बोल हरि बोल: कलेक्टर मैडम के दिल्ली दौरे, दूसरी मैडम का फ्रस्ट्रेशन और मामा की नई रिहर्सल... क्या है मैसेज?
Harish Divekar | Jul 26, 2026, 13:45 IST
बोल हरि बोल
मध्यप्रदेश की अफसरशाही में नए फेरबदल के बाद चर्चाएं तेज हैं। कलेक्टर मैडम के दिल्ली कनेक्शन, अफसरों की नाराजगी और मामा की वायरल तस्वीर ने प्रशासनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए ये सब कुछ...
BHOPAL. मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों कुर्सियों और समीकरणों की चर्चा तेज है। मंत्रालय की हॉट सीट पर नए बड़े साहब की तैनाती के बाद अफसरशाही में हलचल बढ़ गई है। कहीं विभाग बदलने से नाराजगी है तो कहीं अचानक मिली नई जिम्मेदारी से चेहरे खिल उठे हैं। कलेक्टर मैडम के दिल्ली कनेक्शन से लेकर पुलिस मुख्यालय की अहम कुर्सी तक, हर तरफ चर्चाओं का बाजार गर्म है।
इस तरह देश-प्रदेश में खबरें तो बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आइए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
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कहते हैं, एक तस्वीर हजार शब्द बोल देती है। इन दिनों मामा की ऐसी ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है। तस्वीर में मामा अकेले बगीचे में कुर्सी पर बैठे मोर को निहारते नजर आ रहे हैं। बस फिर क्या था, तस्वीर देखते ही सोशल मीडिया यूजर्स की रचनात्मकता जाग उठी। किसी ने इसे प्रधानमंत्री की शैली से जोड़ दिया, तो किसी ने चुटकी लेते हुए लिख दिया कि प्रधानमंत्री बनने का पूर्वाभ्यास करते केंद्रीय मंत्री।
कुछ लोगों ने कहा कि मामा भी अब उसी अंदाज में नजर आने लगे हैं, जैसा अक्सर प्रधानमंत्री की कुछ चर्चित तस्वीरों में देखने को मिलता है। हालांकि एक तस्वीर से किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं मापी जा सकती, लेकिन राजनीति में तस्वीरों की अपनी अलग भाषा होती है। यही वजह है कि इस बार चर्चा किसी बयान की नहीं, बल्कि मामा की उस तस्वीर की हो रही है, जिसके अपने-अपने मायने निकाले जा रहे हैं।
नए बड़े साहब ने पद संभालने के महज 24 घंटे के भीतर प्रशासनिक फेरबदल कर अपनी कार्यशैली का संकेत दे दिया है, लेकिन मंत्रालय की चर्चा यहीं थमने वाली नहीं है। अंदरखाने खबर है कि अफसरों की एक और सूची जल्द आ सकती है। ताजा फेरबदल के बाद कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के पास विभागों का बोझ काफी बढ़ गया है, जबकि कुछ अफसर अभी भी बिना किसी बड़ी जिम्मेदारी के हैं।
ऐसे में अगली सूची में कई विभागों का नया बंटवारा देखने को मिलेगा। साथ ही कुछ अफसरों के प्रभार बदले जाएंगे, तो कुछ को पहली बार विभाग मिलने की संभावना है। अब मंत्रालय में चर्चा इसी बात की है कि अगली सूची में किसकी जिम्मेदारी बढ़ेगी, किसका बोझ कम होगा और किसकी किस्मत खुलेगी?
