भारत और इटली: एक सौहार्दपूर्ण मित्रता से रणनीतिक साझेदारी तक का सफर
The Sootr | May 20, 2026, 15:16 IST
लेखक भारत और इटली के प्रधानमंत्री हैं। Photograph: (the sootr)
भारत और इटली के संबंध अब एक ऐतिहासिक मोड़ पर आ गए हैं। दोनों देशों ने साल 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर सुरक्षा पर मिलकर काम करने की बड़ी योजना है।
India Italy Relations: भारत और इटली के बीच संबंध अब एक बेहद महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर आ चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के आपसी संबंधों में अभूतपूर्व गति से विस्तार हुआ है। यह रिश्ता अब केवल एक सामान्य सौहार्दपूर्ण मित्रता तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि इसने एक मजबूत और विशेष रणनीतिक साझेदारी का रूप ले लिया है।
यह पूरी साझेदारी स्वतंत्रता, लोकतंत्र के साझा मूल्यों और भविष्य की एक जैसी सोच पर आधारित है। इंटरनेशनल लेवल पर हो रहे बड़े बदलावों के बीच यह दोस्ती और गहरी हो रही है। उच्च राजनीतिक और संस्थागत स्तरों पर लगातार होने वाले संवाद ने इस रिश्ते को नई दिशा दी है। यह हमारी आर्थिक गतिशीलता और सामाजिक रचनात्मकता को एक साथ जोड़ती है।
यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) दोनों दिशाओं में निवेश बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त करता है। यह हमारे व्यापारिक रिश्तों को नया बूस्ट दे रहा है। दोनों देशों ने मिलकर साल 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो के बड़े लक्ष्य तक पहुंचाने का इरादा जताया है। यह लक्ष्य हमारी मजबूत आर्थिक क्षमता को दर्शाता है।
इस व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई मुख्य क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें डिफेंस, एयरोस्पेस और स्वच्छ प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। इसके अलावा एडवांस मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स में भी बड़े पैमाने पर निवेश और सहयोग को बढ़ाया जा रहा है।
पूरी दुनिया में Made in Italy को हमेशा से बेहतरीन डिजाइन और विनिर्माण उत्कृष्टता का प्रतीक माना जाता रहा है। यह अपनी प्रीमियम क्वालिटी के लिए मशहूर है। आज यही इतालवी उत्कृष्टता भारत सरकार की Make in India पहल के उच्च-गुणवत्ता वाले लक्ष्यों के साथ एक बेहद स्वाभाविक और बेहतरीन तालमेल पा रही है।
इस शानदार तालमेल के कारण भारत में प्रोडक्शन करने के लिए इतालवी व्यवसायों की रुचि बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है। ठीक इसी तरह अब इटली में भी भारतीय उद्योगों की उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। दोनों पक्षों से अब 1,000 से अधिक कंपनियां एक-दूसरे के देश में काम कर रही हैं।
आने वाले दशक पूरी दुनिया में एक बहुत बड़ी और अथाह तकनीकी क्रांति द्वारा आकार लेने वाले हैं। इसमें एडवांस सेक्टर्स का बड़ा रोल होगा। तकनीकी नवाचार हमारी इस पूरी साझेदारी के बिल्कुल केंद्र में स्थित है। इसमें दोनों देश अपनी पूरक शक्तियों को एकजुट कर रहे हैं। इटली जहां अपने विश्वस्तरीय सुपरकंप्यूटरों और उन्नत औद्योगिक क्षमताओं के लिए जाना जाता है।
वहीं भारत के पास अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग प्रतिभा और विशाल पैमाना है। भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बहुत गतिशील है। आज भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 100 से अधिक सफल यूनिकॉर्न्स पूरी मजबूती से काम कर रहे हैं। यह सहयोग केवल दो प्रणालियों का एकीकरण नहीं है, बल्कि मूल्य का सह-सृजन है। इसमें दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र भी मिलकर बड़ी रिसर्च कर रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें पहले से ही हमारे समाजों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को बहुत बड़े पैमाने पर प्रभावित कर रही हैं। भारत और इटली लंबे समय से यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं कि AI का विकास हमेशा जिम्मेदार और मानव-केंद्रित होना चाहिए।
