Sundar Pichai Biography: मिडिल क्लास फैमिली से गूगल के सीईओ बनने का सफर
Kaushiki | Jul 12, 2026, 08:00 IST
Sundar Pichai Biography
गूगल और अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई की सफलता की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। चेन्नई के एक साधारण परिवार से निकलकर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी के शीर्ष पद तक पहुंचने का उनका यह सफर कड़ी मेहनत, सादगी और प्रतिभा की अनूठी मिसाल है।
Sundar Pichai Biography: क्या आप जानते हैं कि दुनिया का सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन कौन चलाता है? आज हम बात कर रहे हैं सुंदर पिचाई की। उनका पूरा नाम सुंदरराजन पिचाई है। वह भारतीय मूल के एक मशहूर अमेरिकी नागरिक हैं। आज वह गूगल और उसकी पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के सीईओ हैं।
सुंदर पिचाई का जीवन हर उस युवा के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। उनका जन्म 12 जून 1972 को मदुरै, तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां एक स्टेनोग्राफर थीं। उनका बचपन चेन्नई के एक बहुत ही साधारण से घर में बीता था।
![b28b2b57-490]()
सुंदर पिचाई का शुरुआती जीवन बहुत ही सीधा और सादगी से भरा हुआ था। उनके परिवार के पास रहने के लिए केवल दो कमरों का एक मकान था। बचपन में उनके पास न तो कोई कार थी और न ही टीवी था। वह और उनका भाई घर के लिविंग रूम में फर्श पर सोते थे। लेकिन सुंदर पिचाई का दिमाग बचपन से ही बहुत तेज चलता था।
उन्हें नंबरों को याद रखने की एक अद्भुत कला गॉड-गिफ्ट के रूप में मिली थी। उनके घर में जब पहला रोटरी टेलीफोन आया तो वह कमाल कर गए। वह उस पर डायल किए गए सभी फोन नंबर आसानी से याद कर लेते थे।
![Meet the new Google CEO, Sundar Pichai]()
सुंदर पिचाई ने अपनी स्कूली शिक्षा चेन्नई के जवाहर विद्यालय स्कूल से पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने भारत के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी खड़गपुर में दाखिला लिया।
वहां उन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों में भी वह हमेशा अपनी क्लास में टॉप करते थे। उनकी प्रतिभा को देखकर उनके प्रोफेसर्स भी हमेशा हैरान रह जाते थे।
आईआईटी खड़गपुर में ही उनकी मुलाकात अंजलि से हुई थी। अंजलि ही आगे चलकर सुंदर पिचाई की जीवनसंगिनी और सबसे बड़ी ताकत बनीं। आईआईटी से पास होने के बाद उनके सामने आगे की पढ़ाई का रास्ता खुला।
![Sundar Pichai gives a sneak peek into Instagram vs Reality, pictures go viral- The Etimes Photogallery Page 7]()
आईआईटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से स्कॉलरशिप मिली। लेकिन उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी।
अमेरिका जाने के हवाई टिकट का खर्च उठाना भी उनके परिवार के लिए बहुत मुश्किल था। उनके पिता ने अपनी तीन साल की पूरी सैलरी देकर टिकट खरीदा था।
सुंदर पिचाई ने अमेरिका जाकर मैटेरियल साइंसेज में एमएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई तरह के छोटे-मोटे पार्ट-टाइम काम भी किए थे।
![Sundar Pichai Padma Bhushan:जानिए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की संघर्ष से सफलता तक की कहानी, नवाजा गया पद्मभूषण पुरस्कार से - Happy Republic Day 2022 Sundar Pichai Awarded Padma ...]()
साल 2004 सुंदर पिचाई के जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसी साल 1 अप्रैल को उन्होंने सर्च इंजन कंपनी गूगल में कदम रखा था। शुरुआत में उन्हें गूगल के सर्च बार को बेहतर बनाने का काम मिला था। उस समय वह कंपनी में एक प्रोडक्ट मैनेजर के तौर पर आए थे।
उन्होंने गूगल टूलबार पर बहुत ही बेहतरीन तरीके से काम किया था। उनके काम को देखकर कंपनी के बड़े अधिकारी बहुत प्रभावित हुए थे। सुंदर पिचाई हमेशा बहुत शांत रहकर अपना काम बहुत ही परफेक्ट तरीके से करते थे।
![सुंदर पिचाई के शीर्ष नेतृत्व सिद्धांत सामने आए | योरस्टोरी]()
सुंदर पिचाई ने ही गूगल के मालिकों को अपना खुद का इंटरनेट ब्राउज़र बनाने की सलाह दी थी। उस समय गूगल के तत्कालीन सीईओ को यह आइडिया बहुत खर्चीला लगा था। लेकिन सुंदर पिचाई अपनी सोच पर पूरी तरह से अडिग रहे। उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर दिन-रात मेहनत की।