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मंत्रालय की हॉट सीट पर नए बड़े साहब की ताजपोशी हो चुकी है। कुर्सी संभालते ही उन्होंने डॉक्टर साहब के साथ पहली बैठक की और इसके बाद 20 आईएएस अफसरों को इधर से उधर कर दिया। बड़े साहब सख्त मिजाज के अफसर माने जाते हैं। नियम-कायदों पर उनकी पकड़ भी मजबूत है।
अब बैठकों में बिना तैयारी के पहुंचने वाले अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों की मानें तो बड़े साहब मैदानी अफसरों को भी सीधे टास्क देने की तैयारी में हैं। यानी मंत्रालय से सिर्फ निर्देश ही नहीं जाएंगे, बल्कि काम की मॉनिटरिंग भी पहले से ज्यादा सख्त होगी।
एक प्रमुख सचिव से महत्वपूर्ण विभाग वापस लिए जाने से उनकी मैडम कुछ नाराज बताई जा रही हैं। मैडम का मानना है कि उनके पति ने मेहनत से विभाग को नई पहचान दी थी, पर अब उसकी जिम्मेदारी एक प्रभावशाली आईएएस के पास चली गई है।
दरअसल, इस विभाग में अगले छह महीने के भीतर बड़ा इवेंट होना है। इसकी तैयारियों में प्रमुख सचिव सक्रिय थे। इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि, नया विभाग भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन पहले वाले विभाग की अपनी अलग ही चमक थी। वहां देश के बड़े लोगों से मेल-मुलाकात के मौके भी ज्यादा मिलते थे।
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मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों एक मैडम का दिल्ली कनेक्शन खूब चर्चाओं में है। दरअसल, कलेक्टर मैडम वीकेंड पर खूब दिल्ली जाती थीं। इसकी खबरें भोपाल तक पहुंच गई थीं। इसके बाद प्रशासनिक फेरबदल हुआ और उनका जिला बदल गया। दिलचस्प बात यह है कि इस बार उनकी पोस्टिंग ऐसे जिले में हुई है, जहां से दिल्ली का सफर पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
अब अफसरशाही में इस तबादले के अपने-अपने मायने निकाले जा रहे हैं। कोई इसे संयोग बता रहा है तो कोई कह रहा है कि संदेश साफ है। फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद मैडम के वीकेंड का कैलेंडर कैसा रहेगा। अब दिल्ली के दौरे पहले जैसे जारी रहेंगे या फिर दिल्ली वालों को ही नए जिले का रास्ता पकड़ना पड़ेगा?
खाकी वाले महकमे में पोस्टिंग के बाद से मैडम का मूड कुछ बदला-बदला नजर आ रहा है। इससे पहले मैडम एक बड़े संचालनालय में कमिश्नर रह चुकी हैं, जहां उन्होंने खूब प्रभाव जमाया था। शिकायतों के बाद उन्हें यहां भेजा गया। अब चर्चा है कि मैडम अपना गुस्सा बाबुओं पर निकाल रही हैं।
महकमे के गलियारों में तो यहां तक बातें चल रही हैं कि फाइल लेकर पहुंचने वाले बाबुओं से मैडम की पूछताछ कुछ ज्यादा ही तीखी हो गई है। बाबू भी आपस में कहने लगे हैं कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। हालांकि, मौका मिलने पर मैडम फिर अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सकती हैं, ऐसी चर्चाएं भी चल रही हैं।
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आखिरकार साहब की किस्मत ने साथ दे ही दिया। मंत्रालय में वापसी के लिए साहब पिछले कई महीनों से कोशिशों में जुटे थे। कहा जाता है कि उन्होंने मंत्रालय की पांचवीं मंजिल पर बैठे बड़े साहबों से यहां तक आग्रह किया था कि किसी छोटे विभाग का अतिरिक्त प्रभार ही दे दिया जाए, ताकि मंत्रालय में बैठने की जगह मिल सके, पर बात नहीं बन रही थी। इसके बाद साहब ने उम्मीद छोड़ दी थी। तभी अचानक हुए प्रशासनिक फेरबदल ने उनकी मुराद पूरी कर दी।
नए वाले बड़े साहब की एंट्री के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय से बाहर जाना पड़ा और उनकी जगह संस्था में पदस्थ साहब को मंत्रालय आने का मौका मिल गया है। खास बात यह रही कि उन्हें सिर्फ जगह ही नहीं मिली, बल्कि अच्छा-खासा विभाग भी मिल गया है।
मंत्रालय में नई ताजपोशी के बाद अब पुलिस मुख्यालय की दो अहम कुर्सियों पर निगाहें टिकी हैं। खाकी वाले मुखिया नवंबर में रिटायर होंगे, लेकिन उससे पहले नंबर-2 की कुर्सी संभाल रहे खुफिया तंत्र के मुखिया अगस्त में विदा हो सकते हैं। इस पद के लिए इंदौर के एक बड़े साहब का नाम चर्चा में है।
हालांकि, इस कुर्सी के लिए योग्य चेहरे की तलाश जारी है, लेकिन फिलहाल चर्चा में सबसे आगे एक ही नाम बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि अगस्त खत्म होते-होते कोई नया दावेदार मैदान में आता है या फिर इंदौर वाले साहब ही बाजी मार ले जाते हैं।
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इस तरह देश-प्रदेश में खबरें तो बहुत हैं, आप तो सीधे नीचे उतर आइए और वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol के रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
मामा की तस्वीर ने छेड़ दी नई चर्चा!
