इंडिया गठबंधन: हारे हुए नेता, बिखरा गठबंधन- विपक्ष की दर्दनाक कहानी

Sameer Chougaonkar | Jun 08, 2026, 13:46 IST
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समीर चौगांवकर का आर्टिकल
समीर चौगांवकर का आर्टिकल

इंडिया गठबंधन की आज यानी, 08 जून को दिल्ली में बैठक हो रही है। वहीं, ढाई साल से एक भी बैठक न हुई, न नेता चुना गया और न रणनीति बनी। हारे हुए दलों का यह मिलन मोदी को कोई असली चुनौती दे पाएगा? बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर…

भारतीय राजनीति में संख्या ही विचारधारा है

भारत में राजनीति की दशा और दिशा संख्याओं से तय होती है, विचारधारा से नहीं। राजनीति की इसी सच्चाई को स्वीकारते हुए मोदी को लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए 2023 के मध्य में मोदी विरोधी दलों ने मिलकर खासी एकजुटता कायम कर ली थी।

27 सहमना पार्टियों का दमदार गठबंधन बना लिया था और नाम रखा था इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस या भारतीय राष्ट्रीय विकासात्मक समावेशी गठजोड़, जिसे उसके संक्षिप्त नाम इंडिया से जाना गया।

नीतीश की विदाई ने डाली पहली दरार

बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बने विपक्षी गठबंधन में न भरने वाली दरार तभी पड़ गई थी, जब नीतीश कुमार ने ही इंडिया गठबंधन से तौबा कर एनडीए में वापसी कर ली थी।

उसके बाद हिचकोले खा रहा इंडिया गठबंधन तमाम कोशिशों के बाद भी मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने से नहीं रोक सका।

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लोकसभा के बाद विधानसभाओं में टूटा मनोबल

विपक्षी इंडिया गठबंधन इस बात पर इतरा रहा था कि बीजेपी को लोकसभा चुनाव में 240 सीटों पर रोक दिया और कांग्रेस सीटों में भारी उछाल के साथ 99 सीटों पर पहुंच गई।

लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी की एक के बाद एक विधानसभा चुनाव में जीत ने विपक्षी गठबंधन का मनोबल तोड़ दिया। कांग्रेस और उसके सहयोगी क्षेत्रीय दलों के लस्त-पस्त रिश्ते ही इंडिया की बुलंद शुरुआत और अब उस ढलान की दास्तान रहे हैं।

भाजपा की एक के बाद एक जीत

मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद भाजपा ने तमाम राज्यों में एक-एक कर फतह हासिल करनी शुरू कर दी थी।

  • महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाई।
  • हरियाणा में कांग्रेस की सरकार की भविष्यवाणी के बीच बीजेपी ने लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल की।
  • दिल्ली विधानसभा चुनाव में केजरीवाल को सत्ता से बाहर किया।
  • बिहार में नीतीश और बीजेपी की प्रचंड जीत हुई।
  • पिछले महीने ही बंगाल में ममता की बुरी हार ने इंडिया गठबंधन की कमर तोड़ दी।
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इंडिया गठबंधन की बैठकों का सच

पांच बैठकें, ढाई साल की खामोशी

इंडिया गठबंधन के बनने के बाद से इसकी बैठकों का क्रम देखें तो समझा जा सकता है कि इसके कर्ताधर्ता ही इसको लेकर गंभीर नहीं रहे।

  • पहली बैठक: 23 जून 2023 - पटना (नीतीश के नेतृत्व में)
  • दूसरी बैठक: 17 जुलाई 2023 - बेंगुलुरु
  • तीसरी बैठक: 1 अगस्त 2023 - मुंबई
  • चौथी बैठक: 19 दिसंबर 2023 - दिल्ली, अशोका होटल
  • पांचवीं बैठक: 13 जनवरी 2024
इस 23 जून को इंडिया गठबंधन की पहली बैठक को पूरे तीन साल हो जाएंगे। ढाई साल से इंडिया गठबंधन की एक भी बैठक नहीं हुई। यानी लोकसभा चुनाव के बाद एक भी बैठक नहीं हुई।

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न संयोजक, न कार्यालय और न ही रणनीति

अपने अस्तित्व में आने के साढ़े तीन साल बाद भी इंडिया गठबंधन आज तक अपना संयोजक या अध्यक्ष नहीं बना पाया। दिल्ली में कोई कार्यालय नहीं बना सका। कोई कॉमन मिनिमम प्रोग्राम नहीं बना सका।

मोदी को घेरने की कोई साझा रणनीति नहीं बना सका। लोकसभा और राज्यसभा में मिलकर एक साथ सरकार को नहीं घेर सका। एक साथ मिलकर न लोकसभा चुनाव और न ही विधानसभा चुनाव लड़ सके।

