23 मई का इतिहास: एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल की इंस्पायरिंग स्टोरी

Kaushiki | May 23, 2026, 08:00 IST
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Bachendri Pal
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साल 1984 में बछेंद्री पाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह किया था। वह ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला बनीं। बेहद कठिन हालातों और बर्फीले तूफान का सामना करके उन्होंने यह ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम किया था।

आज के दिन की कहानी: कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की जहां चारों तरफ सिर्फ सफेद बर्फ का समंदर हो। वहां पल-पल में मौसम बदलता है और हड्डियों को जमा देने वाली हवाएं चलती हैं।

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर कदम रखने का सपना हर किसी का होता है। लेकिन इन खतरनाक और बर्फीले रास्तों पर जाना साक्षात मौत को दावत देने जैसा है।

इसी मुश्किल रास्ते पर जब बड़े-बड़ों ने घुटने टेक दिए, तब भारत की एक जांबाज बेटी ने नया इतिहास रच दिया। हम बात कर रहे हैं देश का नाम रोशन करने वाली बछेंद्री पाल की।

उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में जन्मी बछेंद्री का परिवार बहुत साधारण था। इसके बावजूद उनके हौसले हमेशा आसमान से भी ऊंचे रहे। बचपन से ही उन्हें पहाड़ों पर चढ़ने का एक अनोखा शौक था। आइए जानते हैं उनकी इस रोमांचक यात्रा की पूरी कहानी।

बछेंद्री पाल - विकिपीडिया
बछेंद्री पाल - विकिपीडिया


कौन हैं बछेंद्री पाल

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन भारत की एक जांबाज बेटी ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया। उनका नाम बछेंद्री पाल है।

बछेंद्री पाल का जन्म 24 मई 1954 को उत्तराखंड के एक छोटे से गांव में हुआ था। उनके गांव का नाम नाकुरी है जो उत्तरकाशी जिले में पड़ता है। उनका परिवार बहुत ही साधारण था।

बचपन से ही बछेंद्री पाल को पहाड़ों पर चढ़ने का बहुत शौक था। वे बहुत निडर और साहसी लड़की थीं। स्कूल के दिनों में भी वे पिकनिक के दौरान पहाड़ों पर चढ़ जाती थीं।

उन्होंने 23 मई 1984 को दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की थी। ऐसा करने वाली वह भारत की पहली और दुनिया की पांचवीं महिला पर्वतारोही बनीं।

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बछेंद्री ने एवरेस्ट मिशन की शुरुआत कैसे की थी

बछेंद्री पाल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद पर्वतारोहण को अपना करियर चुना। उन्होंने नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग में एडमिशन लिया। वहां उन्होंने पहाड़ों पर चढ़ने की कड़ी ट्रेनिंग ली। साल 1984 में भारत ने एक बड़ा एवरेस्ट मिशन प्लान किया।

इस मिशन का नाम 'एवरेस्ट-84' रखा गया था। इस खास टीम में बछेंद्री पाल को भी चुना गया। यह उनके जीवन का सबसे बड़ा और सबसे चुनौतीपूर्ण मौका था। टीम में शामिल सभी लोग बहुत उत्साहित थे। सबने दिल्ली से अपनी इस ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत की थी।

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एवरेस्ट चढ़ाई में किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा

माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना मौत को दावत देने जैसा होता है। वहां का मौसम पल-पल में बदलता रहता है। बछेंद्री पाल की टीम जैसे-जैसे ऊपर बढ़ रही थी, मुश्किलें बढ़ती गईं। रास्ते में भारी बर्फबारी और बर्फीली हवाएं चल रही थीं।

ऑक्सीजन का लेवल भी लगातार कम हो रहा था। हर कदम पर जान जाने का खतरा बना हुआ था। लेकिन बछेंद्री पाल का हौसला बहुत मजबूत था। वे बिना डरे लगातार आगे बढ़ती रहीं। उनके मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था, वह था एवरेस्ट फतह करना।

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जब कैंप पर गिरा बर्फ का पहाड़

इस सफर के दौरान एक बहुत ही भयानक हादसा हुआ था। उस 15-16 मई की रात को सभी लोग अपने टेंट में सो रहे थे। अचानक एक बहुत बड़ा ग्लेशियर कैंप पर आ गिरा। इस हादसे में बछेंद्री पाल बर्फ के नीचे पूरी तरह दब गई थीं।

बछेंद्री पाल को सांस लेने में बहुत दिक्कत हो रही थी। ऐसा लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया। लेकिन उनकी टीम के साथियों ने हिम्मत दिखाई। उन्होंने बर्फ को खोदकर बछेंद्री पाल को सुरक्षित बाहर निकाला। इस हादसे में कई लोग घायल हो गए और वापस लौट गए।

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जब एवरेस्ट पर बछेंद्री ने फहराया तिरंगा

इस भयानक हादसे के बाद भी बछेंद्री पाल ने वापस लौटने से मना कर दिया। उन्होंने अपने घायल साथियों को विदा किया और आगे बढ़ने का फैसला लिया। उनके इस फैसले ने सबको चौंका दिया।

आखिरकार वो ऐतिहासिक दिन आ ही गया। 23 मई 1984 को दोपहर के 1 बजकर 7 मिनट हो रहे थे। बछेंद्री पाल ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर कदम रखा।

वहां पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले घुटने टेककर बर्फ को चूमा। इसके बाद उन्होंने वहां भारत का तिरंगा झंडा गर्व से फहराया। वे ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।

