/sootr/media/media_files/2025/08/29/vasundhara-raje-2025-08-29-13-24-02.jpeg)
Photograph: (the sootr)
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हाल ही में धौलपुर में मुरलीधर महाराज की राम कथा के दौरान एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उनका यह बयान न सिर्फ उनके समर्थकों के लिए, बल्कि राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी चर्चा का विषय बन गया। वसुंधरा राजे ने वनवास और धैर्य पर बात करते हुए एक ऐसा संदेश दिया, जिसे उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
वनवास हर किसी के जीवन में आता है...
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में कहा कि वनवास सिर्फ भगवान श्रीराम की जिंदगी का हिस्सा नहीं है, हर इंसान के जीवन में कहीं न कहीं वो वनवास आ ही जाता है। पर आता है तो वो जाता भी है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक उनके अपने राजनीतिक वनवास से जोड़कर देख रहे हैं, क्योंकि लंबे समय से राजे को पार्टी में वह जिम्मेदारियां नहीं मिली हैं, जो उनके समर्थक उम्मीद कर रहे थे। यह बयान सीधे तौर पर उनकी राजनीतिक स्थिति को उजागर करता है।
धैर्य और राजनीतिक भविष्य पर जोर
वसुंधरा राजे ने अपने संबोधन में धैर्य बनाए रखने की बात भी की। उन्होंने कहा कि रामजी ने हमें यह बताया है कि अपने जीवन के अंदर धैर्य क्या चीज हो सकती है। हमें धैर्य को समझने की जरूरत है। दुनिया में कोई चीज स्थायी नहीं है। अगर वो आई है तो जाएगी भी। यह उनके राजनीतिक दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें वे अपने भविष्य के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण रखती हैं। राजे के अनुसार, राजनीति में कभी भी कुछ स्थायी नहीं होता। जैसे कभी किसी का वक्त ऊंचा होता है, वैसे ही वह नीचे भी आ सकता है। यह उनका आत्मविश्वास और राजनीति में उनके भविष्य को लेकर आशावादी दृष्टिकोण है।
समर्थकों को धैर्य बनाए रखने का संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजे के ये बयान न सिर्फ उनके व्यक्तिगत संघर्ष का प्रतीक हैं, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को यह संदेश भी देते हैं कि वह अभी भी राजनीति में सक्रिय हैं। उनका यह बयान यह भी दर्शाता है कि वह अपने राजनीतिक भविष्य के लिए पूरी तरह से आशान्वित हैं और यह मानती हैं कि उनका वनवास जल्द ही खत्म होगा।
राजे का यह कदम पार्टी के भीतर अपनी अहमियत और भविष्य को फिर से स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने इस बयान के जरिए यह संकेत दिया है कि वह राजस्थान की राजनीति में फिर से अपनी जगह बनाने के लिए तैयार हैं।
वसुंधरा राजे सिंधिया का पहली हार का दर्द छलका, पीतांबरा पीठ की व्यवस्था पर उठाए सवाल
🚩🚩जय सियाराम 🚩🚩
— MurlidharJi Maharaj (@MurlidharJiM) August 29, 2025
पुज्य संत श्री मुरलीधर जी महाराज के श्रीमुख से भगवान परशुराम सेवा सदन, धौलपुर, राजस्थान में चल रही नव दिवसीय "श्रीराम कथा" (21 से 29 अगस्त) के अष्टम दिवस के अद्भुत दृश्य.......
पावन उपस्थिति :- @VasundharaBJP जी #MurlidharJiMaharajpic.twitter.com/VVK8n0Ro3e
इस बयान से राजनीतिक राह में बदलाव आएगा?
राजे के इस बयान को एक बड़ी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा सकता है। उनके इस बयान ने यह साबित कर दिया है कि वह राजनीति से दूर नहीं हैं और जल्द ही अपने राजनीतिक वनवास को समाप्त करने की कोशिश में हैं। इसके साथ ही, इस बयान ने उनके समर्थकों को एक नया उत्साह भी दिया है, जो हमेशा से उनके वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे।
राजे की राजनीति में सक्रियता का संकेत
राजे का धौलपुर में राम कथा के दौरान जाना और कार्यकर्ताओं से मिलना सिर्फ एक निजी यात्रा नहीं माना जा सकता। यह कदम राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो राजे की राजनीति में फिर से सक्रिय होने की ओर एक बड़ा संकेत है। वह चाहती हैं कि उनके समर्थकों को यह संदेश जाए कि वह फिर से राजनीति में अपनी जगह बनाने के लिए तैयार हैं।
FAQ
- thesootr links
- मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- छत्तीसगढ़की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- राजस्थान की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- रोचक वेब स्टोरीज देखने के लिए करें क्लिक
- जॉब्स और एजुकेशन की खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें
- निशुल्क वैवाहिक विज्ञापन और क्लासिफाइड देखने के लिए क्लिक करें
अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩👦👨👩👧👧