करियर के नए मायने: अब जिम्मेदारी नहीं, आजादी की चाह
Jinesh Jain | Jun 11, 2026, 19:54 IST
Photograph: (the sootr)
युवा पीढ़ी के लिए करियर के मायने बदल रहे हैं। वह अब करियर के लिए दौड़ नहीं रही है, बल्कि बेहद संजीदे तरीके से वैकल्पिक माध्यमों पर भी मंथन कर रही है। आइए समझते हैं करियर के नए मायनों को:
Jaipur: आज की युवा पीढ़ी के लिए करियर के मायने वो नहीं रहे, जो कभी हुआ करते थे। पत्रकार, डिजाइनर, शिक्षक या मैनेजर बनने के अपने सपनों के साथ-साथ आज के युवा निवेश (इन्वेस्टमेंट), साइड बिज़नेस, कंटेंट क्रिएशन और कमाई के वैकल्पिक जरियों के बारे में भी बेहद संजीदगी से सोच रहे हैं।
इस पीढ़ी के लिए करियर अब कोई सीधा या एकतरफा रास्ता नहीं है। यह अलग-अलग प्राथमिकताओं और प्रयासों का एक गुलदस्ता (पोर्टफोलियो) है, जो सब मिलकर काम करते हैं।
रोचक बात यह है कि जो चीज कभी अजीब या अलग लगा करती थी, वह अब तेजी से सामान्य होती जा रही है।
जेन जी का एक बड़ा हिस्सा अनिश्चितताओं के साए में पला-बढ़ा है। फिर चाहे वह वैश्विक महामारी (कोविड-19) हो, राजनीतिक उथल-पुथल हो या फिर कई उद्योगों में बड़े पैमाने पर हुई छंटनी।
इस पीढ़ी के लिए पारंपरिक शिक्षा अब करियर की स्थिरता की वह गारंटी नहीं देती जो कभी उनके माता-पिता या दादा-दादी के जमाने में मिलती थी।
नतीजतन, यह नई पीढ़ी अब कमाई के कई साधन चाहती है और हार्ड वर्क (कड़ी मेहनत) से ज्यादा स्मार्ट वर्क पर भरोसा करती है।
डेलॉयट 2025 जेन जी और मिलेनियल सर्वे के अनुसार केवल 6% जेन जी युवाओं ने ही बोला कि उनका मुख्य करियर लक्ष्य किसी वरिष्ठ नेतृत्व पद (सीनियर लीडरशिप पोजीशन) तक पहुंचना है।
नौकरी के बड़े टाइटल या आलीशान केबिन से अपनी सफलता को नापने के बजाय ये युवा अब कामयाबी की परिभाषा को नए सिरे से तय कर रहे हैं। उनके लिए व्यक्तिगत संतुष्टि, रचनात्मक आजादी और काम से इतर एक सेहतमंद एवं संतुलित जीवन जीना ज्यादा मायने रखता है।
लेकिन इस बदलाव के पीछे एक और बड़ी वजह है-भरोसा। कई युवा प्रोफेशनल्स को अब इस बात पर भरोसा नहीं रहा कि कोई एक कंपनी, कोई एक डिग्री या कोई एक पेशा उन्हें जीवनभर की सुरक्षा दे सकता है।
एक करियर काउंसलर के अनुसार जिस पीढ़ी ने महामारी के दौरान व्यापार बंद होते देखे, टेक सेक्टर में छंटनी की लहरें झेलीं और जो अब रोजाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा नौकरियों को बदलने की भविष्यवाणियां सुन रही है, उसने वक्त से पहले एक कड़वा सबक सीख लिया है। नौकरियां उतनी स्थायी नहीं हैं जितनी कभी लगा करती थीं।
आजकल यदि आप किसी जेन जी प्रोफेशनल से उनके लॉन्ग-टर्म गोल्स के बारे में बात करेंगे, तो मुमकिन है कि बातचीत का रुख पैसिव इनकम, इन्वेस्टमेंट, साइड हसल (अतिरिक्त काम) या कमाई के किसी ऐसे साधन की तरफ मुड़ जाएगा जो उनके सक्रिय रूप से काम न करने पर भी जारी रहे।