इस दृष्टिकोण से दोनों देश एआई को समावेशी विकास के एक शक्तिशाली साधन के रूप में देखते हैं। विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के देशों के लिए यह बहुत उपयोगी है। भारत का डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा और सुलभ तकनीकें विभाजनों को गहरा करने के बजाय समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच की दूरियों को पाट सकती हैं।
प्रौद्योगिकी के केंद्र में मानव को रखने की भारत की दृष्टि "MANAV" और इटली की मानवतावादी परंपरा में निहित मानव-केंद्रित 'एल्गोर-एथिक्स' इसके मुख्य आधार स्तंभ हैं। हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का उत्प्रेरक बने। यह दृष्टिकोण इटली की G7 अध्यक्षता और नई दिल्ली के AI इम्पैक्ट समिट 2026 का मूल हिस्सा है।
एआई (इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी) को मनुष्यों द्वारा मनुष्यों के लिए बनाया गया उपकरण मानने का अर्थ है कि यह तकनीक व्यक्तियों की जगह नहीं ले सकती। न ही यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है।
हमारा यह द्विपक्षीय सहयोग केवल धरती तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरिक्ष क्षेत्र को भी पूरी तरह अपने दायरे में समाहित करता है। अंतरिक्ष अन्वेषण और अत्याधुनिक उपग्रह प्रौद्योगिकी में भारत ने हाल के वर्षों में दुनिया के सामने बेहद प्रभावशाली उपलब्धियां हासिल की हैं।
जब भारत की ये बेहतरीन स्पेस अचीवमेंट्स इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के साथ मिलती हैं, तो संयुक्त पहलों के लिए नए रास्ते खुलते हैं। दोनों देशों की स्पेस एजेंसियां अब अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसरों पर काम कर रही हैं जो भविष्य के मिशनों के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
किसी भी राष्ट्र की निरंतर प्रगति और समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और स्थिरता सबसे पहली और अनिवार्य शर्त बनी हुई है। इसके बिना विकास संभव नहीं है। यही कारण है कि भारत और इटली रक्षा, सुरक्षा और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों जैसे अत्यंत संवेदनशील क्षेत्रों में अपने सहयोग को और अधिक मजबूत करने का इरादा रखते हैं।
हमारा यह मजबूत रक्षा सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर (पीएम मोदी का इटली दौरा)पर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा को पूरी तरह सुनिश्चित करने में एक बड़ी और बेहद प्रभावी भूमिका निभाएगा। इसके साथ ही यह सहयोग आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्क, मादक पदार्थों की तस्करी, खतरनाक साइबर अपराधों और मानव तस्करी जैसे वैश्विक खतरों का सामना करने में हमारी क्षमता को बढ़ाएगा।
विविध ऊर्जा स्रोतों की ओर वैश्विक परिवर्तन को सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर नवाचार, भारी निवेश और निरंतर आपसी सहयोग बेहद आवश्यक है। भारत और इटली इस दिशा में नवीकरणीय ऊर्जा से लेकर उन्नत हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों, स्मार्ट ग्रिड और लचीले बुनियादी ढांचे पर काम कर रहे हैं। जहां भारत का लक्ष्य खुद को ग्रीन हाइड्रोजन के निर्यात के एक बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना है। वहीं यह नवीकरणीय बुनियादी ढांचे में इटली की उन्नत तकनीक का पूरक है।
इटली पूरे यूरोप महाद्वीप के लिए एक प्रमुख ऊर्जा प्रवेशद्वार के रूप में रणनीतिक भूमिका निभाता है। इसलिए दोनों देशों का यह कमर्शियल और एनवायरनमेंटल मिलन बहुत खास है। भारत के नेतृत्व वाली प्रमुख वैश्विक पहलों जैसे अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन और वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन में दोनों देश सक्रिय हैं। विदेश मंत्रालय
भौतिक, डिजिटल और मानवीय संपर्क ही वह मजबूत धागा है जो भारत और इटली को एक साथ बुनता है। हम दोनों ही देश वैश्विक अर्थव्यवस्था के दो सबसे महत्वपूर्ण केंद्रों के हृदय में स्थित हैं। भारत जहां इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का एक प्रमुख केंद्र है, वहीं इटली भूमध्य सागर के केंद्र में स्थित है। ये क्षेत्र आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।
