न वकील, न जज, रीवा में खुद हनुमान जी करते हैं इंसाफ, जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लगती हैं अर्जियां
Kaushiki | Apr 02, 2026, 14:18 IST
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रीवा में हनुमान जी के 3 मंदिर जिला, हाई और सुप्रीम कोर्ट माने जाते हैं। यहां चिरहुलानाथ, रामसागर और खेमसागर में भक्तों का न्याय होता है। यहां तारीख पर तारीख का चक्कर नहीं होता, बल्कि सीधे भरोसे का फैसला मिलता है।
रीवा. देश में अदालतों के किस्से आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के रीवा में ऐसी अनोखी न्याय व्यवस्था है, जहां जज भी भगवान हैं और फैसले भी उन्हीं के होते हैं।
यहां के तीन प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों को भक्त पूरे विश्वास के साथ जिला अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मानते हैं। फर्क बस इतना है कि यहां कागजों की नहीं । आस्था की फाइलें चलती हैं और तारीख पर तारीख नहीं, भरोसे का फैसला मिलता है।
हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर इन मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी ‘अर्जी’ लेकर पहुंचते हैं। कोई नौकरी की आस में, कोई बीमारी से मुक्ति के लिए तो कोई पारिवारिक सुख-शांति के लिए। मान्यता है कि यहां कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।
![Thousands of people gathered in Chirhulanath temple in the new year,Rewa latest news]()
रीवा का चिरहुलानाथ मंदिर सबसे ज्यादा चर्चित है। इसे लोग ‘जिला अदालत’ कहते हैं। यहां हर दिन श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं। मान्यता है कि ज्यादातर मामलों का ‘फैसला’ यहीं हो जाता है, इसलिए आगे अपील की जरूरत कम ही पड़ती है।
यहां पहुंचने वाले भक्त रजत शर्मा ने बताया कि एक बार सच्चे मन से अर्जी लगा दो, बजरंगबली सुनते जरूर हैं। मंदिर में 24 घंटे रामचरितमानस का पाठ चलता रहता है और हर दिन भंडारा होता है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्ति में डूबा रहता है।
![2406df35-ac1]()
रीवा की इस अनोखी आस्था का सबसे दिलचस्प पहलू यहीं से शुरू होता है। यदि किसी भक्त को लगता है कि उसकी मन्नत पूरी नहीं हुई तो वह ‘अपील’ करता है और वो भी किसी दूसरी अदालत में नहीं, बल्कि हनुमान जी के ही अगले दरबार में। चिरहुलानाथ मंदिर के बाद बारी आती है रामसागर मंदिर की, जिसे लोग ‘हाईकोर्ट’ मानते हैं।
यहां भक्त फिर अपनी अरज लेकर पहुंचते हैं। यदि यहां भी समाधान न मिले तो अंतिम उम्मीद के तौर पर पहुंचते हैं खेमसागर मंदिर, जिसे सुप्रीम कोर्ट कहा जाता है। यानी, यहां अपील की पूरी प्रक्रिया भी आस्था के दायरे में ही पूरी होती है।
मान्यता है कि जब किसी भक्त की मनोकामना चिरहुलानाथ और रामसागर दरबार में भी पूरी नहीं हो पाती, तब वह अंतिम उम्मीद लेकर खेमसागर के सुप्रीम दरबार में अर्जी लगाता है।
![Khemsagar Hanumanji Temple in Lohi,Rewa - Best Temples near me in Rewa - Justdial]()
पंडित शत्रुघ्न शुक्ला बताते हैं, जब रीवा राज्य की स्थापना हो रही थी, तब संत चिरहुलदास महाराज ने इस मंदिर की स्थापना करवाई थी। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
करीब 500 साल पुरानी इस आस्था ने समय के साथ और मजबूती ही पाई है। पंडितों का कहना है, कलयुग में हनुमान जी को न्याय का देवता माना जाता है। यहां जो भी सच्चे मन से आता है, उसकी सुनवाई जरूर होती है।