आज की युवा पीढ़ी पैसों के बारे में पिछली पीढ़ियों से बिलकुल अलग सोचती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता (फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस) उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये युवा कम उम्र में ही निवेश, बजटिंग, ऑनलाइन कमाई के जरिए और फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में सीख रहे हैं, ताकि वे पैसिव इनकम और लंबी अवधि के लिए आर्थिक सुरक्षा का ढांचा तैयार कर सकें।
यह एक बेहद तार्किक लक्ष्य भी है-आज कुछ ऐसा बनाना जो कल भी फल देता रहे, ताकि कोई खराब महीना, किसी क्लाइंट का चले जाना या कोई अचानक आया खर्च उनकी पूरी जिंदगी को तहस-नहस न कर दे।
आय का केवल एक स्थिर ज़रिया चाहने के बजाय वे अब पहले अलग-अलग करियर तलाशना चाहते हैं और फिर उसे चुनना चाहते हैं जो उन्हें सबसे सही लगे। कुछ मामलों में तो युवा किसी एक करियर पर टिकने के बजाय लगातार विविधता को आजमाना चाहते हैं।
जिसे पुरानी पीढ़ियां अस्थिरता या भटकाव समझ सकती हैं, वह असल में सुरक्षा की एक खोज है। पैसिव इनकम के लिए यह दीवानगी रातों-रात अमीर बनने के बारे में नहीं है। अमूमन, यह इस बात को पक्का करने के लिए है कि जिंदगी में आने वाला कोई एक झटका उनके पूरे लाइफ प्लान को बर्बाद न कर दे।
मूल रूप से पैसिव इनकम की यह होड़ असल में एंग्जायटी मैनेजमेंट (चिंता का प्रबंधन) है। जब कोई पीढ़ी बिना किसी सुरक्षा कवच (सेफ्टी नेट) के बड़ी होती है, तो वह अपना सुरक्षा कवच खुद बनाने का फैसला करती है।
पुरानी पीढ़ी एक पेशे, एक नौकरी और रिटायरमेंट पर विश्वास करती थी। इसलिए पहले का वह फॉर्मूला कि-मन लगाकर पढ़ो, एक स्थायी नौकरी पाओ और गुजारे के लिए आय के एक निश्चित स्रोत पर निर्भर रहो-अब इन युवाओं को व्यावहारिक नहीं लगता।
कई भारतीय परिवारों में माता-पिता ने स्थिरता पाने के लिए दशक बिता दिए। हालांकि, उनके बच्चों ने बड़े होते हुए देखा कि स्थिरता भी अस्थायी हो सकती है। नतीजतन, आज सुरक्षा को आय के एक साधन से नहीं, बल्कि कई साधनों से परिभाषित किया जा रहा है।
आजकल कई जेन जी प्रोफेशनल्स किसी न किसी साइड हसल (अतिरिक्त काम) पर प्रयोग कर रहे हैं-चाहे वह कोई प्रोडक्ट बनाना हो, ऐप डेवलप करना हो, AI-आधारित सेवाएं देना हो, कंटेंट क्रिएशन हो, कोई ब्रांड लॉन्च करना हो या ऑनलाइन डिजिटल प्रोडक्ट बेचना हो।
जैसे-जैसे जॉब मार्केट अप्रत्याशित होता जा रहा है (खासकर AI की तेज़ प्रगति के कारण), खुद का कुछ खड़ा करना कमाई का सबसे भरोसेमंद ज़रिया लगने लगा है-एक ऐसी कमाई जिसे कोई नियोक्ता (एम्प्लॉयर) उनसे छीन नहीं सकता। यह पीढ़ी या तो अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रही है, या इसके शुरुआती कदम उठा चुकी है।
आज ऐसा लगता है कि हर किसी को एक साइड हसल चाहिए। स्वतंत्र रूप से छोटी रकम कमाना भी अब महज एक हॉबी (शौक) रखने से ज़्यादा कीमती माना जाता है।
सोशल मीडिया ने इस सोच को और रफ्तार दी है। इंस्टाग्राम, लिंक्डइन या यूट्यूब खोलिए और आपको ऐसे क्रिएटर्स, कंसल्टेंट्स, फ्रीलांसर्स और फाउंडर्स की कहानियां मिल जाएंगी, जो अपने सफर के हर पड़ाव को खुलकर शेयर करते हैं।