ऐसे में इनका फिर से बैठकर मोदी को चुनौती देने की कोशिश करना किसी मजाक से कम नहीं लगता।

हारे हुए नेता, खोखला एकजुटता का दावा

ऐसे में इंडिया गठबंधन के तमाम दिग्गज नेता चुनाव हारने के बाद अब एक-दूसरे में सहारा ढूंढ रहे हैं।

ममता और तेजस्वी हारने के बाद इंडिया गठबंधन का सहारा चाहते हैं। अखिलेश यादव यूपी चुनाव में इंडिया गठबंधन से मदद चाहते हैं। उद्धव ठाकरे महाराष्ट्र में फिर से कांग्रेस के सहारे अपनी सत्ता देखना चाहते हैं।

इसी कारण तमाम टूटे और हारे दल फिर से एक साथ जुड़ना चाहते हैं।

क्या इंडिया गठबंधन मोदी को चुनौती दे पाएगा?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जनता की नजर में उतर चुका इंडिया गठबंधन क्या एक बार फिर एक होकर मोदी के लिए कोई चुनौती पेश कर पाएगा? फिलहाल इसकी संभावना न के बराबर है।

एक नाव में शेर, बकरी और घास

गठबंधन राज्यों में कैसे एक घाट उतरेगा? एक कहावत है - शेर, बकरी और घास एक ही नाव में सवार होकर कैसे सकुशल पार उतर सकते हैं?

इंडिया गठबंधन ने जब आकार लिया था, उस समय बिहार में नीतीश और तेजस्वी, बंगाल में ममता, तमिलनाडु में डीएमके, दिल्ली में केजरीवाल मुख्यमंत्री थे।

आज जब इंडिया गठबंधन फिर से मोदी के खिलाफ खड़े होने की कोशिश कर रहा है, उस समय न ममता बंगाल में हैं, न केजरीवाल दिल्ली में, न तेजस्वी बिहार में और न ही उद्धव और शरद पवार महाराष्ट्र में सत्ता में हैं।

सिर्फ कांग्रेस ही ऐसा दल है, जिसके चार राज्यों में अपने मुख्यमंत्री हैं और दो राज्यों में - झारखंड में हेमंत सोरेन और तमिलनाडु में टीवीके के साथ - गठबंधन सत्ता में शामिल है।

बड़े दलों की नाराजगी और दूरी

तमाम बड़े दल इंडिया गठबंधन से बाहर हैं, या कांग्रेस से नाराज हैं। केजरीवाल इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बना ली है।

केरल में सीपीआई का हमला, झारखंड में सोरेन का अनिश्चित रुख

सीपीआई, केरल में राहुल गांधी के विधानसभा चुनाव के दौरान सीपीआई(एम) पर भ्रष्टाचार के आरोपोंको लेकर राहुल पर हमलावर है। झारखंड में हेमंत सोरेन कब इंडिया गठबंधन से बाहर हो जाएं, कुछ कहा नहीं जा सकता।

कांग्रेस को दीमक की तरह चट करके सियासी जमीन हासिल करने वाले क्षेत्रीय दल कांग्रेस से अपनी कितनी जमीन साझा करते हैं, यह देखने वाली बात होगी।

मोदी विरोध के अलावा कोई नैरेटिव नहीं

इंडिया गठबंधन की बुनियादी समस्या यह है कि उसके पास भाजपा विरोध - खासकर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध के अलावा - मतदाताओं के लिए कोई दिलचस्प नैरेटिव नहीं है।

मोदी को चुनौती देने वाले तमाम दावेदार या तो एनडीए का हिस्सा बन गए या चुनावी राजनीति में हारकर सत्ता से बेदखल हो गए हैं। अब राहुल गांधी के अलावा कोई नेता नहीं बचा, जिसे मोदी के सामने प्रोजेक्ट किया जा सके।

मोदी की ताकतवर छवि बनाम विपक्ष की कमजोरी

विपक्ष के इंडिया गठबंधन के सामने मोदी की लोकप्रियता, उनके कथित कामकाज के रिकॉर्ड, पार्टी के हिंदू राष्ट्रवादी वैचारिक एजेंडे और उसके विकास के मुद्दे के इर्द-गिर्द बुनी हुई भाजपा की ताकतवर चुनावी मशीनरी के खिलाफ विपक्षी खेमे की राजनैतिक प्रासंगिकता की परीक्षा बन गई है।

विपक्ष मोदी से तीन बार मात खा चुका है और मोदी चौथी बार प्रधानमंत्री बनने की दहलीज पर खड़े हैं।

आज भी प्रधानमंत्री मोदी की छवि एक निर्णायक नेता और देश को दिशा प्रदान करने वाले की बनी हुई है। वहीं विपक्षी खेमा व्यक्तिगत और संकीर्ण एजेंडे से प्रेरित नेताओं के अस्थिर झुंड की तरह देखा जा रहा है।