![Hanuman Jayanti 2023: रीवा के 3 ऐसे हनुमान मंदिर, जहां जिला से लेकर सुप्रीम दरबार में होती है सुनवाई; जानें इनके बीच का रहस्यमयी संबंध | Hanuman Jayanti 2023: 3 ...]()
इन मंदिरों को लेकर एक और दिलचस्प तथ्य है। तीनों मंदिर एक सीध में बने हुए हैं। इनके बीच की दूरी भी निश्चित पैमाने पर है। हर मंदिर के पास एक तालाब है, जो इस स्थान की आध्यात्मिकता को और गहरा करता है।
रीवा के ये मंदिर भक्तों के लिए उम्मीद की कड़ी हैं। यहां आने वाला हर व्यक्ति अपने मन की ‘फाइल’ लेकर आता है और लौटते समय एक भरोसा साथ ले जाता है कि कहीं न कहीं, किसी न किसी दरबार में उसकी सुनवाई जरूर होगी।
हनुमान जन्मोत्सव पर यह आस्था अपने चरम पर होती है, जब हजारों-लाखों लोग इन दरबारों में मत्था टेकने पहुंचते हैं। यहां कानून की किताबें नहीं खुलतीं, यहां विश्वास का फैसला होता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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यहां के तीन प्रसिद्ध हनुमान मंदिरों को भक्त पूरे विश्वास के साथ जिला अदालत, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट मानते हैं। फर्क बस इतना है कि यहां कागजों की नहीं । आस्था की फाइलें चलती हैं और तारीख पर तारीख नहीं, भरोसे का फैसला मिलता है।
हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर इन मंदिरों की रौनक देखते ही बनती है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपनी ‘अर्जी’ लेकर पहुंचते हैं। कोई नौकरी की आस में, कोई बीमारी से मुक्ति के लिए तो कोई पारिवारिक सुख-शांति के लिए। मान्यता है कि यहां कोई खाली हाथ नहीं लौटता है।
Thousands of people gathered in Chirhulanath temple in the new year,Rewa latest news
पहला दरबार: जिला अदालत में सबसे ज्यादा भक्त
यहां पहुंचने वाले भक्त रजत शर्मा ने बताया कि एक बार सच्चे मन से अर्जी लगा दो, बजरंगबली सुनते जरूर हैं। मंदिर में 24 घंटे रामचरितमानस का पाठ चलता रहता है और हर दिन भंडारा होता है, जिससे माहौल पूरी तरह भक्ति में डूबा रहता है।
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अर्जी पूरी नहीं हुई तो अपील
यहां भक्त फिर अपनी अरज लेकर पहुंचते हैं। यदि यहां भी समाधान न मिले तो अंतिम उम्मीद के तौर पर पहुंचते हैं खेमसागर मंदिर, जिसे सुप्रीम कोर्ट कहा जाता है। यानी, यहां अपील की पूरी प्रक्रिया भी आस्था के दायरे में ही पूरी होती है।
मान्यता है कि जब किसी भक्त की मनोकामना चिरहुलानाथ और रामसागर दरबार में भी पूरी नहीं हो पाती, तब वह अंतिम उम्मीद लेकर खेमसागर के सुप्रीम दरबार में अर्जी लगाता है।
Khemsagar Hanumanji Temple in Lohi,Rewa - Best Temples near me in Rewa - Justdial
500 साल पुरानी परंपरा, आज भी अटूट विश्वास
करीब 500 साल पुरानी इस आस्था ने समय के साथ और मजबूती ही पाई है। पंडितों का कहना है, कलयुग में हनुमान जी को न्याय का देवता माना जाता है। यहां जो भी सच्चे मन से आता है, उसकी सुनवाई जरूर होती है।
Hanuman Jayanti 2023: रीवा के 3 ऐसे हनुमान मंदिर, जहां जिला से लेकर सुप्रीम दरबार में होती है सुनवाई; जानें इनके बीच का रहस्यमयी संबंध | Hanuman Jayanti 2023: 3 ...
तीनों दरबारों की एक और खास बात
जब आस्था बन जाती है अदालत
हनुमान जन्मोत्सव पर यह आस्था अपने चरम पर होती है, जब हजारों-लाखों लोग इन दरबारों में मत्था टेकने पहुंचते हैं। यहां कानून की किताबें नहीं खुलतीं, यहां विश्वास का फैसला होता है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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