अब एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमशीलता) ऐसी चीज़ नहीं लगती जो सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए चुनिंदा हो। यह सुलभ, दृश्यमान और हासिल करने योग्य लगती है।
फिर भी यहां एक विडंबना है। जेन जी को अक्सर उस पीढ़ी के रूप में देखा जाता है, जो वर्क-लाइफ बैलेंस (काम और निजी जीवन में संतुलन) को सबसे ज़्यादा अहमियत देती है, लेकिन इसके बावजूद वे फुल-टाइम जॉब, फ्रीलांस प्रोजेक्ट्स, कंटेंट क्रिएशन, नेटवर्किंग और साइड बिजनेस को एक साथ संभाल रहे हैं।
किसी एक करियर पर निर्भरता से बचने के चक्कर में, वे असल में अपने से पहली पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा काम कर रहे हैं। शायद आधुनिक वर्क कल्चर का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। मकसद कम काम करना नहीं है। मकसद कभी फंसा हुआ (ट्रैप्ड) महसूस न करना है।
सोशल मीडिया ने एंटरप्रेन्योरशिप को एक दूर के सपने से बदलकर एक ऐसी हकीकत बना दिया है जो पूरी तरह से पहुंच में लगती है।
इंस्टाग्राम, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर युवा लगातार उन क्रिएटर्स, फ्रीलांसर्स और छोटे बिजनेस मालिकों को देख रहे हैं जो अपनी कमाई, प्रोजेक्ट्स और प्रोफेशनल जर्नी को खुलकर साझा करते हैं।
इसके चलते पारंपरिक 9-से-5 की नौकरी अब सफलता का इकलौता पैमाना नहीं रह गई है जिसे देखकर जेन जी प्रेरित हों।
विशेषज्ञ कहते हैं, आज के कई युवा प्रोफेशनल्स के लिए नौकरी अब आखिरी मंज़िल नहीं है। यह उनके बड़े फाइनेंशियल प्लान का महज़ एक हिस्सा भर है। उनका सपना ज़रूरी नहीं कि कोई सीईओ, मैनेजर या फाउंडर बनना ही हो। उनका सपना है-विकल्पों (Options) का होना। इसलिए, जेन जी काम को खारिज नहीं कर रहे हैं। वे निर्भरता (Dependence) को खारिज कर रहे हैं।
क्या चुनाव में दिख सकता है कॉकरोच सिंबल, जानिए इलेक्शन कमीशन के नियम?
क्या नई पीढ़ी शराब से कर रही तौबा, जानिए अब वो क्या चाह रही?
सेविंग अकाउंट से मोहभंग, एफडी की तरफ भाग रहे भारतीय
क्यों हल्की आंधियां भी दिल्ली-एनसीआर तक ले जा रही हैं राजस्थान की धूल, जानिए पूरा कारण
इस पीढ़ी के लिए करियर अब कोई सीधा या एकतरफा रास्ता नहीं है। यह अलग-अलग प्राथमिकताओं और प्रयासों का एक गुलदस्ता (पोर्टफोलियो) है, जो सब मिलकर काम करते हैं।
रोचक बात यह है कि जो चीज कभी अजीब या अलग लगा करती थी, वह अब तेजी से सामान्य होती जा रही है।
बदलते समय की चुनौतियां
इस पीढ़ी के लिए पारंपरिक शिक्षा अब करियर की स्थिरता की वह गारंटी नहीं देती जो कभी उनके माता-पिता या दादा-दादी के जमाने में मिलती थी।
नतीजतन, यह नई पीढ़ी अब कमाई के कई साधन चाहती है और हार्ड वर्क (कड़ी मेहनत) से ज्यादा स्मार्ट वर्क पर भरोसा करती है।
डेलॉयट 2025 जेन जी और मिलेनियल सर्वे के अनुसार केवल 6% जेन जी युवाओं ने ही बोला कि उनका मुख्य करियर लक्ष्य किसी वरिष्ठ नेतृत्व पद (सीनियर लीडरशिप पोजीशन) तक पहुंचना है।
नौकरी के बड़े टाइटल या आलीशान केबिन से अपनी सफलता को नापने के बजाय ये युवा अब कामयाबी की परिभाषा को नए सिरे से तय कर रहे हैं। उनके लिए व्यक्तिगत संतुष्टि, रचनात्मक आजादी और काम से इतर एक सेहतमंद एवं संतुलित जीवन जीना ज्यादा मायने रखता है।
