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इंडिया गठबंधन: हारे हुए नेता, बिखरा गठबंधन- विपक्ष की दर्दनाक कहानी
Sameer Chougaonkar | Jun 08, 2026, 13:46 IST
समीर चौगांवकर का आर्टिकल
इंडिया गठबंधन की आज यानी, 08 जून को दिल्ली में बैठक हो रही है। वहीं, ढाई साल से एक भी बैठक न हुई, न नेता चुना गया और न रणनीति बनी। हारे हुए दलों का यह मिलन मोदी को कोई असली चुनौती दे पाएगा? बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर…
भारतीय राजनीति में संख्या ही विचारधारा है
27 सहमना पार्टियों का दमदार गठबंधन बना लिया था और नाम रखा था इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस या भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठजोड़, जिसे उसके संक्षिप्त नाम इंडिया से जाना गया।
नीतीश की विदाई ने डाली पहली दरार
उसके बाद हिचकोले खा रहा इंडिया गठबंधन तमाम कोशिशों के बाद भी मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से नहीं रोक सका।
लोकसभा के बाद विधानसभाओं में टूटा मनोबल
लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी की एक के बाद एक विधानसभा चुनाव में जीत ने विपक्षी गठबंधन का मनोबल तोड़ दिया। कांग्रेस और उसके सहयोगी क्षेत्रीय दलों के लस्त-पस्त रिश्ते ही इंडिया की बुलंद शुरुआत और अब उस ढलान की दास्तान रहे हैं।
भाजपा की एक के बाद एक जीत
- महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाई।
- हरियाणा में कांग्रेस की सरकार की भविष्यवाणी के बीच बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की।
- दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को सत्ता से बाहर किया।
- बिहार में नीतीश और बीजेपी की प्रचंड जीत हुई।
- पिछले महीने ही बंगाल में ममता की बुरी हार ने इंडिया गठबंधन की कमर तोड़ दी।
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इंडिया गठबंधन की बैठकों का सच
पांच बैठकें, ढाई साल की खामोशी
- पहली बैठक: 23 जून 2023 - पटना (नीतीश के नेतृत्व में)
- दूसरी बैठक: 17 जुलाई 2023 - बेंगुलुरु
- तीसरी बैठक: 1 अगस्त 2023 - मुंबई
- चौथी बैठक: 19 दिसंबर 2023 - दिल्ली, अशोका होटल
- पांचवीं बैठक: 13 जनवरी 2024
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न संयोजक, न कार्यालय और न ही रणनीति
मोदी को घेरने की कोई साझा रणनीति नहीं बना सका। लोकसभा और राज्यसभा में मिलकर एक साथ सरकार को नहीं घेर सका। एक साथ मिलकर न लोकसभा चुनाव और न ही विधानसभा चुनाव लड़ सके।
ऐसे में इनका फिर से बैठकर मोदी को चुनौती देने की कोशिश करना किसी मजाक से कम नहीं लगता।
हारे हुए नेता, खोखला एकजुटता का दावा
ममता और तेजस्वी हारने के बाद इंडिया गठबंधन का सहारा चाहते हैं। अखिलेश यादव यूपी चुनाव में इंडिया गठबंधन से मदद चाहते हैं। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में फिर से कांग्रेस के सहारे अपनी सत्ता देखना चाहते हैं।
इसी कारण तमाम टूटे और हारे दल फिर से एक साथ जुड़ना चाहते हैं।
क्या इंडिया गठबंधन मोदी को चुनौती दे पाएगा?
