इलेक्ट्रिक वाहन कितने खतरनाक? भारत के बड़े हादसे और सुरक्षा के नियम
Manya Jain | Mar 18, 2026, 13:17 IST
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इंदौर में EV कार चार्जिंग के दौरान हादसा होने से आठ लोगों की जान चली गई। क्या आपको पता है, भारत में 2022 के बाद से EV से जुड़े 23 हजार 865 सड़क हादसे दर्ज हो चुके हैं। जानें EV में आग क्यों लगती है, सरकार ने क्या नियम बनाए हैं।
News In Short
- 2022 के बाद तीन साल में ईवी से जुड़े 23 हजार 865 सड़क हादसे दर्ज हुए हैं।
- तमिलनाडु में इलेक्ट्रिक स्कूटर में आग लगने से पिता और बेटी की मौत हो गई थी।
- EV में आग की बड़ी वजह बैटरी में ‘थर्मल रनअवे’ प्रक्रिया है, जो शुरू होने पर लगातार फैलती जाती है।
- केंद्र सरकार ने EV सुरक्षा के लिए नए मानक और टेस्टिंग नियम लागू किए हैं।
- गलत चार्जर, खराब सॉकेट और लोकल बैटरी EV को जानलेवा बना सकते हैं।
News In Detail
EV का बाजार बढ़ा, तो खतरे भी सामने आए
2022 के बाद से देशभर में ईवी वाले 23 हजार 865 सड़क हादसों का डेटा दर्ज हुआ है। इनमें बड़ी संख्या में मौतें और घायल भी शामिल हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि ईवी आम हो चुके हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा पर उतना ही ध्यान देना होगा, जितना किसी पेट्रोल‑डीजल वाहन पर दिया जाता है।
भारत के बड़े हादसे जिन्होंने जगाया
पुलिस जांच में शुरुआती कारण पुराने और कमजोर बिजली सॉकेट में शॉर्ट सर्किट बताया गया, जिसके बाद स्कूटर में आग भड़की और कमरे में धुआं भर गया। दोनों की मौत दम घुटने से हुई, उनके शरीर पर गंभीर जलन के निशान भी नहीं मिले।
इसी दौर में पुणे के लोहेगांव इलाके में Ola (Ola Electric Scooter) S1 Pro स्कूटर सड़क किनारे खड़ा था, अचानक उसमें आग लग गई और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इसके अलावा ओकिनावा, Ola (Ola Electric Scooter), Pure EV और Jitendra जैसे ब्रांड के कई स्कूटर अलग‑अलग शहरों में जलते दिखे, जिससे लोगों में डर और सरकार पर दबाव दोनों बढ़ा।
EV में आग क्यों लगती है?
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इसी प्रक्रिया को ‘थर्मल रनअवे’ कहा जाता है। इसमें पहले एक सेल बहुत ज्यादा गर्म होता है, फिर उसकी गर्मी पास के सेल तक जाती है और एक‑एक करके पूरी बैटरी आग की चपेट में आ जाती है। यह आग सामान्य आग से अलग होती है, क्योंकि कुछ स्थितियों में यह बाहरी ऑक्सीजन के बिना भी चल सकती है और इसे बुझाने के लिए बहुत ज्यादा पानी या खास तरह के फायर फाइटिंग केमिकल की जरूरत पड़ती है।
सरकार द्वारा नियुक्त विशेषज्ञों ने कई मामलों की जांच में बैटरी सेल की क्वालिटी, पैक डिजाइन और थर्मल मैनेजमेंट में खामियां पाईं, खासकर उन कंपनियों में जो तेजी से सस्ते ईवी बाजार में ला रही थीं।
भारतीय मौसम और सड़कें, अलग चुनौती
अगर बैटरी पैक का डिजाइन मजबूत न हो या ग्राउंड क्लियरेंस कम हो, तो स्पीड ब्रेकर या गड्ढे से टकराने पर पैक में सूक्ष्म दरारें या इंटरनल डैमेज हो सकता है, जो आगे चलकर शॉर्ट सर्किट और आग का कारण बनता है। कई कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने विदेशों के डिजाइन को सीधे कॉपी किया, जबकि भारत की स्थितियों के हिसाब से पर्याप्त बदलाव नहीं किए।
सरकार ने क्या कदम उठाए?