इंडिया गठबंधन के पास ऐसे नेता का भारी अभाव है, जो लोगों में आकर्षण पैदा कर सके और मोदी के सामने एक विकल्प के रूप में अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा सके।

राहुल को नेता मानें या नहीं - गठबंधन का असली संकट

लगातार चुनाव हारने और लस्त-पस्त दिख रहे इंडिया गठबंधन के पास अब राहुल गांधी को नेता स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। लेकिन आज भी केजरीवाल, ममता, तेजस्वी और अखिलेश, राहुल को सर्वमान्य नेता मानने को तैयार नहीं हैं।

आगामी विधानसभा चुनाव - असली परीक्षा

दस माह के भीतर उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं। विपक्षी गठबंधन की सबसे बड़ी परीक्षा उत्तर प्रदेश में होगी।

क्या उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अखिलेश यादव को पूरा स्पेस देगी या अपना हिस्सा वसूलेगी? पंजाब में केजरीवाल को बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस से दो-दो हाथ करने हैं। गोवा में कांग्रेस को बीजेपी से ज्यादा केजरीवाल से लड़ना है।

ममता, तेजस्वी और अखिलेश की मुश्किलें

इंडिया गठबंधन की बैठक से फिलहाल मोदी को कोई चुनौती मिल सके, ऐसा नजर नहीं आता। ममता और तेजस्वी को हार के सदमे से उबरने में अभी लंबा वक्त लगेगा। ममता पार्टी की टूट से गहरे सदमे में हैं।

अखिलेश यादव के सामने इंडिया गठबंधन (India Alliance) को साधकर कांग्रेस को साथ लेकर यूपी में सत्ता में वापसी की सबसे बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष: बढ़त पर भाजपा, विपक्ष का नेतृत्व संकट

भाजपा फिलहाल बढ़त पर है और फिलहाल विपक्षी इंडिया गठबंधन अपनी एकजुटता के लिए नेतृत्व और राजनैतिक समझ की कमी से जूझता दिखाई दे रहा है।

हारे हुए और टूटे हुए दल आज साथ बैठकर टूट चुके इंडिया गठबंधन को कितना जोड़ पाते हैं, यह देखना बाकी है।

नोट- प्रिंट मीडिया में दो दशक से सक्रिय समीर चौगांवकर राजनीतिक पत्रकारिता के एक विश्वसनीय और स्थापित नाम हैं। इंडिया टुडे, दैनिक भास्कर, राजस्थान पत्रिका और एशिया टाइम्स सहित देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर उनके लेख प्रकाशित होते हैं। भाजपा, पीएमओ, संसद और आरएसएस की गहरी कवरेज तथा प्रमुख न्यूज चैनलों पर तथ्यपरक राजनीतिक विश्लेषण उनकी पहचान है। इस लेख में प्रकाशित विचार उनके व्यक्तिगत हैं।

FAQ

  1. इंडिया गठबंधन कब बना था और इसमें कितने दल हैं?
    इंडिया गठबंधन जून 2023 में बना था। इसमें शुरुआत में 27 विपक्षी दल शामिल थे। इसका पूरा नाम इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस है।
  2. डिया गठबंधन की अब तक कितनी बैठकें हुई हैं?
    इंडिया गठबंधन की अब तक कुल पांच बैठकें हुई हैं - पटना, बेंगलुरू, मुंबई, दिल्ली (दिसंबर 2023) और जनवरी 2024। लोकसभा चुनाव के बाद ढाई साल में एक भी बैठक नहीं हुई।
  3. इंडिया गठबंधन का संयोजक कौन है?
    इंडिया गठबंधन अपने साढ़े तीन साल के अस्तित्व में आज तक कोई स्थायी संयोजक या अध्यक्ष नहीं चुन पाया है। यह इसकी सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक है।
  4. क्या इंडिया गठबंधन 2027 के चुनावों में एकजुट होकर लड़ेगा?
    फिलहाल यह संभावना कम है। केजरीवाल गठबंधन से बाहर हैं, डीएमके ने दूरी बनाई है और कई दल आपस में ही प्रतिस्पर्धा में हैं। राहुल गांधी को सर्वमान्य नेता मानने पर भी सहमति नहीं है।
  5. मोदी को चुनौती देने के लिए विपक्ष के पास क्या विकल्प हैं?
    विपक्ष के पास अभी एकमात्र प्रभावी चेहरा राहुल गांधी हैं। लेकिन कोई साझा नैरेटिव, कॉमन मिनिमम प्रोग्राम या एकजुट चुनावी रणनीति नहीं है। आगामी यूपी चुनाव गठबंधन की असली परीक्षा होगी।
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