Bachendri Pal: एवरेस्‍ट से भी ऊंची थी जिद्द, आधी टीम के हार मानने के बाद भी बछेंद्री  पाल ने हासिल की फतेह - when Bachendri Pal made history by becoming the first
Bachendri Pal: एवरेस्‍ट से भी ऊंची थी जिद्द, आधी टीम के हार मानने के बाद भी बछेंद्री पाल ने हासिल की फतेह - when Bachendri Pal made history by becoming the first


किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया

माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराकर देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने के लिए बछेंद्री पाल को भारत सरकार और विभिन्न संस्थाओं द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

उन्हें साल 1984 में पद्म श्री से नवाजा गया, जो भारत का चौथा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान है। इसके बाद खेल के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 1986 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार भी दिया गया।

साल 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया। इनके अलावा, उन्हें विभिन्न राज्य सरकारों और संस्थाओं द्वारा कई अन्य प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है।

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बछेंद्री पाल से हमें क्या सीख मिलती है

बछेंद्री पाल की ये सफलता सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है। ये भारत की हर महिला की जीत की कहानी है। उन्होंने साबित किया कि महिलाएं कुछ भी कर सकती हैं। इस कामयाबी के बाद उन्हें सरकार की तरफ से कई बड़े अवॉर्ड्स मिले।

उन्हें पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे बड़े सम्मानों से नवाजा गया। आज भी बछेंद्री पाल युवाओं को पर्वतारोहण की ट्रेनिंग देती हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलें चाहे कितनी भी बड़ी हों, कभी हार नहीं माननी चाहिए।

Reference Links:

  • नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग (NIM) आधिकारिक वेबसाइट: Success Story nimindia.net
  • भारतीय पर्वतारोहण संघ (IMF) आधिकारिक पोर्टल: indamount.org
  • भारत सरकार का पद्म पुरस्कार पोर्टल: padmaawards.gov.inbiography
  • युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (भारत सरकार): youthaffairs.gov.in

23 मई की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं

आज का इतिहास मेंहर दिन का अपना एक अलग महत्व होता है। 23 मई का दिन भी इतिहास (आज की यादगार घटनाएं) में कई महत्वपूर्ण घटनाओं के लिए दर्ज है। इस दिन दुनिया में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने इतिहास की दिशा बदल दी।

आइए जानते हैं 23 मई (आज की तारीख का इतिहास) को भारत और विश्व में घटी कुछ प्रमुख घटनाओं के बारे में, जो आपके सामान्य ज्ञान को बढ़ा सकती हैं-

विश्व और भारत इतिहास की प्रमुख घटनाएं...

  • 1420: ऑस्ट्रिया और सीरिया देशों से सभी यहूदियों को बाहर निकाल दिया गया था।
  • 1805: गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेजली ने दिल्ली के मुगल बादशाह के लिए एक स्थायी वित्तीय प्रावधान की व्यवस्था की थी।
  • 1915: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इटली ने ऑस्ट्रिया, हंगरी और जर्मनी के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया था।
  • 1949: नया संविधान अपनाने के बाद पश्चिम जर्मनी औपचारिक रूप से एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया।
  • 1977: अफ्रीकी देश बेनिन ने अपने देश के नए संविधान को पूरी तरह अंगीकार किया था।
  • 1984: पर्वतारोही बछेंद्री पाल दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
  • 1999: राजनेता योहानिस रौ को संघीय जर्मनी का नया राष्ट्रपति नियुक्त किया गया था।
  • 2001: पाकिस्तान ने भारत को मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का व्यापारिक दर्जा देने से एक बार फिर साफ मना किया।
  • 2004: बांग्लादेश की मेघना नदी में भीषण तूफान से नाव डूबने के कारण करीब 250 लोग डूब गए थे।
  • 2004: सिंगापुर के पास एक जहाज के टैंकर से टकराने के कारण उस पर लदी 4000 कारें समुद्र में डूब गईं।
  • 2008: भारत ने स्वदेशी तकनीक से बनी सतह से सतह पर मार करने वाली पृथ्वी-2 मिसाइल का सफल टेस्ट किया।
  • 2008: अंतरराष्ट्रीय संस्था ISO द्वारा एक भारतीय डिस्टिलरी को गुणवत्ता के लिए 'आईएसओ 9001' सर्टिफिकेट दिया गया।
  • 2008: नेपाल के राजा ज्ञानेंद्र ने राजशाही खत्म होने के बाद अपना आधिकारिक नारायणहिती राजमहल खाली कर दिया था।
  • 2008: सोमालिया के खतरनाक समुद्री डाकुओं ने भारतीय क्रू मेंबर्स वाले एक अपहृत जहाज को सुरक्षित छोड़ दिया था।
  • 2008: पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ ने तत्कालीन सत्तारूढ़ पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) से अपना नाता तोड़ लिया था।
  • 2009: भ्रष्टाचार के आरोपों से परेशान दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति रोह मू ह्यून ने पहाड़ी से कूदकर आत्महत्या कर ली।
  • 2010: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के.जी. बालाकृष्णन की बेंच ने बिना शादी के महिला-पुरुष के साथ रहने (लिव-इन) को कानूनी माना।
  • 2016: इसरो (ISRO) ने श्रीहरिकोटा से भारत के पहले स्वदेशी स्पेस शटल 'आरएलवी-टीडी' (RLV-TD) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था।
  • विश्व कछुआ दिवस (World Turtle Day): कछुओं के संरक्षण और उनकी प्रजातियों को बचाने के लिए दुनिया भर में मनाया जाता है।

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