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कहते हैं, एक तस्वीर हजार शब्द बोल देती है। इन दिनों मामा की ऐसी ही एक तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब घूम रही है। तस्वीर में मामा अकेले बगीचे में कुर्सी पर बैठे मोर को निहारते नजर आ रहे हैं। बस फिर क्या था, तस्वीर देखते ही सोशल मीडिया यूजर्स की रचनात्मकता जाग उठी। किसी ने इसे प्रधानमंत्री की शैली से जोड़ दिया, तो किसी ने चुटकी लेते हुए लिख दिया कि प्रधानमंत्री बनने का पूर्वाभ्यास करते केंद्रीय मंत्री।
कुछ लोगों ने कहा कि मामा भी अब उसी अंदाज में नजर आने लगे हैं, जैसा अक्सर प्रधानमंत्री की कुछ चर्चित तस्वीरों में देखने को मिलता है। हालांकि एक तस्वीर से किसी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं मापी जा सकती, लेकिन राजनीति में तस्वीरों की अपनी अलग भाषा होती है। यही वजह है कि इस बार चर्चा किसी बयान की नहीं, बल्कि मामा की उस तस्वीर की हो रही है, जिसके अपने-अपने मायने निकाले जा रहे हैं।
अभी एक और सूची बाकी है!
ऐसे में अगली सूची में कई विभागों का नया बंटवारा देखने को मिलेगा। साथ ही कुछ अफसरों के प्रभार बदले जाएंगे, तो कुछ को पहली बार विभाग मिलने की संभावना है। अब मंत्रालय में चर्चा इसी बात की है कि अगली सूची में किसकी जिम्मेदारी बढ़ेगी, किसका बोझ कम होगा और किसकी किस्मत खुलेगी?
एक्शन में नए बड़े साहब
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मंत्रालय की हॉट सीट पर नए बड़े साहब की ताजपोशी हो चुकी है। कुर्सी संभालते ही उन्होंने डॉक्टर साहब के साथ पहली बैठक की और इसके बाद 20 आईएएस अफसरों को इधर से उधर कर दिया। बड़े साहब सख्त मिजाज के अफसर माने जाते हैं। नियम-कायदों पर उनकी पकड़ भी मजबूत है।
अब बैठकों में बिना तैयारी के पहुंचने वाले अफसरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सूत्रों की मानें तो बड़े साहब मैदानी अफसरों को भी सीधे टास्क देने की तैयारी में हैं। यानी मंत्रालय से सिर्फ निर्देश ही नहीं जाएंगे, बल्कि काम की मॉनिटरिंग भी पहले से ज्यादा सख्त होगी।
पति का महकमा बदला तो मैडम नाराज
दरअसल, इस विभाग में अगले छह महीने के भीतर बड़ा इवेंट होना है। इसकी तैयारियों में प्रमुख सचिव सक्रिय थे। इसी बीच उनका तबादला कर दिया गया है। हालांकि, नया विभाग भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन पहले वाले विभाग की अपनी अलग ही चमक थी। वहां देश के बड़े लोगों से मेल-मुलाकात के मौके भी ज्यादा मिलते थे।
कलेक्टर मैडम का दिल दिल्ली में!
