AI बताएगा किस इलाके में बढ़ रही कौन-सी बीमारी, 122 करोड़ हेल्थ रिकॉर्ड से बनेगा बीमारियों का डिजिटल नक्शा
Anshika Singh Chauhan | Oct 08, 2026, 14:24 IST
डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड से बीमारी का नक्शा: एआई की मदद से स्क्रीनिंग और बजट की प्राथमिकता कैसे तय होगी
भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए अब हमें बीमारियों को पहचानने और उनकी रोकथाम करने में काफी मदद मिलेगी। डिजिटल हेल्थ के 122.95 करोड़ से ज्यादा रिकॉर्ड्स से बीमारियों के बढ़ते मामलों का विश्लेषण संभव है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर देखभाल मिलेगी। अब मरीजों की जानकारी अस्पतालों के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगी।
अब बीमारियों का बनेगा डिजिटल नक्शा
इसके लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद ली जाएगी। एआई स्वास्थ्य से जुड़े बड़े डेटा का विश्लेषण करेगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किस जिले या राज्य में कौन-सी बीमारी ज्यादा सामने आ रही है।
उदाहरण के लिए किसी इलाके में डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं तो डिजिटल डेटा से इस बदलाव की पहचान की जा सकेगी। इसी तरह दिल की बीमारी, कैंसर और सांस की बीमारियों के बढ़ते मामलों की भी निगरानी हो सकेगी।
इस पूरी प्रक्रिया को डिजीज मैपिंग (Disease Mapping) कहा जा सकता है। इसका मतलब है कि स्वास्थ्य से जुड़े आंकड़ों के आधार पर बीमारियों का डिजिटल नक्शा तैयार करना। इससे सरकार को यह तय करने में मदद मिलेगी कि किस इलाके में किस बीमारी की रोकथाम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।
देश में 122 करोड़ से ज्यादा हेल्थ रिकॉर्ड लिंक
जानिए डिजिटल हेल्थ के बड़े आंकड़े
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) | 98 करोड़ 16 लाख 91 हजार 456 |
| डिजिटल नेटवर्क से जुड़े हेल्थ रिकॉर्ड | 122 करोड़ 95 लाख 60 हजार 217 |
| पंजीकृत स्वास्थ्य केंद्र (हेल्थ फैसिलिटी) | 5 लाख 86 हजार 903 |
| पंजीकृत स्वास्थ्य पेशेवर (हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स) | 12 लाख 45 हजार 270 |
हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स
पुराने सिस्टम के साथ जुड़ेगा नया डिजिटल सिस्टम
अब डिजिटल स्वास्थ्य डेटा और एआई की मदद से इस निगरानी को और बेहतर बनाने की दिशा में काम हो रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार की राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ हुई बैठक में भी इस विषय पर चर्चा की गई है। नई व्यवस्था से अलग-अलग स्थानों पर सामने आने वाली बीमारियों की जानकारी का विश्लेषण करने में मदद मिल सकती है।
राज्यों के हेल्थ सिस्टम भी आपस में जुड़ रहे
इसमें गुजरात का टेक्नो प्लस, उत्तर प्रदेश का ई-कवच और राजस्थान का पीसीटीएस/आईएचएमएस जैसे सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा अन्य स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणालियों और पीएम-जय जैसे प्लेटफॉर्म को भी एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है।
इसका फायदा यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण कर सकेगा। इससे किसी राज्य में बढ़ रही बीमारी की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरत का आकलन करना आसान हो सकता है।
टीबी और कैंसर की पहचान में भी AI की मदद
इनमें टीबी की स्क्रीनिंग, कैंसर की जांच और टेलीमेडिसिन जैसी सेवाएं शामिल हैं। एआई की मदद से डॉक्टरों को बीमारी की शुरुआती पहचान और इलाज से जुड़े फैसले लेने में सहायता मिल सकती है। इसे AI Healthcare के रूप में देखा जा रहा है।
जानिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई के प्रमुख प्रोजेक्ट
| एआई प्रोजेक्ट | क्या काम करेगा |
|---|---|
| मधुनेत्र एआई | डायबिटीज से आंखों पर पड़ने वाले असर की स्क्रीनिंग |
| कफ ओवर टीबी | खांसी की आवाज के आधार पर टीबी की स्क्रीनिंग |
| एआई चेस्ट एक्सरे | छाती के एक्स-रे में टीबी और अन्य असामान्यताओं की पहचान में मदद |
