बोल हरि बोल: किस्मत कनेक्शन... साहब के जीवन में हनी लाई भूचाल, माल नहीं कूट पाए मंत्री जी
Harish Divekar | Aug 09, 2026, 13:00 IST
बोल हरि बोल
वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के कॉलम बोल हरि बोल में पढ़िए मध्य प्रदेश की सियासत के किस्मत कनेक्शन वाले किस्से। मंत्री की डील, साहब की परेशानी और राजनीतिक हलचल की पूरी कहानी...
BHOPAL. किस्मत से बड़ा कुछ नहीं होता। जो आपके हिस्से में है, वह मिलकर रहेगा और जो नहीं है, वह कितनी भी कोई कोशिश कर ले, उसे नहीं मिलता। वरिष्ठ पत्रकार हरीश दिवेकर के लोकप्रिय कॉलम Bol Hari Bol में मध्य प्रदेश की सियासत के कुछ ऐसे ही किस्से हैं, जो किस्मत कनेक्शन की कहानी बयां करते हैं। आप तो सीधे नीचे उतर आइए और रोचक किस्सों का आनंद लीजिए।
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कहते हैं, किस्मत में जो लिखा हो, वही मिलता है। फिर चाहे मेहनत की कमाई हो या मलाई की जुगाड़। अब मंत्री जी का ही मामला देख लीजिए। अपने विभाग के एक मंडल में वे अपने प्रभाव से कुछ बड़ा हासिल करना चाहते थे। सूत्र बताते हैं कि 150 करोड़ रुपये की डील थी, उसके लिए प्लानिंग पूरी हो गई थी, पर तभी निगम में अध्यक्ष जी की एंट्री हो गई।
अध्यक्ष जी को जैसे ही मंत्री जी की योजना की भनक लगी, उन्होंने ब्रेक लगा दिया। फिर बातचीत हुई, रास्ता निकालने की कोशिश हुई और मामला दोबारा पटरी पर आ गया। अब मंत्री जी और अध्यक्ष जी मिलकर मलाई खाने की तैयारी में थे, तभी एक अफसर ने फाइल रोक दी। बस फिर क्या था, रायता फैल गया। मामला मीडिया तक पहुंच गया और जो खेल अंदर ही अंदर चल रहा था, वह चर्चा में आ गया। मंत्री जी की मलाई वाली प्लानिंग धरी रह गई और अध्यक्ष जी भी खाली हाथ रह गए।
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वक्त गुजर जाता है, कहानी पुरानी हो जाती है, लेकिन कुछ किस्से पीछा नहीं छोड़ते। अब एक साहब का मामला ही देख लीजिए। कई साल पहले जिले में पदस्थ रहते हुए उनका एक महिला से रिश्ता था। फिर हालात बदले और रास्ते अलग हो गए। समय बीता तो कहानी भी पुरानी पड़ गई थी, लेकिन साहब की किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। मैडम उनके जीवन में फिर लौट आई थीं और उन्होंने साहब को चंगुल में फंसा लिया था। साहब हनीट्रैप में फंस गए थे।
जब उन्हें समझ आया तो बचाव के लिए अपने विभाग के ठाकुर साहब यानी मंत्री जी की शरण में पहुंच गए। अपने स्वभाव के मुताबिक मंत्री जी ने साहब को उस मुसीबत से तो निकाल दिया, लेकिन अब साहब खुद दूसरी परेशानी में फंस गए हैं। जी हां, मंत्री जी अब साहब को अपने इशारे पर नचा रहे हैं।
समय बड़ा बलवान होता है और दुनिया गोल। कब कौन किससे कहां दोबारा टकरा जाए, यह कहा नहीं जा सकता। यह किस्सा इसी की बानगी है। दरअसल, एक अधीनस्थ ने अपने साहब को टारगेट पर लेकर उन्हें विभाग से पहले हटवा दिया था। अधीनस्थ की भी विभाग से विदाई हो गई थी, लेकिन वे अपने प्रभाव से दोबारा उस विभाग में आ गए थे।
