लगातार 3 बार फेल हुए निवृत्ति सोमनाथ, फिर 5वें प्रयास में IAS बनकर रचा इतिहास
Jageshwar prasad | Jun 22, 2026, 17:49 IST
IAS NIVRUTTI SOMNATH AVHAD
महाराष्ट्र के नासिक के एक साधारण किसान परिवार के बेटे निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड ने लगातार तीन बार असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में यूपीएससी परीक्षा क्रैक की और 166वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बने।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे कठिन इम्तिहानों में गिना जाता है। इस परीक्षा की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट्स भी इसके चक्रव्यूह को भेदने में नाकाम रहे हैं।
ऐसे कठिन रास्ते पर जहां अमूमन लोग एक या दो असफलताओं के बाद हिम्मत हार जाते हैं, वहीं महाराष्ट्र के एक साधारण किसान परिवार के बेटे ने लगातार तीन करारी हार झेलने के बाद भी अपना हौसला डिगने नहीं दिया और अंततः अपने नाम के आगे आईएएस (IAS) का गौरवमयी टैग लगा कर ही दम लिया।
यह अद्भुत और प्रेरणादायक कहानी है वर्ष 2021 बैच के राजस्थान कैडर के प्रशासनिक अधिकारी निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड की। एक ऐसा युवा जो कभी पैसों की तंगी के कारण विदेश जाकर पढ़ने का अपना सपना पूरा नहीं कर सका, लेकिन उसने उसी तंगी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। आइए जानते हैं उनकी इस प्रेरणादायी जर्नी को।
आईएएस निवृत्ति सोमनाथ मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक जिले के एक बेहद साधारण और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाले किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता श्री सोमनाथ और माता श्रीमती मंदा देवी आज भी खेतों में दिन-रात पसीना बहाने वाले साधारण खेतिहर (किसान) थे।
परिवार की कोई बड़ी शैक्षिक पृष्ठभूमि नहीं थी, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का जज्बा अटूट था। निवृत्ति की तीनों बहनों ने भी विपरीत हालातों के बावजूद पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की उच्च शिक्षा हासिल की है।
निवृत्ति की शुरुआती पढ़ाई गुवांच के पास निमगांव के जिला परिषद स्कूल (सरकारी स्कूल) से हुई। इसके बाद उन्होंने बड़ागांव पिंपरी माध्यमिक विद्यालय से अपनी स्कूलिंग आगे बढ़ाई और सिंहगढ़ कॉलेज से इंजीनियरिंग (B.Tech) की डिग्री पूरी की।
इंजीनियरिंग के दौरान निवृत्ति का सपना विदेश (अमेरिका या कनाडा) जाकर उच्च शिक्षा हासिल करने का था। इसके लिए वे GRE (Graduate Record Examinations) की तैयारी करना चाहते थे।
लेकिन एक साधारण खेतिहर परिवार के लिए विदेश की पढ़ाई और जीआरई की तैयारी का खर्च उठा पाना मुमकिन नहीं था। पैसों की भारी कमी के चलते निवृत्ति को भारी मन से अपना वह सपना छोड़ना पड़ा।
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय एक निजी कंपनी में नौकरी जॉइन कर ली और करीब 3 साल तक प्राइवेट जॉब की। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा क्रैक की और मुंबई स्थित मंत्रालय में सेल ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुए।
इस सरकारी नौकरी ने उन्हें आर्थिक स्थिरता दी, लेकिन उनके भीतर का सपना कुछ और बड़ा करने का था। मंत्रालय के माहौल को देखकर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें अब देश की सबसे बड़ी सेवा - भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना है।
निवृत्ति जब यूपीएससी के मैदान में उतरे, तो सफर बेहद दर्दनाक रहा। उन्होंने लगातार तीन साल - 2016, 2017 और 2018 में असफलता का कड़वा घूंट पिया। कई बार वे प्रीलिम्स तो कई बार मेंस की दहलीज़ पर जाकर बाहर हो जाते थे।
3 साल की लगातार हार किसी भी इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि शायद यह रास्ता उसके लिए नहीं बना है। लेकिन निवृत्ति ने हार मानने के बजाय अपनी रणनीति बदली, अपनी गलतियों का बारीक विश्लेषण किया और अपनी तैयारी में निरंतरता पैंतरा अपनाया।
उनकी यह जिद रंग लाई, साल 2019 में चौथे प्रयास में उन्हें यूपीएससी में पहली सफलता मिली और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के लिए हुआ।
वे आईआरएस की नौकरी मिलने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि लक्ष्य सिर्फ आईएएस था। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपने 5वें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 166 (AIR 166) हासिल कर सीधे आईएएस के पद पर कब्जा कर लिया।
आईएएस बनने के बाद निवृत्ति सोमनाथ को राजस्थान कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने अपनी फील्ड ट्रेनिंग के बाद अपनी पहली मुख्य पोस्टिंग सरहदी जिले बाड़मेर के रामसर में उपखण्ड अधिकारी (SDM/SDO) के रूप में संभाली, जहां उन्होंने ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में आमजन की समस्याओं का त्वरित समाधान कर अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमता का परिचय दिया।
