डॉक्टर नेहा राजपूत ने छोड़ा स्टेथोस्कोप, अब IAS बनकर बदल रहीं व्यवस्था
Jageshwar prasad | Jul 31, 2026, 20:15 IST
आईएएस डॉ. नेहा राजपूत
MBBS डॉक्टर नेहा राजपूत ने UPSC 2023 में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 51वीं रैंक हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया। वर्तमान में LBSNAA, मसूरी में अपनी Phase-II ट्रेनिंग कर रही हैं।
एप्रन पहनकर स्टेथोस्कोप से मरीज की धड़कनें नापने वाली एक डॉक्टर अब देश की व्यवस्था संभाल रहीं हैं। वे पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 51वीं रैंक (AIR 51) लाकर सीधे आईएएस अफसर बनी थी। यह कहानी केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं है। यह कहानी एक ऐसी सोच की, जिसने अस्पताल की चार दीवारों से निकलकर पूरे समाज का इलाज करने का बीड़ा उठाया।
यह प्रेरक और जज्बे से भरी कहानी है वर्ष 2024 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी डॉ. राजपूत नेहा उद्धवसिंह की। आइए जानते हैं कि कोरोना महामारी के उस दौर में ऐसा क्या हुआ जिसने एक डॉक्टर के मन को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें यूपीएससी की ओर मोड़ दिया।
डॉ. नेहा मूल रूप से महाराष्ट्र के जलगांव जिले की रहने वाली हैं। वे बचपन से ही मेधावी छात्रा थीं। उन्होंने साल 2016 में एमबीबीएस (MBBS) में दाखिला लिया। वे देश के बेहद प्रतिष्ठित सेठ जी.एस. मेडिकल कॉलेज एवं के.ई.एम. अस्पताल, मुंबई की छात्रा रहीं, जहां से उन्होंने अपनी डॉक्टर की डिग्री पूरी की।
एमबीबीएस की पढ़ाई और इंटर्नशिप के दौरान उन्हें फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में तैनात किया गया, जहां उन्हें कई जटिल मामलों और जमीनी सच्चाइयों को करीब से देखने का मौका मिला।
जब साल 2020 में कोरोना महामारी ने देश को अपनी चपेट में लिया, तो डॉ. नेहा अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर मरीजों की जान बचा रही थीं। अस्पताल के वार्डों में मरीजों का दर्द, संसाधनों की छीना-झपटी और बेबस इंसानों की चीख-पुकार ने उनके संवेदनशील मन को बुरी तरह झकझोर कर रख दिया।
अस्पताल में इलाज करते हुए डॉ. नेहा को महसूस हुआ कि एक डॉक्टर के तौर पर वे एक समय में केवल एक मरीज का इलाज कर सकती हैं।
लेकिन महामारी जैसी स्थिति में जब अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस और प्रशासनिक कुप्रबंधन की समस्याएं खड़ी होती हैं, तो वहां केवल दवा काम नहीं आती, बल्कि प्रशासनिक नीतियां काम आती हैं।
उन्होंने सोचा कि अगर वे एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनती हैं, तो वे स्वास्थ्य तंत्र, संसाधनों के वितरण और नीतियों को बड़े स्तर पर सुधार सकती हैं। जिससे एक साथ हजारों-लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। इसी विचार ने उनके मन में सिविल सेवा में जाने के बीज बोए।
अपनी इंटर्नशिप पूरी करने के तुरंत बाद नेहा ने बिना समय गंवाए यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2023 की तैयारी शुरू कर दी। मेडिकल की व्यस्त दिनचर्या और समय की कमी को देखते हुए उन्होंने किसी बड़ी कोचिंग में जाकर घंटो बैठने के बजाय टैबलेट कोर्स (ऑनलाइन/डिजिटल कंटेंट) को चुना। उन्होंने अपनी स्टडी को पूरी तरह से डिजिटल और केंद्रित रखा।
उन्होंने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) का चयन किया, जो मेडिकल बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए काफी तार्किक और स्कोरिंग माना जाता है।
परिवार और दोस्तों के अटूट सहयोग, सटीक रणनीति और कड़ी मेहनत के दम पर डॉ. नेहा ने UPSC CSE 2023 में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 51वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया।
सफलता के बाद डॉ. नेहा राजपूत को 2024 बैच के तहत राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। लबासना से शुरुआती ट्रेनिंग के बाद, फील्ड ट्रेनिंग के तहत उन्हें राजस्थान के अजमेर जिले में सहायक कलेक्टर और कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पद पर तैनात किया गया।
अजमेर में मई 2025 से जुलाई 2026 तक (लगभग 1 साल 2 महीने) उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्व और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का गहन अनुभव हासिल किया।