अब दिलचस्प यह है कि बड़े साहब फिर उसी विभाग में लौट आए हैं, जहां अधीनस्थ पदस्थ है। इस तरह बड़े साहब के पुराने जख्म अब हरे हो गए हैं और उन्होंने अधीनस्थ को अपने टारगेट पर ले लिया है। इसका नतीजा यह है कि विभाग में अब अजीब तरह का प्रदूषण फैल रहा है।
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कहते हैं, खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर, कटता खरबूजा ही है। लेकिन राजनीति में कभी-कभी चाकू भी अपना काम भूल जाता है और पूरा मामला उल्टा पड़ जाता है। अब एक मंत्री जी का किस्सा ही देख लीजिए। हाल ही में मंत्री जी पंत प्रधान से मुलाकात करने पहुंचे थे। मुलाकात हुई, तस्वीरें भी आईं और मामला सामान्य था। लेकिन मंत्री जी की पीआर टीम ने खबर कुछ ऐसी चला दी कि कहानी ही पलट गई। खबर में ऐसा लगा मानो पंत प्रधान को ही मंत्री जी से मिलने की जरूरत पड़ गई हो।
बस फिर क्या था, मीडिया की नजर पड़ी और मामला चर्चा में आ गया। जो खबर मंत्री जी की छवि चमकाने के लिए तैयार की गई थी, वही उनके लिए किरकिरी बन गई। अब राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि अति उत्साह में पीआर करने वालों ने आका को चमकाने के चक्कर में उन्हें ही आईना दिखा दिया।
पंडित जी ने दिल्ली में पंत प्रधान से मुलाकात क्या की, प्रदेश की सियासत में चर्चाओं का बाजार फिर गर्म हो गया है। मुलाकात की तस्वीर सामने आते ही इसके अपने-अपने मायने निकाले जाने लगे हैं।
कोई इसे संगठन में भाई साहब की बढ़ती भूमिका से जोड़ रहा है, तो किसी को लगता है कि जल्द ही उन्हें केंद्रीय टीम में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि मुलाकात में क्या बात हुई, इसका खुलासा तो नहीं हुआ, लेकिन राजनीतिक गलियारों को चर्चा का नया मसाला जरूर मिल गया है।
समर्थक भी कहां पीछे रहने वाले थे। मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर आई तो किसी ने इसे बड़े बदलाव का संकेत बताया, तो किसी ने भाई साहब की वापसी का ट्रेलर करार दिया। विरोधियों ने भी अपनी-अपनी व्याख्या शुरू कर दी है। हकीकत तो भाई साहब ही जानें...?
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किस्मत ने धोखा दे दिया!
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कहते हैं, किस्मत में जो लिखा हो, वही मिलता है। फिर चाहे मेहनत की कमाई हो या मलाई की जुगाड़। अब मंत्री जी का ही मामला देख लीजिए। अपने विभाग के एक मंडल में वे अपने प्रभाव से कुछ बड़ा हासिल करना चाहते थे। सूत्र बताते हैं कि 150 करोड़ रुपये की डील थी, उसके लिए प्लानिंग पूरी हो गई थी, पर तभी निगम में अध्यक्ष जी की एंट्री हो गई।
अध्यक्ष जी को जैसे ही मंत्री जी की योजना की भनक लगी, उन्होंने ब्रेक लगा दिया। फिर बातचीत हुई, रास्ता निकालने की कोशिश हुई और मामला दोबारा पटरी पर आ गया। अब मंत्री जी और अध्यक्ष जी मिलकर मलाई खाने की तैयारी में थे, तभी एक अफसर ने फाइल रोक दी। बस फिर क्या था, रायता फैल गया। मामला मीडिया तक पहुंच गया और जो खेल अंदर ही अंदर चल रहा था, वह चर्चा में आ गया। मंत्री जी की मलाई वाली प्लानिंग धरी रह गई और अध्यक्ष जी भी खाली हाथ रह गए।
हनी लौटी तो साहब फिर फंस गए!
