उदयपुर हत्याकांड के पांच आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज, हाईकोर्ट ने गंभीरता का दिया हवाला
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 04, 2026, 13:22 IST
हत्या के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी
उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या के संदर्भ में कड़े कदम उठाए गए हैं, जिसके चलते जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं। हत्या के बाद पांच मुख्य आरोपियों को हिरासत में रखा गया है, और उनका मामला अदालत में चल रहा है। उच्च न्यायालय ने उनकी दलीलों को अस्वीकार कर दिया है, और जांच एजेंसी ने बेहद गंभीर साक्ष्य पेश किए हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- उदयपुर में 28 जून 2022 को कन्हैया लाल की उनकी दुकान के अंदर हत्या कर दी गई थी।
- हत्या के बाद मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई थी।
- जांच एजेंसी ने मामले में कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।
- पांच आरोपियों ने लंबे समय से जेल में होने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट से जमानत मांगी थी।
- हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।
जिन आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज हुई हैं, उनमें वसीम अली, मुस्लिम खान, मोहसिन खान, मोहम्मद मोहसिन और आसिफ हुसैन शामिल हैं। इन आरोपियों की ओर से लंबे समय से जेल में रहने और मुकदमे की प्रक्रिया में लग रहे समय को आधार बनाकर जमानत की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने मामले की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
2022 में हुई थी कन्हैया लाल की हत्या
मामले की गंभीरता को देखते हुए बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपी गई। जांच के दौरान आरोपियों के बीच संपर्क, घटना की कथित साजिश और अन्य पहलुओं को लेकर सबूत जुटाए गए। इसी आधार पर मामले में आगे कानूनी कार्रवाई की गई।
आरोपियों ने जमानत के लिए दी थी दलील
दूसरी ओर, जांच एजेंसी की ओर से आरोपियों की जमानत का विरोध किया गया। एजेंसी ने मामले की गंभीरता और आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध सामग्री का हवाला देते हुए जमानत नहीं देने की मांग की।
UAPA के तहत भी चल रहा मामला
अदालत ने मामले में उपलब्ध सामग्री और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जमानत याचिका पर फैसला देते समय की गई टिप्पणियों का मुख्य ट्रायल पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
चार साल से ज्यादा समय से जेल में आरोपी
हालांकि हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को देखते हुए इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं माना। इसके साथ ही पांचों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
आगे जारी रहेगा मामले का ट्रायल
अदालत ने यह भी साफ किया है कि जमानत पर की गई टिप्पणियों को मुख्य मुकदमे में अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाएगा। ट्रायल कोर्ट मामले का फैसला उपलब्ध सबूतों और कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से करेगा।
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