10 अगस्त का इतिहास: अन्याय के खिलाफ बंदूक उठाने वाली फूलन देवी की कहानी
Kaushiki | Aug 10, 2026, 08:00 IST
phoolan devi biography
10 अगस्त 1963 को जन्मीं फूलन देवी की कहानी चंबल के बीहड़ से शुरू होकर भारत की संसद तक पहुंचती है। बाल विवाह, भयंकर शोषण और अन्याय के खिलाफ उन्होंने बंदूक उठाई। बाद में उन्होंने आत्मसमर्पण किया और सांसद बनीं। जानिए उनकी जीवन गाथा।
Phoolan Devi Autobiography: 10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन जिले में एक बच्ची का जन्म हुआ। उसका नाम फूलन देवी रखा गया। किसी ने नहीं सोचा था कि यह छोटी बच्ची आगे चलकर चंबल की सबसे चर्चित डकैत बनेगी। उसका बचपन से लेकर बड़े होने तक का सफर दर्द और संघर्षों से भरा रहा। गरीबी और सामाजिक अन्याय ने उसे बहुत कम उम्र में ही तोड़ दिया था।
सिर्फ 11 साल की उम्र में उसका बाल विवाह कर दिया गया। पति की उम्र उससे बहुत अधिक थी। वहां उसे शारीरिक और मानसिक अत्याचार सहने पड़े। समाज ने उसकी कभी मदद नहीं की। हर मोड़ पर उसे अपमान और शोषण ही मिला। इन जुल्मों ने उसके अंदर के गुस्से को भड़का दिया। आखिरकार उसने अन्याय के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
उसने मध्य प्रदेश चंबल के बीहड़ों का रुख किया और हाथ में बंदूक उठा ली। लोग उसे बैंडिट क्वीन कहने लगे। उसने अपने साथ हुए अत्याचारों का बदला लिया। बाद में उसने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जेल से बाहर आने के बाद उसने राजनीति में कदम रखा और सांसद बनी। आइए जानें उनके इस पूरे सफर की रोमांचक कहानी।
![फूलन देवी: भारत ने अपनी डाकू रानी को कैसे जन्म दिया? - Mahabahu.com]()
फूलन का जन्म एक बहुत ही गरीब मल्लाह परिवार में हुआ था। उनका परिवार जालौन जिले के पुरवा गांव में रहता था। बचपन से ही उन्हें गरीबी और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा।
गांव के ताकतवर लोग उनके परिवार की जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। फूलन ने बहुत छोटी उम्र में ही इस अन्याय का विरोध किया। उनकी निडरता गांव के दबंगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई।
![फूलन देवी: भारत ने अपनी डाकू रानी को कैसे जन्म दिया? - Mahabahu.com]()
जब फूलन मात्र 11 साल की थीं, उनका विवाह कर दिया गया। पति उम्र में उनसे बहुत बड़ा था और उन पर अत्याचार करता था। तबीयत बिगड़ने पर वह वापस अपने पिता के घर आ गईं। लेकिन गांव के दबंगों ने उन्हें वहां भी चैन से जीने नहीं दिया। पुलिस और समाज ने पीड़िता की मदद करने से साफ इनकार कर दिया। इस रवैये ने फूलन के दिल में गहरा गुस्सा भर दिया।
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लगातार हो रहे अत्याचारों से तंग आकर उन्होंने गांव छोड़ दिया। साल 1970 के दशक के अंत में वह चंबल के डाकुओं के संपर्क में आईं। विक्रम मल्लाह नाम के डाकू ने उनका समर्थन किया।
विक्रम ने फूलन को बंदूक चलाना और जंगल में रहना सिखाया। अब फूलन देवी साधारण लड़की से बागी बन चुकी थीं। जल्द ही वह गिरोह की एक प्रमुख सदस्य बन गईं।
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फूलन के जीवन में बेहमई गांव की घटना सबसे भयानक मोड़ थी। वहां उच्च जाति के लोगों ने उन्हें हफ्तों तक बंदी बनाकर रखा। उनके साथ बहुत ही निर्दयी और क्रूर व्यवहार किया गया।
इस अपमान का बदला लेने के लिए फूलन ने भयानक योजना बनाई। फरवरी 1981 में बेहमई गांव में 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पूरे देश में उनके नाम का खौफ फैल गया।
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बेहमई कांड के बाद मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस सक्रिय हो गई। पुलिस ने चंबल के जंगलों में बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया। फूलन देवी (Dacoit Phoolan Devi) ने कई महीनों तक पुलिस को चकमा दिया।
फरवरी 1983 में उन्होंने मध्य प्रदेश के भिंड में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने अपने हथियार डाले। आत्मसमर्पण के लिए उन्होंने अपनी कुछ सख्त शर्तें भी रखी थीं।