इसके बाद साल 2008 में गूगल क्रोम ब्राउज़र को लॉन्च किया गया था। आज गूगल क्रोम दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वेब ब्राउजर है। इस बड़ी सफलता ने सुंदर पिचाई को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दिलाई थी।
![सुंदर पिचाई का सफलता मंत्र | Femina.in]()
क्रोम की शानदार सफलता के बाद सुंदर पिचाई का कंपनी में कद बहुत बढ़ गया था। उन्हें साल 2012 में गूगल के एंड्रॉइड डिवीजन का हेड बना दिया गया था। उन्होंने एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम को बहुत ही आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया।
इसके बाद गूगल मैप्स और जीमेल जैसे बड़े प्रोडक्ट्स भी उनके अंडर आ गए। वह धीरे-धीरे कंपनी के सबसे भरोसेमंद और जरूरी लीडर बनते चले गए।
माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियों ने भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन गूगल ने अपनी इस अनमोल रत्न जैसी प्रतिभा को कभी अपने से दूर नहीं होने दिया।
![चेन्नई से कैलिफोर्निया तक: गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की सफलता के लिए अथक प्रयास - इंडिया टुडे]()
साल 2015 में गूगल के इतिहास में एक बहुत बड़ा बदलाव आया। कंपनी ने अपनी एक नई पैरेंट कंपनी बनाई जिसका नाम अल्फाबेट रखा गया।
इसके साथ ही सुंदर पिचाई को गूगल का नया सीईओ घोषित किया गया। यह हर एक भारतीय के लिए बहुत ही गर्व का पल था। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए साल 2019 में उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी मिली।
उन्हें गूगल के साथ-साथ पूरी अल्फाबेट कंपनी का भी सीईओ बना दिया गया। एक साधारण बैकग्राउंड से आने वाले व्यक्ति के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
![सुंदर पिचाई का उत्थान: आईआईटी खड़गपुर में सी ग्रेड से लेकर अल्फाबेट और गूगल के सीईओ तक का सफर]()
सुंदर पिचाई की सफलता का सबसे बड़ा राज उनका बेहद शांत और सुलझा हुआ स्वभाव है। वह हमेशा अपनी टीम के लोगों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि एक अच्छा लीडर वही है जो दूसरों को सफल बनाए।
वह काम के भारी दबाव के बीच भी कभी अपना आपा नहीं खोते हैं। उनकी सादगी और दूसरों की बात सुनने की आदत उन्हें सबसे अलग बनाती है।
वह आज भी भारतीय संस्कृति और अपने पुराने दिनों को कभी नहीं भूलते हैं। वह अक्सर भारत आते हैं और छात्रों से बातचीत करके उन्हें मोटिवेट करते हैं।
गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई का कहना है कि लाइफ में हमेशा अपने सपनों के पीछे भागना चाहिए। असफलता से कभी भी डरना नहीं चाहिए बल्कि उससे हमेशा कुछ नया सीखना चाहिए।
वह कहते हैं कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करके हम दुनिया को बदल सकते हैं। आपको हमेशा अपनी सोच को बड़ा रखना चाहिए और लगातार मेहनत करनी चाहिए।
अगर आप में कुछ नया सीखने की चाह है तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती। सुंदर पिचाई की कहानी हमें सिखाती है कि साधन कम होने पर भी सफलता पाई जा सकती है।
आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 12 जुलाई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।
आइए जानते हैं 12 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
सुंदर पिचाई का जीवन हर उस युवा के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो बड़े सपने देखता है। उनका जन्म 12 जून 1972 को मदुरै, तमिलनाडु में हुआ था। उनके पिता एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर थे और मां एक स्टेनोग्राफर थीं। उनका बचपन चेन्नई के एक बहुत ही साधारण से घर में बीता था।
b28b2b57-490
बचपन का संघर्ष और सादगी भरा जीवन
उन्हें नंबरों को याद रखने की एक अद्भुत कला गॉड-गिफ्ट के रूप में मिली थी। उनके घर में जब पहला रोटरी टेलीफोन आया तो वह कमाल कर गए। वह उस पर डायल किए गए सभी फोन नंबर आसानी से याद कर लेते थे।
Meet the new Google CEO, Sundar Pichai
आईआईटी खड़गपुर से शुरू हुआ बड़ा सफर
