कंफर्ट जोन छोड़कर की कड़ी मेहनत, हासिल की वर्दी और बने आईपीएस आदित्य मिश्रा
Abhilasha Saksena Chakraborty | Feb 14, 2026, 17:46 IST
IPS Aditya Mishra
तीन असफलताओं के बाद हार न मानते हुए आदित्य मिश्रा ने कड़ी मेहनत से तीसरे प्रयास में यूपीएससी पास की। आज वे सख्त और ईमानदार कार्यशैली वाले आईपीएस अधिकारी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं।
“कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती,लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती…” इन्हीं पंक्तियों को साबित कर दिखाया आईपीएस आदित्य मिश्रा ने। आदित्य अपने पहले दो प्रयासों में परीक्षा पास करने में तो सफल रहे, लेकिन मंजिल नहीं पा सके। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। कोशिश जारी रखी और आखिर तीसरे प्रयास में 158 रैंक हासिल की और आईपीएस बने।
एयरोस्पेस की अच्छी-खासी नौकरी पाने का मौका छोड़कर आदित्य ने सिविल सेवा की तैयारी की रिस्क ली। उसके लिए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर कड़ी मेहनत की। आज आदित्य अपनी सख्त और ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
आईपीएस आदित्य मिश्रा के पिता अजय मिश्रा जबलपुर हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता थे। पिता से ही आदित्य को हार्डवर्क और अनुशासन की सीख मिली। उनके पिता बच्चों की पढ़ाई के लिए लंबे समय तक अलग रहकर प्रैक्टिस करते रहे।
आदित्य ने भोपाल के कैंपियन स्कूल से पढ़ाई की और फिर एमएनआईटी भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। आदित्य बताते हैं कि कॉलेज की पूरी पढ़ाई तक उन्होंने कभी भी यूपीएससी के बारे में नहीं सोचा था। कॉलेज ख़त्म होने के बाद कॉर्पोरेट नौकरी सामने थी। प्रतिष्ठित एयरोस्पेस कंपनी में इंटरव्यू था। लेकिन इंटरव्यू के कुछ समय पहले ही आदित्य को एहसास हुआ कि उन्हें सिविल सेवा के लिए एक बार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने पिता से फोन कर अपनी इच्छा बताई। पिता ने उनको कहा ठीक है। बस इतना सुनते ही अगली फ्लाइट लेकर आदित्य दो घंटे बाद दिल्ली पहुंच गए।
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आदित्य कहते हैं कि में जिस बैकग्राउंड से था, उसमें मुझे सब कुछ बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाता था। दिल्ली पहुंचने के बाद असली चुनौती शुरू हुई। यहां न घर का आराम था, न तय रास्ता। कमरे का किराया, खाने की व्यवस्था, पढ़ाई का सही मटेरियल, हर चीज खुद समझनी पड़ी। उन्होंने बताया कि सिविल सेवा की तैयारी केवल किताबों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की भी यात्रा होती है।
आदित्य कहते हैं कि इस परीक्षा में आपकी फिजिकल फिटनेस के साथ मेंटल और इमोशनल फिटनेस भी जरूरी है। कई बार ऐसा समय आता है जब अनिश्चितता का डर लगने लगता है। लेकिन, जब हम इस डर को दूर रखकर अपनी मंजिल की तरफ एकाग्रता के साथ आगे बढ़ते जाते हैं तो डर बहुत पीछे छूट जाता है। हर दिन योग, फिटनेस और सकारात्मक सोच भी तैयारी का जरूरी हिस्सा होता है। वे मानते हैं कि सिविल सेवा केवल ज्ञान नहीं, व्यक्तित्व की परीक्षा है। हमेशा असफलता के लिए भी तैयार रहें, क्योंकि वो जीवन का हिस्सा हैं। नकारात्मकता से बचने के लिए अच्छी किताबें पढ़ें, परिवार और दोस्तों से बात करें।
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आदित्य बताते हैं कि वो पूरे दिन के संघर्ष के लिए ख़ुद को तैयार करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर आधे घंटे मोटिवेशन ऑडियो जरूर सुनते थे। कई बार दिन में दो बार इन वीडियो के लिए समय निकालते थे। इससे उन्हें लगातार मेहनत करने की ऊर्जा मिलती थी।
आईपीएस आदित्य कहते हैं, मैंने तैयारी से लेकर आईपीएस बनने तक जो एक बात सीखी वो यह है कि इस परीक्षा में सबसे ज्यादा जरूरी हार्डवर्क है। आप कितने भी इंटेलीजेंट हो, लेकिन अगर निरंतर हार्डवर्क नहीं किया तो किसी मतलब का नहीं। अपने तैयारी के दिनों को याद करते हुए आदित्य कहते हैं कि मैंने तीन बार इंटरव्यू दिए, तीनो में सफल हुआ। पहले दो प्रयासों में आईपीएस नहीं बन पाया। मैंने हार नहीं मानी, रुका नहीं और तीसरे प्रयास में और ज्यादा मेहनत की और आखिर वर्दी मिल ही गई।