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मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों एक मैडम का दिल्ली कनेक्शन खूब चर्चाओं में है। दरअसल, कलेक्टर मैडम वीकेंड पर खूब दिल्ली जाती थीं। इसकी खबरें भोपाल तक पहुंच गई थीं। इसके बाद प्रशासनिक फेरबदल हुआ और उनका जिला बदल गया। दिलचस्प बात यह है कि इस बार उनकी पोस्टिंग ऐसे जिले में हुई है, जहां से दिल्ली का सफर पहले जितना आसान नहीं रहेगा।
अब अफसरशाही में इस तबादले के अपने-अपने मायने निकाले जा रहे हैं। कोई इसे संयोग बता रहा है तो कोई कह रहा है कि संदेश साफ है। फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि नई जिम्मेदारी संभालने के बाद मैडम के वीकेंड का कैलेंडर कैसा रहेगा। अब दिल्ली के दौरे पहले जैसे जारी रहेंगे या फिर दिल्ली वालों को ही नए जिले का रास्ता पकड़ना पड़ेगा?
मैडम का बढ़ता फ्रस्ट्रेशन
महकमे के गलियारों में तो यहां तक बातें चल रही हैं कि फाइल लेकर पहुंचने वाले बाबुओं से मैडम की पूछताछ कुछ ज्यादा ही तीखी हो गई है। बाबू भी आपस में कहने लगे हैं कि सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली है। हालांकि, मौका मिलने पर मैडम फिर अपनी पुरानी रफ्तार पकड़ सकती हैं, ऐसी चर्चाएं भी चल रही हैं।
किस्मत से टूटा छींका!
8676516c-449
आखिरकार साहब की किस्मत ने साथ दे ही दिया। मंत्रालय में वापसी के लिए साहब पिछले कई महीनों से कोशिशों में जुटे थे। कहा जाता है कि उन्होंने मंत्रालय की पांचवीं मंजिल पर बैठे बड़े साहबों से यहां तक आग्रह किया था कि किसी छोटे विभाग का अतिरिक्त प्रभार ही दे दिया जाए, ताकि मंत्रालय में बैठने की जगह मिल सके, पर बात नहीं बन रही थी। इसके बाद साहब ने उम्मीद छोड़ दी थी। तभी अचानक हुए प्रशासनिक फेरबदल ने उनकी मुराद पूरी कर दी।
नए वाले बड़े साहब की एंट्री के बाद एक वरिष्ठ अधिकारी को मंत्रालय से बाहर जाना पड़ा और उनकी जगह संस्था में पदस्थ साहब को मंत्रालय आने का मौका मिल गया है। खास बात यह रही कि उन्हें सिर्फ जगह ही नहीं मिली, बल्कि अच्छा-खासा विभाग भी मिल गया है।
खुफियागिरी के लिए इंदौर से नाम चर्चा में
हालांकि, इस कुर्सी के लिए योग्य चेहरे की तलाश जारी है, लेकिन फिलहाल चर्चा में सबसे आगे एक ही नाम बताया जा रहा है। अब देखना होगा कि अगस्त खत्म होते-होते कोई नया दावेदार मैदान में आता है या फिर इंदौर वाले साहब ही बाजी मार ले जाते हैं।
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
जब खाकी वाले साहब इंदौरी, मैडम फाइल वूमेन और उपमुख्यमंत्री पोस्टमैन बनें…
साहब और सिंघल की जोड़ी हिट, इधर मैडम को चाहिए चमाट मार असिस्टेंट!
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