अपनी ईमानदारी, जमीनी समझ और बेहतरीन कार्यशैली के चलते आईएएस निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड वर्तमान में धौलपुर जिले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, जहां वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रहे हैं।
![आईएएस निवृत्ति सोमनाथ और आईएएस टीना डाबी]()
![IAS निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड]()
कल तक जो निवृत्ति सोमनाथ नासिक के खेतों की धूल और तंग आर्थिक हालातों के बीच अपने टूटे हुए सपनों को समेट रहे थे, आज वे धोलपुर जिला परिषद (CEO) की कमान संभालकर हजारों ग्रामीणों की तकदीर बदल रहे हैं। उनके माता-पिता आज भी गर्व से कहते हैं कि उनकी मेहनत सफल हो गई।
आईएएस निवृत्ति सोमनाथ की यह कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक जलती हुई मशाल है जो थोड़ी सी मुश्किल या एक-दो बार फेल होने पर किस्मत को दोष देकर पीछे हट जाते हैं। यह कहानी गवाह है कि अगर इरादों में सच्चाई और जिद में ईमानदारी हो, तो झोपड़ी का चिराग भी पूरे देश को रोशन कर सकता है।
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ऐसे कठिन रास्ते पर जहां अमूमन लोग एक या दो असफलताओं के बाद हिम्मत हार जाते हैं, वहीं महाराष्ट्र के एक साधारण किसान परिवार के बेटे ने लगातार तीन करारी हार झेलने के बाद भी अपना हौसला डिगने नहीं दिया और अंततः अपने नाम के आगे आईएएस (IAS) का गौरवमयी टैग लगा कर ही दम लिया।
यह अद्भुत और प्रेरणादायक कहानी है वर्ष 2021 बैच के राजस्थान कैडर के प्रशासनिक अधिकारी निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड की। एक ऐसा युवा जो कभी पैसों की तंगी के कारण विदेश जाकर पढ़ने का अपना सपना पूरा नहीं कर सका, लेकिन उसने उसी तंगी को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया। आइए जानते हैं उनकी इस प्रेरणादायी जर्नी को।
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परिवार की कोई बड़ी शैक्षिक पृष्ठभूमि नहीं थी, लेकिन बच्चों को पढ़ाने का जज्बा अटूट था। निवृत्ति की तीनों बहनों ने भी विपरीत हालातों के बावजूद पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) तक की उच्च शिक्षा हासिल की है।
निवृत्ति की शुरुआती पढ़ाई गुवांच के पास निमगांव के जिला परिषद स्कूल (सरकारी स्कूल) से हुई। इसके बाद उन्होंने बड़ागांव पिंपरी माध्यमिक विद्यालय से अपनी स्कूलिंग आगे बढ़ाई और सिंहगढ़ कॉलेज से इंजीनियरिंग (B.Tech) की डिग्री पूरी की।
पैसों की तंगी से टूटा विदेश का सपना
लेकिन एक साधारण खेतिहर परिवार के लिए विदेश की पढ़ाई और जीआरई की तैयारी का खर्च उठा पाना मुमकिन नहीं था। पैसों की भारी कमी के चलते निवृत्ति को भारी मन से अपना वह सपना छोड़ना पड़ा।
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय एक निजी कंपनी में नौकरी जॉइन कर ली और करीब 3 साल तक प्राइवेट जॉब की। इसी दौरान उन्होंने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा क्रैक की और मुंबई स्थित मंत्रालय में सेल ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुए।
इस सरकारी नौकरी ने उन्हें आर्थिक स्थिरता दी, लेकिन उनके भीतर का सपना कुछ और बड़ा करने का था। मंत्रालय के माहौल को देखकर उन्होंने ठान लिया कि उन्हें अब देश की सबसे बड़ी सेवा - भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना है।
लगातार 3 बार हुए फेल, फिर अपनाया कंसिस्टेंसी का पैंतरा
3 साल की लगातार हार किसी भी इंसान को यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि शायद यह रास्ता उसके लिए नहीं बना है। लेकिन निवृत्ति ने हार मानने के बजाय अपनी रणनीति बदली, अपनी गलतियों का बारीक विश्लेषण किया और अपनी तैयारी में निरंतरता पैंतरा अपनाया।
जब मिली सफलता
वे आईआरएस की नौकरी मिलने के बाद भी संतुष्ट नहीं हुए क्योंकि लक्ष्य सिर्फ आईएएस था। उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और अपने 5वें प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 166 (AIR 166) हासिल कर सीधे आईएएस के पद पर कब्जा कर लिया।
राजस्थान कैडर और वर्तमान प्रशासनिक कमान
अपनी ईमानदारी, जमीनी समझ और बेहतरीन कार्यशैली के चलते आईएएस निवृत्ति सोमनाथ आव्हाड वर्तमान में धौलपुर जिले में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं, जहां वे ग्रामीण विकास और पंचायती राज की योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रहे हैं।
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कल तक जो निवृत्ति सोमनाथ नासिक के खेतों की धूल और तंग आर्थिक हालातों के बीच अपने टूटे हुए सपनों को समेट रहे थे, आज वे धोलपुर जिला परिषद (CEO) की कमान संभालकर हजारों ग्रामीणों की तकदीर बदल रहे हैं। उनके माता-पिता आज भी गर्व से कहते हैं कि उनकी मेहनत सफल हो गई।
आईएएस निवृत्ति सोमनाथ की यह कहानी देश के हर उस युवा के लिए एक जलती हुई मशाल है जो थोड़ी सी मुश्किल या एक-दो बार फेल होने पर किस्मत को दोष देकर पीछे हट जाते हैं। यह कहानी गवाह है कि अगर इरादों में सच्चाई और जिद में ईमानदारी हो, तो झोपड़ी का चिराग भी पूरे देश को रोशन कर सकता है।
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