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भारत की प्रशासनिक सेवाओं में कई अधिकारी अपने काम और ईमानदारी के लिए चर्चा में रहते हैं, लेकिन कुछ अधिकारी अपनी स्पष्टवादिता और निर्भीकता के कारण भी सुर्खियों में आते हैं। ऐसी ही एक काबिल और जुझारू आईएएस अधिकारी हैं रिजु बाफना, जिन्होंने न केवल अपने प्रशासनिक कार्यों से पहचान बनाई है, बल्कि संवेदनशील मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई है।
ऋजु बाफना 2014 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनकी कार्यशैली हमेशा तेज़-तर्रार और पारदर्शी रही, जिसके चलते वे जल्दी ही आम जनता के बीच लोकप्रिय हो गईं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
रिजु बाफना का जन्म 28-9-1988 को छत्तीसगढ़ में हुआ था। उनकी पढ़ाई-लिखाई हमेशा से उत्कृष्ट रही है और बचपन से ही वह शिक्षा के प्रति गंभीर रहीं। रिजु बाफना के पिता एक वरिष्ठ पत्रकार हैं, जबकि उनकी माता रेलवे विभाग में डॉक्टर के पद पर कार्यरत थीं।
रिजु बाफना के पति भी आईएएस अफसर हैं। उन्होंने अपनी स्नातक की पढ़ाई दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से पूरी की। इसके बाद वर्ष 2011 में रिजु ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से मास्टर्स की डिग्री हासिल की।
कॉलेज के बाद UPSC की तैयारी की शुरुआत
रिजु बताती हैं कि उनका अपने माता-पिता के पेशे में जाने का कभी इरादा नहीं था। पत्रकारिता और मेडिकल दोनों ही क्षेत्र उन्हें आकर्षित नहीं करते थे। उन्हें अर्थशास्त्र हमेशा से पसंद था, इसलिए उन्होंने उसी विषय में उच्च शिक्षा ली। कॉलेज के दिनों में उनका रुझान सिविल सेवाओं की ओर बढ़ा। हालांकि उस समय तक उन्होंने पक्का निर्णय नहीं लिया था।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने ट्रेनिंग जॉइन की, लेकिन लंबे समय तक उसमें मन नहीं लगा। वे अपनी रुचि के विषय में लगातार पढ़ाई करती रहीं। आईएएस बनने से पहले उन्होंने कैम्ब्रिज इकोनॉमिक्स पॉलिसी एसोसिएट्स के लिए काम भी किया था। 2013 में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल की थी।
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सकारात्मक दृष्टिकोण सबसे महत्वपूर्ण
रिजु का मानना है कि सिविल सेवा में सफलता पाने के लिए सबसे ज़रूरी है सकारात्मक सोच रखना। वे कहती हैं –पूरी मेहनत करें, बाकी सफलता मेहनत के साथ-साथ भाग्य पर भी निर्भर करती है। मेहनत कभी खराब नहीं जाती है। मैं आज ही हमेशा सीखने की कोशिश करती हूं।
पढ़ाई और हॉबी में संतुलन जरूरी
रिजु मानती हैं कि तैयारी के दौरान केवल 12-14 घंटे लगातार पढ़ाई करना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। पढ़ाई के साथ-साथ अपनी रुचियों को समय देना भी उतना ही जरूरी है। वे बताती हैं कि UPSC की तैयारी के दौरान उन्होंने फिल्में देखना, बर्ड वॉचिंग करना और दोस्तों से मिलना कभी नहीं छोड़ा। इससे जीवन में सही संतुलन बना रहा और मानसिक ऊर्जा भी बनी रही।
बिना कोचिंग के भी मिल सकती है सफलता
रिजु के अनुसार कोचिंग लेना अनिवार्य नहीं है। सही माहौल और सकारात्मक सोच के साथ आत्मविश्वास कम नहीं होने देना चाहिए। इंटरनेट का सही उपयोग करें, नोट्स बनाएं और अच्छे दोस्तों के साथ सार्थक चर्चा करें। उनके अनुसार – 16 घंटे पढ़ना ज़रूरी नहीं है, बल्कि समाचार देखें, बहसें समझें, समाज को जानें और उस पर विचार करें। ऋजु बताती हैं कि उन्होंने कभी मॉक इंटरव्यू नहीं दिया। वे कहती हैं – जो सवाल आता था, उसका जवाब दिया और जो नहीं आता था, उसे सहजता से मना कर दिया। जैसे हैं वैसे ही रहना चाहिए, किसी भी तरह का दिखावा या कृत्रिमता नहीं होनी चाहिए। आपकी यही आदत आपको सफलता दिलवा देगी।
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यौन उत्पीड़न को लेकर उठायी आवाज
रिजु बाफना का नाम कई बार विवादों में भी रहा है। इनमें सबसे प्रमुख घटना उस समय हुई जब उन्होंने ह्यूमन राइट्स कमीशन के एक अधिकारी संतोष चौबे के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराई। उनका आरोप था कि वह अधिकारी उन्हें अश्लील संदेश भेजता था।हालाँकि मामले में तत्काल कार्रवाई की गई और आरोपी अधिकारी को पद से हटाया गया, लेकिन जब रिजु अदालत में बयान दर्ज कराने पहुँचीं तो वहां का अनुभव उनके लिए असहज रहा। उन्होंने साफ लिखा- अगर एक महिला आईएएस अधिकारी के साथ कोर्ट में असंवेदनशीलता हो सकती है, तो आम महिलाओं की स्थिति क्या होगी? उन्होंने यह भी लिखा था कि इस देश में कोई महिला न जन्मे। यहां हर कदम पर उल्लू बैठे हैं...उनकी यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रही और इसने न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल उठाए।
सर्किट हाउस विवाद
रिजु बाफना का नाम तब भी सुर्खियों में आया जब वे उज्जैन के नागदा में एसडीएम के पद पर थीं। उस समय शाजापुर के एएसपी के साथ सर्किट हाउस बुकिंग को लेकर बहस हो गई थी। यह मामला भी प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना।
करियर एक नज़र
नाम: रिजु बाफना
जन्म: 28-09-1988
जन्मस्थान: छतीसगढ़
एजुकेशन: एमए अर्थशास्त्र
बैच: 2014
केडर: मध्यप्रदेश
पदस्थापना
रिजु वर्तमान में शाजापुर की कलेक्टर (Shajapur collector) हैं। इससे पहले वे नरसिंहपुर की कलेक्टर भी रह चुकी हैं। उनकी पहली पोस्टिंग सिवनी जिले में बतौर प्रशिक्षु आईएएस अधिकारी हुई। यहां उन्होंने प्रशासनिक कार्यों को नज़दीक से समझा और लोगों की समस्याओं का समाधान करने का अनुभव प्राप्त किया। इसके बाद वे भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त, सिंगरौली में एडीएम, उज्जैन में एसडीएम और जबलपुर में जिला पंचायत सीईओ जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहीं।
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देखें IAS Riju Bafnaका सर्विस प्रोफाइल: Updated: August 29
आईएएस रिजु बाफना आज उन अफसरों में गिनी जाती हैं जिन्होंने अपने काम के साथ-साथ अपने विचारों से भी लोगों को प्रभावित किया है। उन्होंने यह साबित किया है कि प्रशासनिक पद केवल सत्ता का नहीं बल्कि जिम्मेदारी का प्रतीक है। उनकी छवि एक ईमानदार और सख्त अफसर की रही है, जो नियमों से कभी समझौता नहीं करतीं।
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