अजमेर में अपनी सफल फील्ड ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, वे 21 जुलाई 2026 से लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA), मसूरी में अपनी फेज-II (Phase-II) ट्रेनिंग के लिए लौट चुकी हैं। इस अंतिम प्रशिक्षण के बाद वे राजस्थान सरकार द्वारा स्वतंत्र उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) या समकक्ष पद पर पहली पूर्णकालिक पोस्टिंग संभालेंगी।
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कल तक जो डॉ. नेहा अस्पताल के स्टेथोस्कोप से मरीजों का इलाज कर रही थीं, आज वे एक आईएएस अधिकारी के रूप में व्यवस्था का इलाज करने के लिए प्रशासनिक कमान संभाल रही हैं। अजमेर में अपनी पहली फील्ड ट्रेनिंग को बखूबी अंजाम देने के बाद वे LBSNAA में अपनी अंतिम ट्रेनिंग ले रही हैं।
आईएएस डॉ. नेहा राजपूत की यह प्रेरणादायक यात्रा साबित करती है कि जब सेवा का जज्बा मन में हो, तो इंसान अपने कम्फर्ट ज़ोन की सीमाएं लांघकर इतिहास रच देता है।
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यह प्रेरक और जज्बे से भरी कहानी है वर्ष 2024 बैच की राजस्थान कैडर की आईएएस अधिकारी डॉ. राजपूत नेहा उद्धवसिंह की। आइए जानते हैं कि कोरोना महामारी के उस दौर में ऐसा क्या हुआ जिसने एक डॉक्टर के मन को पूरी तरह बदल दिया और उन्हें यूपीएससी की ओर मोड़ दिया।
पढ़ाई में हमेशा अव्वल और MBBS डॉक्टर बनने का सफर
एमबीबीएस की पढ़ाई और इंटर्नशिप के दौरान उन्हें फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग में तैनात किया गया, जहां उन्हें कई जटिल मामलों और जमीनी सच्चाइयों को करीब से देखने का मौका मिला।
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लेकिन महामारी जैसी स्थिति में जब अस्पताल में बेड, ऑक्सीजन, एम्बुलेंस और प्रशासनिक कुप्रबंधन की समस्याएं खड़ी होती हैं, तो वहां केवल दवा काम नहीं आती, बल्कि प्रशासनिक नीतियां काम आती हैं।
उन्होंने सोचा कि अगर वे एक आईएएस (IAS) अधिकारी बनती हैं, तो वे स्वास्थ्य तंत्र, संसाधनों के वितरण और नीतियों को बड़े स्तर पर सुधार सकती हैं। जिससे एक साथ हजारों-लाखों लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। इसी विचार ने उनके मन में सिविल सेवा में जाने के बीज बोए।
पहले ही प्रयास में झंडे गाड़े
उन्होंने अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट के रूप में एंथ्रोपोलॉजी (मानव विज्ञान) का चयन किया, जो मेडिकल बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए काफी तार्किक और स्कोरिंग माना जाता है।
परिवार और दोस्तों के अटूट सहयोग, सटीक रणनीति और कड़ी मेहनत के दम पर डॉ. नेहा ने UPSC CSE 2023 में अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 51वीं रैंक हासिल कर सबको चौंका दिया।
राजस्थान कैडर और प्रशासनिक सफर
अजमेर में मई 2025 से जुलाई 2026 तक (लगभग 1 साल 2 महीने) उन्होंने जिला प्रशासन, राजस्व और सरकारी योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का गहन अनुभव हासिल किया।
अजमेर में अपनी सफल फील्ड ट्रेनिंग पूरी करने के बाद, वे 21 जुलाई 2026 से लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी (LBSNAA), मसूरी में अपनी फेज-II (Phase-II) ट्रेनिंग के लिए लौट चुकी हैं। इस अंतिम प्रशिक्षण के बाद वे राजस्थान सरकार द्वारा स्वतंत्र उप-खंड मजिस्ट्रेट (SDM) या समकक्ष पद पर पहली पूर्णकालिक पोस्टिंग संभालेंगी।
आईएएस डॉ. नेहा राजपूत के जीवन से 4 सबसे बड़े सबक
डॉक्टर ने एप्रन छोड़ पहना IAS का तमगा, कोविड के दर्द ने बनाया UPSC टॉपर
कल तक जो डॉ. नेहा अस्पताल के स्टेथोस्कोप से मरीजों का इलाज कर रही थीं, आज वे एक आईएएस अधिकारी के रूप में व्यवस्था का इलाज करने के लिए प्रशासनिक कमान संभाल रही हैं। अजमेर में अपनी पहली फील्ड ट्रेनिंग को बखूबी अंजाम देने के बाद वे LBSNAA में अपनी अंतिम ट्रेनिंग ले रही हैं।
आईएएस डॉ. नेहा राजपूत की यह प्रेरणादायक यात्रा साबित करती है कि जब सेवा का जज्बा मन में हो, तो इंसान अपने कम्फर्ट ज़ोन की सीमाएं लांघकर इतिहास रच देता है।
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