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आत्मसमर्पण के बाद फूलन को ग्वालियर और तिहाड़ जेल भेजा गया। उन पर हत्या और अपहरण के दर्जनों मामले दर्ज किए गए। बिना मुकदमे के वह लगभग 11 साल तक जेल में रहीं।
साल 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने उनके मामले वापस लिए। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने नया जीवन शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने शादी की और समाज सेवा के कामों से जुड़ गईं।
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साल 1996 में फूलन देवी ने राजनीति में प्रवेश करने का मन बनाया। समाजवादी पार्टी ने उन्हें मिर्जापुर से लोकसभा का टिकट दिया। वह चुनाव जीतकर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद पहुंचीं।
संसद में उन्होंने गरीब और शोषित महिलाओं की आवाज उठाई। साल 1999 में वह दोबारा मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं। उनका यह सफर दुनिया भर के मीडिया के लिए एक मिसाल बना।
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25 जुलाई 2001 को नई दिल्ली में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। सांसद आवास के बाहर ही हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं। शेर सिंह राणा नाम के व्यक्ति ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली।
मात्र 37 साल की उम्र में फूलन देवी का जीवन समाप्त हो गया। आज भी लोग उन्हें एक विवादित लेकिन साहसी महिला के रूप में याद करते हैं। उनकी जिंदगी पर कई पुस्तकें और फिल्में भी बन चुकी हैं।
Reference:
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 10 अगस्त का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 10 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
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साल 1905 में आज ही के दिन कोलकाता से शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन का इतिहास
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सिर्फ 11 साल की उम्र में उसका बाल विवाह कर दिया गया। पति की उम्र उससे बहुत अधिक थी। वहां उसे शारीरिक और मानसिक अत्याचार सहने पड़े। समाज ने उसकी कभी मदद नहीं की। हर मोड़ पर उसे अपमान और शोषण ही मिला। इन जुल्मों ने उसके अंदर के गुस्से को भड़का दिया। आखिरकार उसने अन्याय के आगे झुकने से इनकार कर दिया।
उसने मध्य प्रदेश चंबल के बीहड़ों का रुख किया और हाथ में बंदूक उठा ली। लोग उसे बैंडिट क्वीन कहने लगे। उसने अपने साथ हुए अत्याचारों का बदला लिया। बाद में उसने सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जेल से बाहर आने के बाद उसने राजनीति में कदम रखा और सांसद बनी। आइए जानें उनके इस पूरे सफर की रोमांचक कहानी।
फूलन देवी: भारत ने अपनी डाकू रानी को कैसे जन्म दिया? - Mahabahu.com
फूलन देवी का शुरुआती बचपन
गांव के ताकतवर लोग उनके परिवार की जमीन पर कब्जा करना चाहते थे। फूलन ने बहुत छोटी उम्र में ही इस अन्याय का विरोध किया। उनकी निडरता गांव के दबंगों को बिल्कुल पसंद नहीं आई।
फूलन देवी: भारत ने अपनी डाकू रानी को कैसे जन्म दिया? - Mahabahu.com
बाल विवाह और दर्दनाक शोषण
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चंबल के बीहड़ में पहला कदम
विक्रम ने फूलन को बंदूक चलाना और जंगल में रहना सिखाया। अब फूलन देवी साधारण लड़की से बागी बन चुकी थीं। जल्द ही वह गिरोह की एक प्रमुख सदस्य बन गईं।
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बेहमई कांड और बदले की आग
इस अपमान का बदला लेने के लिए फूलन ने भयानक योजना बनाई। फरवरी 1981 में बेहमई गांव में 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पूरे देश में उनके नाम का खौफ फैल गया।
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सरकार के सामने ऐतिहासिक सरेंडर
फरवरी 1983 में उन्होंने मध्य प्रदेश के भिंड में आत्मसमर्पण किया। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने अपने हथियार डाले। आत्मसमर्पण के लिए उन्होंने अपनी कुछ सख्त शर्तें भी रखी थीं।