| सीडीएसएस ई-संजीवनी | संभावित बीमारी समझने और इलाज से जुड़े फैसलों में डॉक्टरों की सहायता |
| साथी | हेल्थ रिकॉर्ड से जुड़ी राष्ट्रीय नीति और गवर्नेंस का ढांचा |
| बोध | एआई मॉडल की जांच और उनकी क्षमता का आकलन |
| कैच | कैंसर की स्क्रीनिंग और जांच में एआई समाधान |
हालांकि स्क्रीनिंग में एआई की मदद मिलने का मतलब यह नहीं है कि बीमारी की अंतिम पुष्टि भी केवल एआई करेगा। इसके लिए जरूरी मेडिकल जांच और डॉक्टर की सलाह महत्वपूर्ण
बीमारी के हॉटस्पॉट की होगी पहचान
एआई की मदद से स्वास्थ्य विभाग अलग-अलग क्षेत्रों के आंकड़ों का विश्लेषण कर सकेगा। इससे संक्रामक बीमारियों के साथ गैर-संचारी बीमारियों पर भी नजर रखी जा सकेगी। गैर-संचारी बीमारियों में डायबिटीज, हृदय रोग, कैंसर और सांस से जुड़ी कई बीमारियां शामिल हैं।
अभी इन बीमारियों की स्थिति समझने के लिए अलग-अलग रिपोर्ट और सर्वे का इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल डेटा के विश्लेषण से जिले और राज्य के स्तर पर स्वास्थ्य जोखिम वाले इलाकों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है। इसी प्रक्रिया को Health Risk Mapping कहा जाता है।
बीमारी बढ़ने के कारण समझने में भी मदद
उदाहरण के लिए किसी जिले में एक खास बीमारी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग उस इलाके पर ज्यादा ध्यान दे सकेगा। इसके बाद संबंधित बीमारी के कारणों और जोखिमों की अलग से पड़ताल की जा सकेगी। इससे स्वास्थ्य विभाग को रोकथाम की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
हालांकि केवल डिजिटल आंकड़ों के आधार पर किसी बीमारी का कारण तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए दूसरी स्वास्थ्य जांच और अध्ययन भी जरूरी होंगे।
जहां ज्यादा बीमारी, वहां मिल सकती हैं बेहतर सुविधाएं
नई व्यवस्था में बीमारी के बढ़ते मामलों और इलाज की जरूरत को भी महत्व दिया जा सकेगा। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस जिले में किस स्वास्थ्य सेवा की ज्यादा जरूरत है।
उदाहरण के लिए किसी क्षेत्र में कैंसर के मरीज ज्यादा सामने आ रहे हैं तो वहां स्क्रीनिंग सुविधाएं बढ़ाने की जरूरत का आकलन किया जा सकेगा। इसी तरह किसी इलाके में डायबिटीज और हृदय रोग के मरीज बढ़ रहे हैं तो वहां जांच और रोकथाम से जुड़ी सेवाओं पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य योजनाओं को स्थानीय जरूरतों के अनुसार बेहतर बनाना है।
मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?
अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को बीमारी के बढ़ते दबाव के अनुसार तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड की मदद से मरीजों की मेडिकल हिस्ट्री को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का आधार भी तैयार हो रहा है। इससे इलाज से जुड़ी जानकारी को बेहतर तरीके से इस्तेमाल करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
अब आगे क्या होगा?
इसके आधार पर स्क्रीनिंग अभियान, स्वास्थ्य योजनाएं और संसाधनों की प्राथमिकताएं तय की जा सकेंगी। हालांकि डिजिटल नक्शा बनाने की पूरी व्यवस्था कब तक लागू होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है।
FAQ:
- आभा हेल्थ रिकॉर्ड से बीमारी का डिजिटल नक्शा कैसे बनेगा?
डिजिटल नेटवर्क से लिंक हेल्थ रिकॉर्ड के डेटा का एआई विश्लेषण होगा। इससे पता चलेगा कि किस इलाके में कौन-सी बीमारी फैल रही है। इलाज के नतीजे कैसे बदल रहे हैं, यह भी दिखेगा। - टीबी स्क्रीनिंग एआई के कौन-से प्रयोग चल रहे हैं?
रिपोर्ट में दो प्रयोग गिनाए गए हैं। कॉफ अगेस्ट टीबी खांसी की आवाज से स्क्रीनिंग करता है। एआई चेस्ट एक्सरे में टीबी या दूसरी असामान्यता की पहचान होती है। - देश में कितने हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटल नेटवर्क से लिंक हैं?
122 करोड 95 लाख से ज्यादा हेल्थ रिकॉर्ड लिंक हैं। रिपोर्ट में आभा खातों की संख्या 98 करोड 16 लाख से ज्यादा बताई गई है। पंजीकृत हेल्थ फैसिलिटी की संख्या 5 लाख 86 हजार 903 है।
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