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उनके अनुसार इंटरव्यू में सब कुछ जानना जरूरी नहीं।ईमानदारी जरूरी है।उत्तर नहीं पता तो स्वीकार करें, विनम्रता से ना कह दें। बोर्ड आपका कॉन्फिडेंस चेक करता है, आपकी रटने की क्षमता नहीं।
आदित्य मिश्रा की पहली पोस्टिंग इंदौर में हुई। इसी दौरान कोरोना महामारी का दौर आया और ड्यूटी के दौरान वे खुद संक्रमित हो गए। अस्पताल में भर्ती रहने के बाद ठीक होने पर उन्होंने प्लाज्मा डोनेट किया ताकि अन्य मरीजों की मदद हो सके। उनके लिए यह कर्तव्य से बढ़कर मानवता का काम था।
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बालाघाट में डबल मनी फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों पर कार्रवाई के बाद आदित्य मिश्रा चर्चा में रहे। नक्सल विरोधी अभियानों में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। साहसिक कार्यों के लिए उन्हें दो बार वीरता पदक मिला। आदित्य कहते हैं, अगर लोग प्रशासन तक नहीं पहुंच सकते तो प्रशासन को लोगों तक पहुंचना होगा।
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एसपी आदित्य मिश्रा ने बिना हेलमेट बाइक चला रहे पूर्व विधायक उमाशंकर मुंजारे को रास्ते में रोक लिया। इस दौरान दोनों के बीच तीखी बहस भी हुई, लेकिन एसपी ने नियमों से समझौता नहीं किया और 2300 रुपये का चालान जारी कर दिया। चालान जमा न करने पर बाइक को जब्त कर थाने भिजवा दिया गया।
उनकी छोटी बहन पल्लवी मिश्रा भी आईएएस अधिकारी बनीं। भाई के मार्गदर्शन में बिना कोचिंग परीक्षा पास कर त्रिपुरा कैडर में पदस्थ हैं। आईएएस पल्लवी मिश्रा इस समय जम्मू-कश्मीर में पोस्टेड हैं।
आईपीएस आदित्य मिश्रा वर्तमान में बालाघाट में एसपी के पद पर कार्यरत हैं। पहले वो राजगढ़ एसपी, बालाघाट एएसपी और इंदौर में डीसीपी के पदों पर भी कार्य कर चुके हैं।
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एयरोस्पेस की अच्छी-खासी नौकरी पाने का मौका छोड़कर आदित्य ने सिविल सेवा की तैयारी की रिस्क ली। उसके लिए अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलकर कड़ी मेहनत की। आज आदित्य अपनी सख्त और ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।
घर से मिली अनुशासन की सीख
आदित्य ने भोपाल के कैंपियन स्कूल से पढ़ाई की और फिर एमएनआईटी भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया। आदित्य बताते हैं कि कॉलेज की पूरी पढ़ाई तक उन्होंने कभी भी यूपीएससी के बारे में नहीं सोचा था। कॉलेज ख़त्म होने के बाद कॉर्पोरेट नौकरी सामने थी। प्रतिष्ठित एयरोस्पेस कंपनी में इंटरव्यू था। लेकिन इंटरव्यू के कुछ समय पहले ही आदित्य को एहसास हुआ कि उन्हें सिविल सेवा के लिए एक बार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने पिता से फोन कर अपनी इच्छा बताई। पिता ने उनको कहा ठीक है। बस इतना सुनते ही अगली फ्लाइट लेकर आदित्य दो घंटे बाद दिल्ली पहुंच गए।
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दिल्ली ने पहली बार जीवन की चुनौतियों से हुआ सामना
फिजिकल, मेंटल और इमोशनल फिटनेस में बैलेंस जरूरी
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हर दिन सुनते थे मोटिवेशन ऑडियो
इंटेलिजेंस से ज्यादा हार्डवर्क आता है काम
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इंटरव्यू का मंत्र
कोरोना से निपटकर किया प्लाज्मा डोनेट
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बालाघाट में बनाई अलग पहचान
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पूर्व विधायक का काटा चालान
बहन भी हैं आईएएस अधिकारी
करियर एक नजर
- नाम: आदित्य मिश्रा
- जन्म: 8-2-1993
- जनस्थान: भोपाल
- एजुकेशन: बीटेक
- बैच: 2018
- कैडर: मध्य प्रदेश
पदस्थापना
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FAQ
- 1. आईपीएस आदित्य मिश्रा कौन हैं?
आदित्य मिश्रा 2018 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं, जो अपनी सख्त और ईमानदार कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। - 2. आदित्य मिश्रा ने यूपीएससी कितने प्रयासों में पास की?
उन्होंने पहले तीन प्रयासों में असफलता का सामना किया, लेकिन चौथे प्रयास में सफलता हासिल की। - 3. उनकी पहली पोस्टिंग कहां हुई थी?
उनकी पहली पोस्टिंग इंदौर में हुई थी, जहां कोरोना काल के दौरान संक्रमित होने के बाद उन्होंने प्लाज्मा डोनेट भी किया।
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