वहां उन्होंने मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों में भी वह हमेशा अपनी क्लास में टॉप करते थे। उनकी प्रतिभा को देखकर उनके प्रोफेसर्स भी हमेशा हैरान रह जाते थे।
आईआईटी खड़गपुर में ही उनकी मुलाकात अंजलि से हुई थी। अंजलि ही आगे चलकर सुंदर पिचाई की जीवनसंगिनी और सबसे बड़ी ताकत बनीं। आईआईटी से पास होने के बाद उनके सामने आगे की पढ़ाई का रास्ता खुला।
Sundar Pichai gives a sneak peek into Instagram vs Reality, pictures go viral- The Etimes Photogallery Page 7
अमेरिका का सफर और पैसों की भारी तंगी
अमेरिका जाने के हवाई टिकट का खर्च उठाना भी उनके परिवार के लिए बहुत मुश्किल था। उनके पिता ने अपनी तीन साल की पूरी सैलरी देकर टिकट खरीदा था।
सुंदर पिचाई ने अमेरिका जाकर मैटेरियल साइंसेज में एमएस की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने पेन्सिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के व्हार्टन स्कूल से एमबीए की डिग्री ली। पढ़ाई के दौरान उन्होंने कई तरह के छोटे-मोटे पार्ट-टाइम काम भी किए थे।
Sundar Pichai Padma Bhushan:जानिए गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की संघर्ष से सफलता तक की कहानी, नवाजा गया पद्मभूषण पुरस्कार से - Happy Republic Day 2022 Sundar Pichai Awarded Padma ...
गूगल में सुंदर पिचाई की एंट्री
उन्होंने गूगल टूलबार पर बहुत ही बेहतरीन तरीके से काम किया था। उनके काम को देखकर कंपनी के बड़े अधिकारी बहुत प्रभावित हुए थे। सुंदर पिचाई हमेशा बहुत शांत रहकर अपना काम बहुत ही परफेक्ट तरीके से करते थे।
सुंदर पिचाई के शीर्ष नेतृत्व सिद्धांत सामने आए | योरस्टोरी
गूगल क्रोम का आइडिया
इसके बाद साल 2008 में गूगल क्रोम ब्राउज़र को लॉन्च किया गया था। आज गूगल क्रोम दुनिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला वेब ब्राउजर है। इस बड़ी सफलता ने सुंदर पिचाई को पूरी दुनिया में एक नई पहचान दिलाई थी।
सुंदर पिचाई का सफलता मंत्र | Femina.in
गूगल के सबसे भरोसेमंद लीडर का सफर
इसके बाद गूगल मैप्स और जीमेल जैसे बड़े प्रोडक्ट्स भी उनके अंडर आ गए। वह धीरे-धीरे कंपनी के सबसे भरोसेमंद और जरूरी लीडर बनते चले गए।
माइक्रोसॉफ्ट और ट्विटर जैसी बड़ी कंपनियों ने भी उन्हें अपने साथ जोड़ने की कोशिश की थी। लेकिन गूगल ने अपनी इस अनमोल रत्न जैसी प्रतिभा को कभी अपने से दूर नहीं होने दिया।
चेन्नई से कैलिफोर्निया तक: गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई की सफलता के लिए अथक प्रयास - इंडिया टुडे
गूगल और अल्फाबेट के पद पर ताजपोशी
इसके साथ ही सुंदर पिचाई को गूगल का नया सीईओ घोषित किया गया। यह हर एक भारतीय के लिए बहुत ही गर्व का पल था। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए साल 2019 में उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी मिली।
उन्हें गूगल के साथ-साथ पूरी अल्फाबेट कंपनी का भी सीईओ बना दिया गया। एक साधारण बैकग्राउंड से आने वाले व्यक्ति के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी।
सुंदर पिचाई का उत्थान: आईआईटी खड़गपुर में सी ग्रेड से लेकर अल्फाबेट और गूगल के सीईओ तक का सफर
सफलता के पीछे की खास वजह
वह काम के भारी दबाव के बीच भी कभी अपना आपा नहीं खोते हैं। उनकी सादगी और दूसरों की बात सुनने की आदत उन्हें सबसे अलग बनाती है।
वह आज भी भारतीय संस्कृति और अपने पुराने दिनों को कभी नहीं भूलते हैं। वह अक्सर भारत आते हैं और छात्रों से बातचीत करके उन्हें मोटिवेट करते हैं।
युवाओं के लिए सुंदर पिचाई के खास टिप्स
वह कहते हैं कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करके हम दुनिया को बदल सकते हैं। आपको हमेशा अपनी सोच को बड़ा रखना चाहिए और लगातार मेहनत करनी चाहिए।
अगर आप में कुछ नया सीखने की चाह है तो कोई भी रुकावट आपको रोक नहीं सकती। सुंदर पिचाई की कहानी हमें सिखाती है कि साधन कम होने पर भी सफलता पाई जा सकती है।
12 जुलाई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं
आइए जानते हैं 12 जुलाई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-
विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...
