एमपी में विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर ब्रेक: मोहन यादव सरकार ने फैसला टाला
Pawan Modiya | Mar 29, 2026, 23:58 IST
Photograph: (the sootr)
एमपी में विधायकों के वेतन-भत्ते (MLA Salary in MP) बढ़ाने का फैसला फिलहाल टला। राज्य की वित्तीय स्थिति और कृषक कल्याण योजनाओं के कारण राज्य सरकार ने निर्णय स्थगित किया।
मध्य प्रदेश में विधायकों के वेतन-भत्ते (MLA Salary in MP) बढ़ाने की लंबे समय से चल रही मांग को फिलहाल झटका लगा है। राज्य की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Government) ने मौजूदा वित्तीय परिस्थितियों को देखते हुए इस निर्णय को टालने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि वर्तमान में राज्य के कोष पर पहले से ही काफी दबाव है। प्रदेश सरकार 2026 को कृषक कल्याण वर्ष (Farmer Welfare Year) के रूप में मना रही है और किसानों के लिए कई योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है। ऐसे में फिलहाल विधायकों के वेतन-भत्ते और निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (Constituency Development Funds) बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया जाएगा।
मध्य प्रदेश में पिछले लगभग 10 वर्षों से मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्ते (MLA Salary and Allowances) में कोई वृद्धि नहीं हुई है। इस दौरान महंगाई और खर्च बढ़ने का हवाला देते हुए सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों के विधायक वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। इसी मांग को देखते हुए राज्य सरकार ने इस विषय पर अध्ययन करने के लिए एक समिति बनाई थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस मामले पर विचार करने के लिए उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी।
इस समिति में शामिल थे:
संसदीय कार्य विभाग की रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ राज्यों में विधायकों को मध्य प्रदेश की तुलना में ज्यादा वेतन-भत्ते मिलते हैं।
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समिति द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव में जनप्रतिनिधियों के वेतन-भत्तों में उल्लेखनीय वृद्धि का सुझाव दिया गया था।
इस वेतन में मूल वेतन, सत्कार भत्ता, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और दैनिक भत्ता (Daily Allowance) शामिल हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के बीच चर्चा भी हुई थी।
हालांकि इस विषय पर पूर्ण सहमति नहीं बन पाई। यही कारण है कि वेतन-भत्ता संशोधन विधेयक (Salary Amendment Bill) को न तो शीतकालीन सत्र में पेश किया गया और न ही बजट सत्र में।
केवल वेतन वृद्धि ही नहीं बल्कि विधायकों की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (Local Area Development Fund) बढ़ाने का प्रस्ताव भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है।
सरकार का कहना है कि फिलहाल राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बड़े वित्तीय निर्णय लेना मुश्किल है।
एक और महत्वपूर्ण कारण 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) की सिफारिशें भी हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले वित्तीय वर्ष में केंद्र से मिलने वाले करों में राज्य का हिस्सा करीब 7,500 करोड़ रुपये तक कम हो सकता है। ऐसी स्थिति में राज्य सरकार पहले अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को संतुलित करना चाहती है।
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सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि वर्तमान में राज्य के कोष पर पहले से ही काफी दबाव है। प्रदेश सरकार 2026 को कृषक कल्याण वर्ष (Farmer Welfare Year) के रूप में मना रही है और किसानों के लिए कई योजनाओं पर खर्च किया जा रहा है। ऐसे में फिलहाल विधायकों के वेतन-भत्ते और निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि (Constituency Development Funds) बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया जाएगा।
10 साल से नहीं बढ़े विधायकों के वेतन-भत्ते
समिति का गठन
इस समिति में शामिल थे:
- भाजपा विधायक अजय विश्नोई
- कांग्रेस विधायक सचिन यादव
- संसदीय कार्य विभाग के अधिकारी
अन्य राज्यों में अधिक वेतन मिलने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार
- गुजरात (Gujarat)
- हरियाणा (Haryana)
- हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)
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प्रस्तावित वेतन वृद्धि का खाका
संभावित वेतन संरचना
| पद | वर्तमान वेतन | प्रस्तावित वेतन |
|---|---|---|
| विधायक | ₹1.10 लाख | ₹1.70 लाख |
| पूर्व विधायक पेंशन | ₹35 हजार | ₹58 हजार |
| मुख्यमंत्री | ₹2 लाख | ₹2.60 लाख |
| मंत्री | ₹1.70 लाख | ₹2.20 लाख |
| राज्यमंत्री | ₹1.50 लाख | ₹2 लाख |
| विधानसभा अध्यक्ष | ₹1.85 लाख | ₹2.20 लाख |
| उपाध्यक्ष | ₹1.70 लाख | ₹2 लाख |
| नेता प्रतिपक्ष | ₹1.70 लाख | ₹2.20 लाख |
सहमति नहीं बनने से रुका संशोधन विधेयक
हालांकि इस विषय पर पूर्ण सहमति नहीं बन पाई। यही कारण है कि वेतन-भत्ता संशोधन विधेयक (Salary Amendment Bill) को न तो शीतकालीन सत्र में पेश किया गया और न ही बजट सत्र में।
निर्वाचन क्षेत्र निधि बढ़ाने का प्रस्ताव भी अटका
क्या था प्रस्ताव?
- वर्तमान निधि: ₹3 करोड़
- प्रस्तावित निधि: ₹5 करोड़
राज्य की वित्तीय स्थिति बनी बड़ी वजह
वित्तीय दबाव के कारण
- राज्य सरकार पहले ही काफी कर्ज (State Debt) ले चुकी है
- किसानों को प्रोत्साहन राशि (Farmer Incentive) दी जा रही है
- गेहूं और उड़द पर बोनस घोषित किया गया है
- सरसों पर भावांतर योजना (Price Deficiency Scheme) लागू की जानी है
16वें वित्त आयोग का असर
मध्य प्रदेश में विधायकों को मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं
- मासिक वेतन और भत्ता
- निर्वाचन क्षेत्र भत्ता
- दैनिक भत्ता
- सरकारी आवास या आवास भत्ता
- यात्रा सुविधाएं
- कार्यालय खर्च
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