महात्मा ज्योतिराव फुले सिर्फ इतिहास का नाम नहीं, वे भारत के भविष्य के मार्गदर्शक: पीएम मोदी
Amresh Kushwaha | Apr 11, 2026, 11:07 IST
mahatma jyotirao phule 200th birth anniversary vision pm modi
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महात्मा ज्योतिराव फुले की 200वीं जयंती वर्ष के शुभारंभ पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम का यह लेख उनके शैक्षिक सुधारों, सत्यशोधक समाज और विकसित भारत के उनके विजन पर विस्तार से प्रकाश डालता है।
एक युगपुरुष का स्मरण- पीएम मोदी
महात्मा फुले का जीवन नैतिक साहस, आत्म-चिंतन और समाज के हित के लिए अटूट समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। उन्हें केवल उनकी संस्थाओं या आंदोलनों के लिए ही याद नहीं किया जाता, बल्कि उन्होंने लोगों के मन में जो आशा और आत्मविश्वास जगाया, उसका व्यापक प्रभाव भी हम आज तक महसूस करते हैं। उनके विचार देशवासियों के लिए प्रेरणापुंज हैं।
महात्मा फुले का जन्म 1827 में महाराष्ट्र में एक बहुत साधारण परिवार में हुआ। लेकिन शुरुआती चुनौतियां कभी उनकी शिक्षा, साहस और समाज के प्रति समर्पण को नहीं रोक पाईं। उन्होंने हमेशा यह माना कि चाहे कितनी भी कठिनाइयां क्यों न आएं, इंसान को मेहनत करनी चाहिए, ज्ञान हासिल करना चाहिए और समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
सवालों से बढ़ता है ज्ञान
जीवन का मिशन बनी शिक्षा
वे कहते थे, बच्चों में जो सुधार मां के माध्यम से आता है, वह बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसलिए अगर स्कूल खोले जाएं, तो सबसे पहले लड़कियों के लिए खोले जाएं। उन्होंने शिक्षा को न्याय और समानता का माध्यम बनाया।
शिक्षा के प्रति उनका दृष्टिकोण हमें आज भी प्रेरित करता है। पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए रिसर्च और इनोवेशन को प्राथमिकता दी है। ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रयास किया गया है, जिसमें युवा सवाल पूछने, नई चीजें सीखने और इनोवेशन के लिए प्रेरित हों। ज्ञान, कौशल और अवसरों में निवेश करके भारत युवाओं को प्रगति का आधार-स्तम्भ बना रहा है।
कृषि व ग्रामीण विकास की गहन जानकारी
उन्होंने देखा कि सामाजिक असमानताएं खेतों और गांवों में लोगों के जीवन को कैसे प्रभावित करती हैं। इसलिए उन्होंने गरीबों, वंचितों, कमजोर वर्गों को सम्मान दिलाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए भी हरसंभव प्रयास किए।
सच्ची आजादी पर कही थी यह बात
उनका सत्यशोधक समाज, आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण समाज सुधार आंदोलनों में से एक था। यह सामाजिक सुधार, सामुदायिक सेवा और मानवीय गरिमा को बढ़ावा देने में अग्रणी रहा था। यह महिलाओं, युवाओं और गांवों में रहने वाले लोगों की पुरजोर आवाज बना। यह आंदोलन उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि समाज की मजबूती के लिए न्याय, हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और सामूहिक प्रगति जरूरी है।
सावित्रीबाई फुले के बिना स्मरण अधूरा
2022 की पुणे यात्रा
यही कारण है कि आज भी उनके विचार करोड़ों लोगों में नई उम्मीद जगाते हैं। महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास का नाम नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं।
महात्मा फुले के 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत पर हम उनके विचारों को अपनाकर ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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