वास्तव में, आज हम विश्व पटल पर एक नए भारत-भूमध्यसागरीय गलियारे के ऐतिहासिक उद्भव के साक्षी बन रहे हैं। यह कॉरिडोर दोनों क्षेत्रों को सीधे जोड़ता है। यह व्यापार, आधुनिक प्रौद्योगिकी, डेटा, स्वच्छ ऊर्जा और नए विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण गलियारा बन रहा है जो हिंद महासागर को सीधे यूरोप से जोड़ने का काम करता है।
इस पूरे वैश्विक परिदृश्य में, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) एक ऐसी दूरदर्शी सोच का प्रतिनिधित्व करता है जो आधुनिक परिवहन, परिवहन बुनियादी ढांचे और डिजिटल नेटवर्क को जोड़ती है। यह कॉरिडोर लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं के माध्यम से हमारे क्षेत्रों को जोड़ेगा। भारत और इटली इस विजन को साकार करने के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ काम कर रहे हैं। हम अपने राष्ट्रों के बीच की इस गहरी साझेदारी और स्थायी सांस्कृतिक संबंधों के आधार पर ही अपनी तमाम वैश्विक और आधुनिक साझा चुनौतियों का पूरी सफलता से समाधान कर सकते हैं।
भारतीय संस्कृति (G7 summit)में धर्म की अवधारणा उस जिम्मेदारी की भावना को व्यक्त करती है, जो हमारे कार्यों को सही दिशा देती है। वहीं वसुधैव कुटुम्बकम् का सिद्धांत इस डिजिटल युग में बहुत प्रासंगिक है।यह महान मूल्य इटली के पुनर्जागरण में निहित मानवतावादी परंपरा में एक स्वाभाविक प्रतिध्वनि पाते हैं, जो प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा और संस्कृति की लोगों को जोड़ने की शक्ति को रेखांकित करती है।
नोट: लेखक भारत और इटली के प्रधानमंत्री हैं।
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इस व्यापारिक लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई मुख्य क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इनमें डिफेंस, एयरोस्पेस और स्वच्छ प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। इसके अलावा एडवांस मशीनरी, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स में भी बड़े पैमाने पर निवेश और सहयोग को बढ़ाया जा रहा है।
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इस शानदार तालमेल के कारण भारत में प्रोडक्शन करने के लिए इतालवी व्यवसायों की रुचि बहुत तेजी से बढ़ रही है। यह एक सकारात्मक संकेत है। ठीक इसी तरह अब इटली में भी भारतीय उद्योगों की उपस्थिति लगातार मजबूत हो रही है। दोनों पक्षों से अब 1,000 से अधिक कंपनियां एक-दूसरे के देश में काम कर रही हैं।
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वहीं भारत के पास अपनी बेहतरीन इंजीनियरिंग प्रतिभा और विशाल पैमाना है। भारत का नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र बहुत गतिशील है। आज भारत में दो लाख से अधिक स्टार्टअप्स और 100 से अधिक सफल यूनिकॉर्न्स पूरी मजबूती से काम कर रहे हैं। यह सहयोग केवल दो प्रणालियों का एकीकरण नहीं है, बल्कि मूल्य का सह-सृजन है। इसमें दोनों देशों के विश्वविद्यालय और अनुसंधान केंद्र भी मिलकर बड़ी रिसर्च कर रहे हैं।
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प्रौद्योगिकी के केंद्र में मानव को रखने की भारत की दृष्टि "MANAV" और इटली की मानवतावादी परंपरा में निहित मानव-केंद्रित 'एल्गोर-एथिक्स' इसके मुख्य आधार स्तंभ हैं। हमारी साझेदारी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि AI सामाजिक सशक्तिकरण का उत्प्रेरक बने। यह दृष्टिकोण इटली की G7 अध्यक्षता और नई दिल्ली के AI इम्पैक्ट समिट 2026 का मूल हिस्सा है।
एआई (इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी) को मनुष्यों द्वारा मनुष्यों के लिए बनाया गया उपकरण मानने का अर्थ है कि यह तकनीक व्यक्तियों की जगह नहीं ले सकती। न ही यह हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर कर सकती है।
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जब भारत की ये बेहतरीन स्पेस अचीवमेंट्स इटली की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के साथ मिलती हैं, तो संयुक्त पहलों के लिए नए रास्ते खुलते हैं। दोनों देशों की स्पेस एजेंसियां अब अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण अवसरों पर काम कर रही हैं जो भविष्य के मिशनों के लिए मील का पत्थर साबित होंगी।
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