भरोसे का संकट
एक करियर काउंसलर के अनुसार जिस पीढ़ी ने महामारी के दौरान व्यापार बंद होते देखे, टेक सेक्टर में छंटनी की लहरें झेलीं और जो अब रोजाना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा नौकरियों को बदलने की भविष्यवाणियां सुन रही है, उसने वक्त से पहले एक कड़वा सबक सीख लिया है। नौकरियां उतनी स्थायी नहीं हैं जितनी कभी लगा करती थीं।
युवा पीढ़ी
पैसिव इनकम का बढ़ता चलन
आज की युवा पीढ़ी पैसों के बारे में पिछली पीढ़ियों से बिलकुल अलग सोचती है। आर्थिक आत्मनिर्भरता (फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस) उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये युवा कम उम्र में ही निवेश, बजटिंग, ऑनलाइन कमाई के जरिए और फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में सीख रहे हैं, ताकि वे पैसिव इनकम और लंबी अवधि के लिए आर्थिक सुरक्षा का ढांचा तैयार कर सकें।
यह एक बेहद तार्किक लक्ष्य भी है-आज कुछ ऐसा बनाना जो कल भी फल देता रहे, ताकि कोई खराब महीना, किसी क्लाइंट का चले जाना या कोई अचानक आया खर्च उनकी पूरी जिंदगी को तहस-नहस न कर दे।
आय का केवल एक स्थिर ज़रिया चाहने के बजाय वे अब पहले अलग-अलग करियर तलाशना चाहते हैं और फिर उसे चुनना चाहते हैं जो उन्हें सबसे सही लगे। कुछ मामलों में तो युवा किसी एक करियर पर टिकने के बजाय लगातार विविधता को आजमाना चाहते हैं।
जिसे पुरानी पीढ़ियां अस्थिरता या भटकाव समझ सकती हैं, वह असल में सुरक्षा की एक खोज है। पैसिव इनकम के लिए यह दीवानगी रातों-रात अमीर बनने के बारे में नहीं है। अमूमन, यह इस बात को पक्का करने के लिए है कि जिंदगी में आने वाला कोई एक झटका उनके पूरे लाइफ प्लान को बर्बाद न कर दे।
मूल रूप से पैसिव इनकम की यह होड़ असल में एंग्जायटी मैनेजमेंट (चिंता का प्रबंधन) है। जब कोई पीढ़ी बिना किसी सुरक्षा कवच (सेफ्टी नेट) के बड़ी होती है, तो वह अपना सुरक्षा कवच खुद बनाने का फैसला करती है।
पुरानी पीढ़ी एक पेशे, एक नौकरी और रिटायरमेंट पर विश्वास करती थी। इसलिए पहले का वह फॉर्मूला कि-मन लगाकर पढ़ो, एक स्थायी नौकरी पाओ और गुजारे के लिए आय के एक निश्चित स्रोत पर निर्भर रहो-अब इन युवाओं को व्यावहारिक नहीं लगता।
कई भारतीय परिवारों में माता-पिता ने स्थिरता पाने के लिए दशक बिता दिए। हालांकि, उनके बच्चों ने बड़े होते हुए देखा कि स्थिरता भी अस्थायी हो सकती है। नतीजतन, आज सुरक्षा को आय के एक साधन से नहीं, बल्कि कई साधनों से परिभाषित किया जा रहा है।
एक सुरक्षित रास्ते की तलाश
जैसे-जैसे जॉब मार्केट अप्रत्याशित होता जा रहा है (खासकर AI की तेज़ प्रगति के कारण), खुद का कुछ खड़ा करना कमाई का सबसे भरोसेमंद ज़रिया लगने लगा है-एक ऐसी कमाई जिसे कोई नियोक्ता (एम्प्लॉयर) उनसे छीन नहीं सकता। यह पीढ़ी या तो अपना खुद का बिजनेस शुरू करने की योजना बना रही है, या इसके शुरुआती कदम उठा चुकी है।