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जेल के दिन और रिहाई का समय
साल 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने उनके मामले वापस लिए। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने नया जीवन शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने शादी की और समाज सेवा के कामों से जुड़ गईं।
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बीहड़ से देश की संसद तक
संसद में उन्होंने गरीब और शोषित महिलाओं की आवाज उठाई। साल 1999 में वह दोबारा मिर्जापुर से सांसद चुनी गईं। उनका यह सफर दुनिया भर के मीडिया के लिए एक मिसाल बना।
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दुखद अंत और उनकी यादें
मात्र 37 साल की उम्र में फूलन देवी का जीवन समाप्त हो गया। आज भी लोग उन्हें एक विवादित लेकिन साहसी महिला के रूप में याद करते हैं। उनकी जिंदगी पर कई पुस्तकें और फिल्में भी बन चुकी हैं।
Reference:
- BBC News Hindi - Phoolan Devi Life Story
- Encyclopedia Britannica - Phoolan Devi
- India Today Archives - Bandit Queen History
10 अगस्त की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 10 अगस्त (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1999: चेचेन्या के इस्लामिक विद्रोहियों ने दागिस्तान को स्वतंत्र राज्य घोषित किया।
- 2000: सिरीमावो भंडारनायके के इस्तीफे के बाद आर. विक्रमानयके श्रीलंका के नए प्रधानमंत्री नियुक्त हुए और जिनेवा में आत्मनिर्णय के अधिकार पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ।
- 2001: रूस ने अमेरिकी प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) प्रणाली को सशर्त समर्थन देने की घोषणा की।
- 2004: संयुक्त राष्ट्र और सूडान सरकार के बीच दारफुर संकट के समाधान के लिए कार्ययोजना पर हस्ताक्षर हुए।
- 2006: श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों पर सैन्य कार्रवाई के दौरान 50 नागरिकों की जान चली गई।
- 2008: अमरनाथ जमीन विवाद सुलझाने के लिए उच्च न्यायालय के 2005 के आदेश पर सहमति बनी और चेन्नई की लैब में एंटी-एड्स वैक्सीन का सफल परीक्षण हुआ।
- 1860: विष्णुनारायण भातखंडे — हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान विद्वान और संगीतकार।
- 1894: वी. वी. गिरि — भारत के चौथे राष्ट्रपति और प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी।
- 1916: प्रेम अदीब — भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध क्लासिक अभिनेता।
- 1963: फूलन देवी — बीहड़ की बागी से संसद तक पहुँचने वाली राजनेता।
- 1975: हेमन्त सोरेन — झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख राजनीतिज्ञ और राजनेता।
- 1986: सौरव घोषाल — भारत के शीर्ष और अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्क्वाश खिलाड़ी।
- 1977: श्यामलाल गुप्त 'पार्षद' — प्रसिद्ध झण्डा गीत 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' के रचयिता।
- 1980: सरस्वती देवी — भारतीय सिनेमा की पहली महिला संगीतकार।
- 1986: अरुण कुमार श्रीधर वैद्य — भारतीय सेना के 13वें थल सेनाध्यक्ष।
- 1995: हरिशंकर परसाई — हिंदी साहित्य के महान व्यंग्यकार और प्रसिद्ध लेखक।
- 1999: आचार्य बलदेव उपाध्याय — पद्म भूषण से सम्मानित प्रसिद्ध भारतीय संस्कृत विद्वान।
- 2018: अनंत बजाज — बजाज इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के पूर्व निदेशक और उद्योगपति।
- 2021: बालाजी तांबे — भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य और आध्यात्मिक गुरु।
31 जुलाई का इतिहास: आज ही के दिन से हुई थी मोबाइल संचार क्रांति की शुरुआत
साल 1905 में आज ही के दिन कोलकाता से शुरू हुआ था स्वदेशी आंदोलन का इतिहास
27 जुलाई का इतिहास: कैसे मिला टाइटैनिक का मलबा, जानें समुद्र की गहराई का सच
28 जुलाई का इतिहास: कौन थे विलियम हर्शेल, जिन्होंने फिंगरप्रिंट को बनाया पहचान का जरिया
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