भारतीय महिलाओं में क्यों बढ़ रहा है Saree Cancer, एक्सपर्ट से समझें इसके पीछे का कारण
Kaushiki | Apr 23, 2026, 13:37 IST
saree cancer causes
क्या साड़ी पहनने से कैंसर होता है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समस्या साड़ी नहीं, बल्कि पेटीकोट को बहुत टाइट बांधना है। जानें इसके लक्षण और बचाव के आसान तरीके।
Saree Cancer: आजकल साड़ी कैंसर शब्द सोशल मीडिया पर बहुत फैल रहा है। इसे सुनकर कई महिलाएं काफी ज्यादा डर गई हैं। लेकिन सच्चाई उतनी डरावनी नहीं है जितनी दिखती है।
असल में समस्या साड़ी पहनने में बिल्कुल नहीं है। साड़ी हमारी संस्कृति और पहचान का अहम हिस्सा है। दिक्कत तो साड़ी के नीचे बंधने वाले पेटीकोट से है। पेटीकोट का नाड़ा बहुत कसकर बांधना खतरनाक हो सकता है।
इससे कमर की त्वचा पर लगातार दबाव पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक दुर्लभ स्थिति है। इसे मेडिकल भाषा में स्कुमस सेल कार्सिनोमा कहते हैं। यह लगातार होने वाली रगड़ की वजह से होता है।
सालों तक एक ही जगह पर दबाव पड़ता है। इससे त्वचा की कोशिकाएं धीरे-धीरे बदलने लगती हैं। यह बदलाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। इसलिए साड़ी को सही तरीके से बांधना जरूरी है।
![साड़ी पहनने से भी हो सकता है कैंसर? जानें क्यों बढ़ रहा खतरा और बीमारी से पहले पहचानें लक्षण - saree cancer on the rise among indian women-mobile]()
साड़ी कैंसर का मेन कारण क्रोनिक फ्रिक्शन है। स्कुमस सेल कार्सिनोमा (Squamous Cell Carcinoma - SCC) स्किन कैंसर का दूसरा सबसे कॉमन टाइप है। ये त्वचा की बाहरी परत में मौजूद स्कुमस सेल्स में होता है।
अक्सर धूप (UV rays) के ज्यादा संपर्क या लगातार त्वचा पर रगड़ के कारण ये सेल्स डैमेज हो जाते हैं। शुरुआत में ये लाल पपड़ीदार पैच या जिद्दी घाव जैसा दिखता है। अगर इसका समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
जब पेटीकोट का नाड़ा बहुत टाइट होता है। तब वह त्वचा पर निशान बनाने लगता है। महिलाएं अक्सर घंटों तक टाइट कपड़े पहनती हैं। इससे उस हिस्से में हवा नहीं पहुंच पाती। पसीना जमा होने से इन्फेक्शन होने लगता है।
लंबे समय तक घाव रहने से कैंसर हो सकता है। धूल और मिट्टी भी समस्या को बढ़ा देती हैं। अक्सर महिलाएं दर्द होने पर भी ध्यान नहीं देतीं। वे इसे मामूली रगड़ समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही छोटी सी लापरवाही बाद में भारी पड़ती है।
कमर (healthy lifestyle) पर पड़ने वाला काला निशान शुरुआती संकेत है। त्वचा का मोटा होना भी खतरे की निशानी है। इसे मेडिकल की दुनिया में मरांजोलिन अल्सर (maranjolin ulcer) कहते हैं। सावधानी बरतने पर इसे आसानी से रोका जा सकता है।
न्यूरोलॉजिस्ट (कैंसर का इलाज) ने बताया कि ये बीमारी अचानक नहीं आती। इसके लक्षण दिखने में कई साल लग जाते हैं। शुरुआत में कमर पर खुजली और जलन होती है। धीरे-धीरे वह हिस्सा पूरी तरह काला पड़ जाता है।
त्वचा वहां से सख्त और मोटी होने लगती है। अगर वहां कोई घाव हो जाए, तो सावधान हो जाएं। अगर घाव जल्दी ठीक नहीं हो रहा है। तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएं। बायोप्सी के जरिए इसका सही पता चलता है।
शुरुआती स्टेज में इसका इलाज काफी आसान है। सर्जरी या रेडिएशन से इसे ठीक कर सकते हैं। डॉक्टर ढीले कपड़े पहनने की सलाह देते हैं। कमर के हिस्से को साफ रखना बहुत जरूरी है।
साड़ी कैंसर से बचना (Rules of lifestyle) बहुत ही सरल है। बस आपको अपनी कुछ आदतें बदलनी होंगी। पेटीकोट के नाड़े को बहुत कसकर न बांधें। बाजार में अब ब्रॉड बेल्ट वाले पेटीकोट मौजूद हैं।
आप नाड़े की जगह इलास्टिक का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा पर सीधा और तेज दबाव नहीं पड़ेगा। गांठ को हमेशा एक ही जगह पर न बांधें। रोजाना नहाते समय कमर की अच्छे से सफाई करें। वहां पसीना या गंदगी जमा न होने दें।
अगर कमर पर निशान दिखे तो क्रीम लगाएं। रात को सोते समय ढीले कपड़े ही पहनें। कॉटन या सूती कपड़ों का अधिक प्रयोग करें। सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते और रगड़ बढ़ाते हैं। अपनी सेहत का ध्यान रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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सावधान! आपका पसीना खोल सकता है सेहत के गहरे राज, क्या आपने गौर किया?