- 1994: फ़िलिस्तीनी संगठन के अध्यक्ष यासर अराफात 27 साल के निर्वासन के बाद गाजा पट्टी लौटे।
- 1998: फुटबॉल विश्वकप के फाइनल में फ्रांस ने ब्राजील को 3-0 से हराकर खिताब जीता।
- 2001: भारत और बांग्लादेश के बीच अगरतल्ला से ढाका 'मैत्री' बस सेवा की शुरुआत हुई।
- 2003: उत्तर और दक्षिण कोरिया परमाणु हथियार मुद्दे पर आपस में बातचीत के लिए राजी हुए।
- 2005: क्रिकेट दुनिया के मशहूर अंपायर डेविड शेफर्ड ने अंपायरिंग से अपना संन्यास लिया।
- 2006: इजरायल के दो सैनिकों के बंधक बनने के बाद उसने लेबनान पर हमला कर दिया।
- 1982: भारतीय टेबल टेनिस इतिहास के दिग्गज और मशहूर खिलाड़ी अचंत शरत कमल का जन्म हुआ।
- 1972: गूगल खोज अनुभाग के भारतीय मूल के प्रसिद्ध अमेरिकी Google CEO Sundar Pichai का जन्म हुआ।
- 1954: हिंदी सिनेमा की बेहद खूबसूरत और मशहूर अभिनेत्रियों में से एक सुलक्षणा पंडित का जन्म हुआ।
- 1920: भारत के पूर्व और देश के 16वें मुख्य न्यायाधीश वाई. वी. चंद्रचूड़ का जन्म हुआ।
- 1916: दूसरे विश्वयुद्ध की सबसे जांबाज वीरांगना महिलाओं में से एक लुडमिला पावलीचेंको का जन्म हुआ।
- 1909: हिंदी सिनेमा जगत के एक बेहद महान और शानदार फिल्म निर्देशक बिमल राय का जन्म हुआ।
- 1895: हिंदी भाषा के बहुत ही लोकप्रिय और प्रसिद्ध उपन्यास लेखकों में से एक दुर्गा प्रसाद खत्री का जन्म हुआ।
- 2014: भारत देश के बेहद लोकप्रिय और प्रसिद्ध व्यंग्य कवि हुल्लड़ मुरादाबादी का निधन हुआ।
- 2013: हिंदी फिल्मों के सबसे लोकप्रिय नायक, खलनायक और चरित्र अभिनेता प्राण का निधन हुआ।
- 2012: विश्व प्रसिद्ध पहलवान और हिंदी फिल्मों के दिग्गज अभिनेता दारा सिंह का निधन हुआ।
- 2005: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े देश के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ पी. के. वासुदेवन नायर का निधन हुआ।
- 2002: कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री घनश्यामभाई ओझा का निधन हुआ।
- 1999: हिंदी सिनेमा के सबसे प्रसिद्ध और सदाबहार अभिनेताओं में शामिल राजेंद्र कुमार का निधन हुआ।
- 1982: प्रख्यात साहित्यिक संस्था 'प्रसाद परिषद' के पूर्व सभापति विश्वनाथ प्रसाद मिश्र का निधन हुआ।
2 जुलाई का इतिहास: जब मोहम्मद जियाउद्दीन बनकर अंग्रेजों की कैद से भागे थे नेताजी
3 जुलाई का इतिहास: कब और किसने की International Plastic Bag Free Day की शुरुआत?
01 जुलाई का इतिहास: क्यों मनाया जाता है National Doctors Day
24 मई का इतिहास: आज ही के दिन हुआ था इतिहास की सबसे ताकतवर महारानी विक्टोरिया का जन्म
नवरात्रि के पहले इंदौर में 92 लाख रुपए की गर्भपात किट मिलने से भड़के हिंदूवादी नेता
By Sanjay Gupta, Sandeep Kumar
20 हजार करोड़ रुपए के बकाया चालान: सुप्रीम कोर्ट ने दिए अनोखे सुझाव: बिजली बिल में जुड़ सकती है चालान की राशि
By Neel Tiwari
छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कलेक्ट्रेट घेराव, पुलिस से झूमाझटकी, भूपेश बघेल बोले ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें
By Arun Tiwari
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari