जाट आरक्षण पर विश्वेंद्र-नेम सिंह में तकरार, दोनों बोले- मेरा मुंह मत खुलवाओ
Mukesh Sharma | Sept 24, 2026, 17:50 IST
विश्वेंद्र-नेम सिंह
भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण आंदोलन को लेकर विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह फौजदार आमने-सामने हैं। दोनों ने वीडियो जारी कर एक-दूसरे के दावों पर सवाल उठाए और पुरानी बातें सार्वजनिक करने की चेतावनी दी।
समझें क्या है पूरा मामला
- विश्वेंद्र-नेम सिंह में आया सार्वजनिक विवाद।
- जाट आरक्षण आंदोलन में श्रेय की जंग तेज।
- विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह भिड़े, वीडियो वायरल।
- नेम सिंह बोले- अब अपमान नहीं सहूंगा।
- जाट आंदोलन के दो चेहरे अब आमने-सामने
एक तरफ विश्वेंद्र सिंह ने दावा किया कि उन्होंने नेम सिंह को आंदोलन में आगे बढ़ाया और राजनीतिक पहचान दिलाई। दूसरी ओर, नेम सिंह ने साफ कहा कि वे सम्मान करते हैं, लेकिन अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। दोनों ने वीडियो जारी कर एक-दूसरे को जवाब दिया। बात यहां तक पहुंच गई कि दोनों ने पुरानी बातें सार्वजनिक करने की चेतावनी तक दे दी।
जाट आरक्षण आंदोलन के श्रेय से बढ़ी खींचतान
इसके बाद दोनों के बीच दूरी और बढ़ती गई। बताया जा रहा है कि हाल में नेम सिंह के गांव में एक कार्यक्रम के दौरान विश्वेंद्र सिंह ने उनके चुनावी प्रदर्शन को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद मामला सोशल मीडिया पर आ गया।
विश्वेंद्र बोले- नेता मैंने बनाया, आंदोलन का झंडा सौंपा
उनका कहना है कि विधायक रहते हुए आंदोलन से जुड़े मुकदमों की जिम्मेदारी भी उन्होंने अपने ऊपर ली, जिससे नेम सिंह समेत दूसरे आंदोलनकारियों को परेशानी नहीं हुई।उन्होंने कहा कि नेम सिंह को राजनीतिक पहचान दिलाने में भी उनकी भूमिका रही है।
विश्वेंद्र सिंह ने चुनाव में नेम सिंह को मदद करने का किया दावा
विश्वेंद्र सिंह ने सांसद संजना जाटव की जीत में भी अपनी भूमिका होने का दावा किया।
विश्वेंद्र सिंह ने नेम सिंह को दी चुनौती
विश्वेंद्र ने यह भी कहा कि वे लंबे राजनीतिक जीवन में कई बड़े नेताओं और मुख्यमंत्रियों से बहस कर चुके, इसलिए किसी की धमकी से डरने वाले नहीं।हालांकि उन्होंने नेम सिंह को आगे बढ़ने का आशीर्वाद देते हुए कहा कि व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान बनाए रखना चाहिए।
नेम सिंह बोले- सम्मान करूंगा, अपमान नहीं सहूंगा
नेम सिंह ने अपने जवाब में तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि वे भी 'बकरी की कोख से पैदा नहीं हुए हैं।' उन्होंने कहा कि वे भी अपनी मां की कोख और पिता के अंश से उसी समाज, वंश और गोत्र में पैदा हुए हैं। उनका कहा था कि वे हमेशा विश्वेंद्र सिंह का सम्मान करते आए हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से उनका मजाक उड़ाया जाना ठीक नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनके पास भी कहने के लिए बहुत कुछ है। अगर उन्होंने सारी बातें सार्वजनिक कर दीं तो स्थिति ठीक नहीं रहेगी।
नेम सिंह ने कहा कि वे विधायक बनें या न बनें, इससे उनके सम्मान का फैसला नहीं होता। उन्होंने साफ कहा कि अब उनकी सहने की सीमा खत्म हो चुकी है और आगे वे अपना अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। नेम सिंह नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीत नहीं सके। वहीं जाट आरक्षण आंदोलन में वे लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
दोनों नेताओं के रिश्ते हमेशा ऐसे नहीं रहे। फरवरी 2024 में राजस्थान में जाट आरक्षण आंदोलनके दौरान विश्वेंद्र सिंह और नेम सिंह फौजदार साथ आए थे। तब विश्वेंद्र ने नेम सिंह को साफा पहनाया था और दोनों ने जाट समाज के एकजुट होने की बात कही थी। नेम सिंह ने भी उस समय विश्वेंद्र सिंह को आंदोलन का संरक्षक बताया था।
अब करीब ढाई साल बाद दोनों के बीच विवाद खुलकर सामने आ गया। फिलहाल दोनों तरफ से जारी वीडियो के बाद जाट आरक्षण आंदोलन में किसकी क्या भूमिका रही और किसने किसकी राजनीतिक मदद की, यही इस विवाद का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है।
यह खबरें भी पढ़ें...
राजस्थान में मानसून की विदाई के साथ बढ़ी गर्मी, 25 सितंबर से बारिश के आसार
राजस्थान में 1 अक्टूबर से बदलेगी स्कूल टाइमिंग, शिक्षक संगठन ने 16 अक्टूबर तक बढ़ाने की मांग की
जयपुर के JLN मार्ग पर अब नहीं मिलेगा जाम ! SMS मेडिकल कॉलेज से यूनिवर्सिटी तक बनेगी 1.5 KM एलिवेटेड रोड
राजस्थान में साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क, 50% से ज्यादा रकम विदेश तक पहुंचने का दावा
कांग्रेस महासागर है किसी के आने या जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता— पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह
By Mukesh Sharma
राजस्थान पंचायत चुनाव के लिए संकल्प पत्र लाएगी भाजपा, मदन राठौड़ बोले- गांवों में भी देंगे शहर जैसी सुविधाएं
By Jageshwar prasad
इंदौर सेंट्रल जेल में फैला डेंगू, 32 मरीज मिले, पानी की बाल्टी में मिले लार्वा, दो की संदिग्ध मौत
By Sanjay Gupta
राजस्थान में गरबा एंट्री पर VHP की नजर, ID जांच की तैयारी; तिलक-कलावा भी होगा जरुरी
By Ashish Bhardwaj
जोधपुर के मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का सनसनीखेज मामला, बेखौफ सीनियर्स की प्रताड़ना से सहमीं छात्राएं
By Jageshwar prasad
स्कूल शिक्षा विभाग के अफसरों को 62 साल तक नौकरी का हक नहीं, 60 में ही होगा रिटायरमेंट, HC से 14 याचिकाएं खारिज
By Neel Tiwari
Rent A Garba Partner: गरबा में पार्टनर भी किराए पर? भोपाल-इंदौर में अनोखा ट्रेंड वायरल
By Sumit Kumar