आज ऐसा लगता है कि हर किसी को एक साइड हसल चाहिए। स्वतंत्र रूप से छोटी रकम कमाना भी अब महज एक हॉबी (शौक) रखने से ज़्यादा कीमती माना जाता है।
सोशल मीडिया ने इस सोच को और रफ्तार दी है। इंस्टाग्राम, लिंक्डइन या यूट्यूब खोलिए और आपको ऐसे क्रिएटर्स, कंसल्टेंट्स, फ्रीलांसर्स और फाउंडर्स की कहानियां मिल जाएंगी, जो अपने सफर के हर पड़ाव को खुलकर शेयर करते हैं।
अब एंटरप्रेन्योरशिप (उद्यमशीलता) ऐसी चीज़ नहीं लगती जो सिर्फ कुछ खास लोगों के लिए चुनिंदा हो। यह सुलभ, दृश्यमान और हासिल करने योग्य लगती है।
युवा पीढ़ी का करियर
एक विरोधाभास भी
किसी एक करियर पर निर्भरता से बचने के चक्कर में, वे असल में अपने से पहली पीढ़ियों की तुलना में कहीं ज्यादा काम कर रहे हैं। शायद आधुनिक वर्क कल्चर का सबसे बड़ा विरोधाभास यही है। मकसद कम काम करना नहीं है। मकसद कभी फंसा हुआ (ट्रैप्ड) महसूस न करना है।
सिर्फ एक करियर से बढ़कर
इंस्टाग्राम, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म्स पर युवा लगातार उन क्रिएटर्स, फ्रीलांसर्स और छोटे बिजनेस मालिकों को देख रहे हैं जो अपनी कमाई, प्रोजेक्ट्स और प्रोफेशनल जर्नी को खुलकर साझा करते हैं।
इसके चलते पारंपरिक 9-से-5 की नौकरी अब सफलता का इकलौता पैमाना नहीं रह गई है जिसे देखकर जेन जी प्रेरित हों।
विशेषज्ञ कहते हैं, आज के कई युवा प्रोफेशनल्स के लिए नौकरी अब आखिरी मंज़िल नहीं है। यह उनके बड़े फाइनेंशियल प्लान का महज़ एक हिस्सा भर है। उनका सपना ज़रूरी नहीं कि कोई सीईओ, मैनेजर या फाउंडर बनना ही हो। उनका सपना है-विकल्पों (Options) का होना। इसलिए, जेन जी काम को खारिज नहीं कर रहे हैं। वे निर्भरता (Dependence) को खारिज कर रहे हैं।
FAQ
- क्या नई पीढ़ी में करियर का ट्रेंड बदल रहा है?
नई पीढ़ी अब कमाई के कई साधन चाहती है। हार्ड वर्क (कड़ी मेहनत) से ज़्यादा स्मार्ट वर्क पर भरोसा करती है। वे कमाई के लिए वैकल्पिक माध्यमों को भी तलाश रही है। - नई पीढ़ी के करियर ट्रेंड को लेकर सर्वे क्या कहते हैं?
डेलॉयट 2025 जेन जी और मिलेनियल सर्वे के अनुसार केवल 6% जेन जी युवाओं ने ही बोला कि उनका मुख्य करियर लक्ष्य किसी वरिष्ठ नेतृत्व पद (सीनियर लीडरशिप पोजीशन) तक पहुंचना है। यानी नौकरी के बड़े टाइटल या आलीशान केबिन से अपनी सफलता को नापने के बजाय युवा अब कामयाबी की परिभाषा को नए सिरे से तय कर रहे हैं। - पैसे को लेकर नई पीढ़ी क्या सोचती है?
आज की युवा पीढ़ी पैसों के बारे में पिछली पीढ़ियों से बिलकुल अलग सोचती है। फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये युवा कम उम्र में ही निवेश, बजटिंग, ऑनलाइन कमाई के ज़रिए और फाइनेंशियल प्लानिंग के बारे में सीख रहे हैं, ताकि वे पैसिव इनकम और लंबी अवधि के लिए आर्थिक सुरक्षा का ढांचा तैयार कर सकें।
ये खबर भी पढे़:-
क्या नई पीढ़ी शराब से कर रही तौबा, जानिए अब वो क्या चाह रही?
सेविंग अकाउंट से मोहभंग, एफडी की तरफ भाग रहे भारतीय
क्यों हल्की आंधियां भी दिल्ली-एनसीआर तक ले जा रही हैं राजस्थान की धूल, जानिए पूरा कारण
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman