलाखों तक का सफर

2013 में कांग्रेस सरकार के मंत्री बाबूलाल नागर पर एक महिला ने अपने सरकारी आवास पर दुष्कर्म का आरोप लगाया। नागर को इस्तीफा देना पड़ा और जेल की हवा खानी पड़ी। हालांकि बाद में कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया, लेकिन राजनीति में उनकी चमक फीकी पड़ गई। 2023 के चुनाव में उन्हें जनता ने नकार दिया।

मेवाराम जैन: चुनाव के बाद वायरल हुए वीडियो

​पिछले विधानसभा चुनाव (2023) के तुरंत बाद बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन के कथित अश्लील वीडियो वायरल हुए। उन पर और पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे। हालांकि बाद में कोर्ट में समझौता हो गया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, जिसे बाद में बहाल किया गया। उनकी हार में इस विवाद की बड़ी भूमिका मानी गई।



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​हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग: जब जाल में फंसे 'माननीय'

​राजस्थान में केवल शोषण ही नहीं, बल्कि नेताओं को जाल में फंसाकर उनसे मोटी रकम वसूलने के खेल भी खूब हुए हैं:

भरतपुर के भाजपा नेता: 2014 में एक निजी मेडिकल कॉलेज के मालिक और भाजपा नेता को एक युवती ने अपने जाल में फंसाकर अश्लील सीडी बना ली। नेताजी ने दिलेरी दिखाई और दिल्ली क्राइम ब्रांच में शिकायत की। जब युवती 40 लाख रुपये लेने जयपुर के होटल पहुंची, तो उसे रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

​निहालचंद मेघवाल: मोदी सरकार में मंत्री रहे निहालचंद पर 2011 में एक महिला ने गंभीर आरोप लगाए। हालांकि कानूनी प्रक्रिया में वे बचते रहे, लेकिन विपक्ष ने इसे हमेशा एक बड़ा मुद्दा बनाए रखा।

​सवाई माधोपुर का अजीब 'गठबंधन': 2021 में एक ऐसा मामला आया जिसने सबको चौंका दिया। यहाँ भाजपा और कांग्रेस की महिला पदाधिकारी मिलकर सेक्स रैकेट चला रही थीं। राजनीति के दो ध्रुव यहाँ अपराध के धरातल पर एक साथ खड़े नजर आए।

​सोशल मीडिया का वार और 'उड़ता तीर'

2024 में राजनीति के इस दंगल में सोशल मीडिया ने घी डालने का काम किया। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत के एक रहस्यमयी ट्वीट ने राजस्थान भाजपा में खलबली मचा दी। जयपुर, दिल्ली और ली-मेरिडियन होटल का जिक्र करते हुए, उन्होंने जो 'चार शब्द' लिखे, उसने कई नेताओं के पसीने छुड़ा दिए। भाजपा ने इसे हमला माना, तो सुप्रिया ने तंज कसा कि भाजपा क्यों उड़ता तीर लेने में लगी हुई है

साख बचाने की चुनौती

​उदयपुर का मामला अब केवल पुलिस डायरी का हिस्सा नहीं है, यह सत्ताधारी दल के लिए अग्निपरीक्षा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास रिपोर्ट पहुंचने का मतलब साफ है कि अब जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल का वक्त है। ​बड़ा सवाल यह है कि क्या राजस्थान की राजनीति इन 'हनीट्रैप' और 'हवस' के दलदल से कभी बाहर निकल पाएगी? या फिर हर कुछ सालों में एक नया 'कांड' पुराने चेहरों को ढक देगा।

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