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वक्त गुजर जाता है, कहानी पुरानी हो जाती है, लेकिन कुछ किस्से पीछा नहीं छोड़ते। अब एक साहब का मामला ही देख लीजिए। कई साल पहले जिले में पदस्थ रहते हुए उनका एक महिला से रिश्ता था। फिर हालात बदले और रास्ते अलग हो गए। समय बीता तो कहानी भी पुरानी पड़ गई थी, लेकिन साहब की किस्मत को तो कुछ और ही मंजूर था। मैडम उनके जीवन में फिर लौट आई थीं और उन्होंने साहब को चंगुल में फंसा लिया था। साहब हनीट्रैप में फंस गए थे।
जब उन्हें समझ आया तो बचाव के लिए अपने विभाग के ठाकुर साहब यानी मंत्री जी की शरण में पहुंच गए। अपने स्वभाव के मुताबिक मंत्री जी ने साहब को उस मुसीबत से तो निकाल दिया, लेकिन अब साहब खुद दूसरी परेशानी में फंस गए हैं। जी हां, मंत्री जी अब साहब को अपने इशारे पर नचा रहे हैं।
विभाग में फैला प्रदूषण
अब दिलचस्प यह है कि बड़े साहब फिर उसी विभाग में लौट आए हैं, जहां अधीनस्थ पदस्थ है। इस तरह बड़े साहब के पुराने जख्म अब हरे हो गए हैं और उन्होंने अधीनस्थ को अपने टारगेट पर ले लिया है। इसका नतीजा यह है कि विभाग में अब अजीब तरह का प्रदूषण फैल रहा है।
आका को चमकाने चले थे, खुद ही चमका गए!
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कहते हैं, खरबूजा चाकू पर गिरे या चाकू खरबूजे पर, कटता खरबूजा ही है। लेकिन राजनीति में कभी-कभी चाकू भी अपना काम भूल जाता है और पूरा मामला उल्टा पड़ जाता है। अब एक मंत्री जी का किस्सा ही देख लीजिए। हाल ही में मंत्री जी पंत प्रधान से मुलाकात करने पहुंचे थे। मुलाकात हुई, तस्वीरें भी आईं और मामला सामान्य था। लेकिन मंत्री जी की पीआर टीम ने खबर कुछ ऐसी चला दी कि कहानी ही पलट गई। खबर में ऐसा लगा मानो पंत प्रधान को ही मंत्री जी से मिलने की जरूरत पड़ गई हो।
बस फिर क्या था, मीडिया की नजर पड़ी और मामला चर्चा में आ गया। जो खबर मंत्री जी की छवि चमकाने के लिए तैयार की गई थी, वही उनके लिए किरकिरी बन गई। अब राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि अति उत्साह में पीआर करने वालों ने आका को चमकाने के चक्कर में उन्हें ही आईना दिखा दिया।
भाई साहब की खास मुलाकात... सियासत फिर गरम!
कोई इसे संगठन में भाई साहब की बढ़ती भूमिका से जोड़ रहा है, तो किसी को लगता है कि जल्द ही उन्हें केंद्रीय टीम में कोई बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि मुलाकात में क्या बात हुई, इसका खुलासा तो नहीं हुआ, लेकिन राजनीतिक गलियारों को चर्चा का नया मसाला जरूर मिल गया है।
समर्थक भी कहां पीछे रहने वाले थे। मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर आई तो किसी ने इसे बड़े बदलाव का संकेत बताया, तो किसी ने भाई साहब की वापसी का ट्रेलर करार दिया। विरोधियों ने भी अपनी-अपनी व्याख्या शुरू कर दी है। हकीकत तो भाई साहब ही जानें...?
द सूत्र पर पढ़िए बोल हरि बोल के अन्य कॉलम...
पर्दे के पीछे हनी ट्रैप की पटकथा, मंत्री महोदया की प्रयोगशाला...कीलन देव और धाकड़ ठेकेदार!
बीजेपी में खलबली, कलेक्टर और कप्तान की कुर्सी जाते-जाते बची और वो पटवारी साहब!
मैडम पर किसका वरदहस्त, सैंयां जी कैसे बचे, पंडित जी का डायलॉग और माननीय का गुस्सा!
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