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भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने 2024 में दो नए मानक IS 18590:2024 और IS 18606:2024 जारी किए, जो L, M और N कैटेगरी यानी दोपहिया, कार और कमर्शियल ईवी के पावरट्रेन और बैटरी सुरक्षा पर फोकस करते हैं।
इन मानकों के तहत कंपनियों को मजबूती, थर्मल मैनेजमेंट, वॉटर‑इंग्रेस और क्रैश जैसी स्थितियों के लिए सख्त टेस्ट पास करना होगा। सरकार ने साफ किया है कि ईवी को बंद करने का इरादा नहीं है, बल्कि उन्हें ज्यादा सुरक्षित बनाना लक्ष्य है।
EV का सही रखरखाव कैसे करें
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- हमेशा कंपनी के ओरिजिनल या अधिकृत चार्जर और केबल ही इस्तेमाल करें। गलत या सस्ता चार्जर ओवरहीटिंग और शॉर्ट सर्किट का बड़ा कारण बन सकता है।
- जिस सॉकेट से चार्ज करते हैं, उसे इलेक्ट्रिशियन से चेक करवाएं। पुराना, ढीला या कम क्षमता वाला सॉकेट ईवी के लिए खतरनाक है, जैसा वेल्लोर केस में शक जताया गया।
- बैटरी को बार‑बार 0% तक खाली और 100% तक फुल चार्ज (EV Charging) करने से बचें, खासकर गर्मी के मौसम में। कोशिश करें कि चार्ज 20% से 80% के बीच रहे।
तेज धूप में, बहुत गर्मी में या टीन‑शेड के नीचे लंबे समय तक गाड़ी खड़ी न रखें। इससे बैटरी का तापमान अनावश्यक रूप से बढ़ता है।
तय समय पर अधिकृत सर्विस सेंटर से वाहन और बैटरी की जांच कराते रहें। किसी भी अजीब गंध, आवाज, धुआं, बैटरी की सूजन या दरार दिखे तो तुरंत गाड़ी बंद करें और सर्विस सेंटर संपर्क करें।
ये काम बिल्कुल न करें
खुद से ईवी की बैटरी या हाई‑वोल्टेज सिस्टम की मरम्मत करने की कोशिश न करें, साधारण मैकेनिक से भी न कराएं। ईवी सिस्टम में सैकड़ों वोल्ट का करंट होता है, जो झटके या शॉर्ट सर्किट से जान ले सकता है।
लोकल मार्केट की सस्ती या बिना सर्टिफिकेशन वाली बैटरी, बीएमएस या सेल पैक न लगवाएं। हमेशा कंपनी की अधिकृत बैटरी और पार्ट्स ही इस्तेमाल करें।
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अगर वाहन में आग लगे तो पास जाकर मोबाइल से वीडियो बनाने या खुद पानी से बुझाने की कोशिश न करें। लिथियम‑आयन बैटरी की आग से जहरीली गैसें निकल सकती हैं, जो सांस के जरिए शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं।
तुरंत 112 या फायर ब्रिगेड को फोन करें, मेन स्विच बंद कर सकें तो सुरक्षित दूरी से करें और वाहन से दूर चले जाएं।
कंपनी अगर रिकॉल नोटिस दे, तो उसे हल्के में न लें। तुरंत सर्विस सेंटर जाकर बैटरी या पार्ट्स बदलवाएं, क्योंकि यह कदम अक्सर सुरक्षा जोखिम कम करने के लिए उठाया जाता है।
भारी बारिश या बाढ़ जैसे हालात में गाड़ी को गहरे पानी में ले जाने से बचें, इससे बैटरी पैक में पानी घुसकर शॉर्ट सर्किट कर सकता है।
EV खरीदते समय क्या देखें?
- नए इलेक्ट्रिक वाहनों कोलेते समय केवल रेंज और कीमत पर ध्यान न दें, सुरक्षा को सबसे ऊपर रखें।
- कोशिश करें कि BIS के IS 18590:2024 और IS 18606:2024 जैसे मानकों के अनुरूप प्रमाणित वाहन ही लें।
- बैटरी के लिए AIS‑156 जैसे सर्टिफिकेशन की जानकारी लें और डीलर से लिखित में पुष्टि करवाएं।
- लोकल, अनजाने या बिना सर्विस नेटवर्क वाले ब्रांड की बजाय उन कंपनियों को तरजीह दें जिनके पास मजबूत आफ्टर‑सेल्स और रिकॉल‑सपोर्ट सिस्टम हो।
सोर्स:
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH)
e-DAR पोर्टल: https://morth.nic.in
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS)
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