असल में समस्या साड़ी पहनने में बिल्कुल नहीं है। साड़ी हमारी संस्कृति और पहचान का अहम हिस्सा है। दिक्कत तो साड़ी के नीचे बंधने वाले पेटीकोट से है। पेटीकोट का नाड़ा बहुत कसकर बांधना खतरनाक हो सकता है।
इससे कमर की त्वचा पर लगातार दबाव पड़ता है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह एक दुर्लभ स्थिति है। इसे मेडिकल भाषा में स्कुमस सेल कार्सिनोमा कहते हैं। यह लगातार होने वाली रगड़ की वजह से होता है।
सालों तक एक ही जगह पर दबाव पड़ता है। इससे त्वचा की कोशिकाएं धीरे-धीरे बदलने लगती हैं। यह बदलाव आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकता है। इसलिए साड़ी को सही तरीके से बांधना जरूरी है।
साड़ी पहनने से भी हो सकता है कैंसर? जानें क्यों बढ़ रहा खतरा और बीमारी से पहले पहचानें लक्षण - saree cancer on the rise among indian women-mobile
क्या है स्कुमस सेल कार्सिनोमा
अक्सर धूप (UV rays) के ज्यादा संपर्क या लगातार त्वचा पर रगड़ के कारण ये सेल्स डैमेज हो जाते हैं। शुरुआत में ये लाल पपड़ीदार पैच या जिद्दी घाव जैसा दिखता है। अगर इसका समय पर इलाज न हो, तो यह शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।
साड़ी नहीं, आपकी गलत आदतें हैं वजह
लंबे समय तक घाव रहने से कैंसर हो सकता है। धूल और मिट्टी भी समस्या को बढ़ा देती हैं। अक्सर महिलाएं दर्द होने पर भी ध्यान नहीं देतीं। वे इसे मामूली रगड़ समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। यही छोटी सी लापरवाही बाद में भारी पड़ती है।
कमर (healthy lifestyle) पर पड़ने वाला काला निशान शुरुआती संकेत है। त्वचा का मोटा होना भी खतरे की निशानी है। इसे मेडिकल की दुनिया में मरांजोलिन अल्सर (maranjolin ulcer) कहते हैं। सावधानी बरतने पर इसे आसानी से रोका जा सकता है।
न्यूरोलॉजिस्ट और एक्सपर्ट्स की क्या है राय
त्वचा वहां से सख्त और मोटी होने लगती है। अगर वहां कोई घाव हो जाए, तो सावधान हो जाएं। अगर घाव जल्दी ठीक नहीं हो रहा है। तो तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाएं। बायोप्सी के जरिए इसका सही पता चलता है।
शुरुआती स्टेज में इसका इलाज काफी आसान है। सर्जरी या रेडिएशन से इसे ठीक कर सकते हैं। डॉक्टर ढीले कपड़े पहनने की सलाह देते हैं। कमर के हिस्से को साफ रखना बहुत जरूरी है।
साड़ी कैंसर से बचाव के आसान उपाय
आप नाड़े की जगह इलास्टिक का इस्तेमाल करें। इससे त्वचा पर सीधा और तेज दबाव नहीं पड़ेगा। गांठ को हमेशा एक ही जगह पर न बांधें। रोजाना नहाते समय कमर की अच्छे से सफाई करें। वहां पसीना या गंदगी जमा न होने दें।
अगर कमर पर निशान दिखे तो क्रीम लगाएं। रात को सोते समय ढीले कपड़े ही पहनें। कॉटन या सूती कपड़ों का अधिक प्रयोग करें। सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते और रगड़ बढ़ाते हैं। अपनी सेहत का ध्यान रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी है।
डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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