एक नाव में शेर, बकरी और घास
इंडिया गठबंधन ने जब आकार लिया था, उस समय बिहार में नीतीश और तेजस्वी, बंगाल में ममता, तमिलनाडु में डीएमके, दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री थे।
आज जब इंडिया गठबंधन फिर से मोदी के खिलाफ खड़े होने की कोशिश कर रहा है, उस समय न ममता बंगाल में हैं, न केजरीवाल दिल्ली में, न तेजस्वी बिहार में और न ही उद्धव और शरद पवार महाराष्ट्र में सत्ता में हैं।
सिर्फ कांग्रेस ही ऐसा दल है, जिसके चार राज्यों में अपने मुख्यमंत्री हैं और दो राज्यों में - झारखंड में हेमंत सोरेन और तमिलनाडु में टीवीके के साथ - गठबंधन सत्ता में शामिल है।
बड़े दलों की नाराजगी और दूरी
केरल में सीपीआई का हमला, झारखंड में सोरेन का अनिश्चित रुख
कांग्रेस को दीमक की तरह चट करके सियासी जमीन हासिल करने वाले क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अपनी कितनी जमीन साझा करते हैं, यह देखने वाली बात होगी।
मोदी विरोध के अलावा कोई नैरेटिव नहीं
मोदी को चुनौती देने वाले तमाम दावेदार या तो एनडीए का हिस्सा बन गए या चुनावी राजनीति में हारकर सत्ता से बेदखल हो गए हैं। अब राहुल गांधी के अलावा कोई नेता नहीं बचा, जिसे मोदी के सामने प्रोजेक्ट किया जा सके।
मोदी की ताकतवर छवि बनाम विपक्ष की कमजोरी
विपक्ष मोदी से तीन बार मात खा चुका है और मोदी चौथी बार प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं।
आज भी प्रधानमंत्री मोदी की छवि एक निर्णायक नेता और देश को दिशा प्रदान करने वाले की बनी हुई है। वहीं विपक्षी खेमा व्यक्तिगत और संकीर्ण एजेंडे से प्रेरित नेताओं के अस्थिर झुंड की तरह देखा जा रहा है।
इंडिया गठबंधन के पास ऐसे नेता का भारी अभाव है, जो लोगों में आकर्षण पैदा कर सके और मोदी के सामने एक विकल्प के रूप में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा सके।
राहुल को नेता मानें या नहीं - गठबंधन का असली संकट
आगामी विधानसभा चुनाव - असली परीक्षा
क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अखिलेश यादव को पूरा स्पेस देगी या अपना हिस्सा वसूलेगी? पंजाब में केजरीवाल को बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस से दो-दो हाथ करने हैं। गोवा में कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा केजरीवाल से लड़ना है।
ममता, तेजस्वी और अखिलेश की मुश्किलें
अखिलेश यादव के सामने इंडिया गठबंधन (India Alliance) को साधकर कांग्रेस को साथ लेकर यूपी में सत्ता में वापसी की सबसे बड़ी चुनौती है।
निष्कर्ष: बढ़त पर भाजपा, विपक्ष का नेतृत्व संकट
हारे हुए और टूटे हुए दल आज साथ बैठकर टूट चुके इंडिया गठबंधन को कितना जोड़ पाते हैं, यह देखना बाकी है।
नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है। इस लेख में प्रकाशित विचार उनके व्यक्तिगत हैं।
FAQ
- इंडिया गठबंधन कब बना था और इसमें कितने दल हैं?
इंडिया गठबंधन जून 2023 में बना था। इसमें शुरुआत में 27 विपक्षी दल शामिल थे। इसका पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस है। - डिया गठबंधन की अब तक कितनी बैठकें हुई हैं?
इंडिया गठबंधन की अब तक कुल पांच बैठकें हुई हैं - पटना, बेंगलुरू, मुंबई, दिल्ली (दिसंबर 2023) और जनवरी 2024। लोकसभा चुनाव के बाद ढाई साल में एक भी बैठक नहीं हुई। - इंडिया गठबंधन का संयोजक कौन है?
इंडिया गठबंधन अपने साढ़े तीन साल के अस्तित्व में आज तक कोई स्थायी संयोजक या अध्यक्ष नहीं चुन पाया है। यह इसकी सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है। - क्या इंडिया गठबंधन 2027 के चुनावों में एकजुट होकर लड़ेगा?
फिलहाल यह संभावना कम है। केजरीवाल गठबंधन से बाहर हैं, डीएमके ने दूरी बनाई है और कई दल आपस में ही प्रतिस्पर्धा में हैं। राहुल गांधी को सर्वमान्य नेता मानने पर भी सहमति नहीं है। - मोदी को चुनौती देने के लिए विपक्ष के पास क्या विकल्प हैं?
विपक्ष के पास अभी एकमात्र प्रभावी चेहरा राहुल गांधी हैं। लेकिन कोई साझा नैरेटिव, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम या एकजुट चुनावी रणनीति नहीं है। आगामी यूपी चुनाव गठबंधन की असली परीक्षा होगी।
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