एम्स दिल्ली डॉक्टरों का कमाल, 14 दिनों में 49 kg वजन घटाकर मरीज को दी नई जिंदगी
Kaushiki | Aug 07, 2026, 13:55 IST
AIIMS Delhi Bariatric Surgery
दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने 209 किलो के मरीज की सफल बैरिएट्रिक सर्जरी की। 32 साल के विवेक का वजन 14 दिनों में 49 किलो कम हुआ। सांस की गंभीर बीमारी स्लीप एपनिया से भी राहत मिली। मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है।
AIIMS Delhi Bariatric Surgery: सोचिए, जब सांस लेना ही जिंदगी की सबसे बड़ी चुनौती बन जाए, तब कैसा महसूस होता होगा? 32 साल के विवेक के लिए हर दिन एक नया संघर्ष था। उनका वजन 209 किलो तक पहुंच चुका था। एक्सेसिव वेट की वजह से उनका शरीर बीमारियों का घर बन गया था। उनकी सांसें चलाने के लिए हर रात मशीन का सहारा लेना पड़ता था। परिवार की उम्मीदें धीरे-धीरे टूट रही थीं।
ऐसे मुश्किल वक्त में विवेक दिल्ली एम्स पहुंचे। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर रिमार्केबल मिसाल पेश कर दिया है। डॉक्टरों ने दिन-रात एक करके एक स्पेशल ट्रीटमेंट प्लान बनाया। फिर 32 दिनों तक सख्त डाइट और मेडिकल केयर दी गई। इसके बाद एक जटिल बैरिएट्रिक सर्जरी की गई।
महज 14 दिनों के भीतर विवेक का वजन 49 किलो घट गया। उनका वजन 209 किलो से गिरकर सीधे 160 किलो पर आ गया। एम्स के डॉक्टरों की इस लगन और सफलता ने लाखों बीमार लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी है।
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विवेक जब इलाज के लिए एम्स आए, तो उनका वजन 209 किलो था। उनका BMI (Body Mass Index) 74 था, जो बेहद खतरनाक स्टेज माना जाता है। उन्हें हाई ब्लड प्रेशर और प्री-डायबिटीज जैसी कई बीमारियां थीं।
जोड़ों का दर्द और डिप्रेशन भी उनके जीवन को प्रभावित कर रहा था। सबसे खतरनाक समस्या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) की थी। सोते समय उनके गले की सांस की नली बार-बार बंद हो जाती थी।
शरीर में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता था। रात में सांस लेने के लिए सीपैप मशीन की जरूरत पड़ती थी। मोटापे ने उनके शरीर के लगभग हर अंग को कमजोर कर दिया था। उनके दिल और फेफड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा था।
मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने स्पेशल स्ट्रेटेजी बनाई। एम्स में कई विभागों के डॉक्टरों की एक संयुक्त टीम बनी। इसमें सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, फिजिशियन और डाइटिशियन शामिल थे।
विवेक को लगातार 32 दिनों तक सख्त डाइट प्लान पर रखा गया। उन्हें वेरी लो कैलोरी डाइट (VLCD) दी गई। साथ ही सांस की एक्सरसाइज और ब्लड प्रेशर पर लगातार नजर रखी गई। मरीज का पेट इतना बड़ा था कि सामान्य टेबल पर लिटाना नामुमकिन था।
इसलिए बेड पर ही इमरजेंसी ट्रेकियोस्टॉमी सर्जरी करनी पड़ी। गले में छोटा छेद करके सांस की नली सीधे अंदर डाली गई। 32 दिनों की इस कठिन तैयारी ने मरीज का जीवन सुरक्षित किया।
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सफल तैयारियों के बाद डॉक्टरों ने बैरिएट्रिक सर्जरी करने का फैसला लिया। विवेक की वन एनास्टोमोसिस गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी की गई। 24 जुलाई 2026 को एम्स के डॉक्टरों ने यह जटिल ऑपरेशन किया। सर्जरी के बाद चमत्कारिक परिणाम देखने को मिले।
महज 14 दिनों के भीतर विवेक का वजन 49 किलो कम हो गया। उनका वजन 209 किलो से घटकर 160 किलो पर आ गया। उनके पेट का घेरा 198 सेंटीमीटर से घटकर 155 सेंटीमीटर रह गया।
06 अगस्त 2026 को विवेक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब उनकी सांस लेने की पुरानी समस्या भी पूरी तरह ठीक हो चुकी है। वह बिना किसी मशीन के आसानी से सांस ले रहे हैं।
प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ मारूति पाल ने इस सर्जरी के बारे में बताया। यह सर्जरी पेट का आकार छोटा करने के लिए की जाती है। इससे मरीज बहुत कम मात्रा में खाना खा पाता है। शरीर में कैलोरी का अवशोषण भी काफी कम हो जाता है। इसका मकसद केवल वजन घटाना नहीं, बल्कि बीमारियों को रोकना भी है।
इससे डायबिटीज, हाई बीपी और स्लीप एपनिया में सुधार होता है। एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक जीवन रक्षक सर्जरी (surgery) है। सही समय पर सर्जरी मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
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यह सफलता किसी एक डॉक्टर की नहीं, पूरी टीम की मेहनत है। सर्जिकल टीम (मोटापे से जुड़ी बीमारियों का इलाज) ने ऑपरेशन की पूरी जिम्मेदारी बहुत बखूबी निभाई। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों ने मरीज की धड़कन और सांस पर नजर रखी।
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नवल विक्रम ने संक्रमण के खतरे को संभाला। डाइटिशियन ने न्यूट्रिशन और खान-पान का पूरा ध्यान रखा। हर एक विभाग ने मिलकर इस असंभव काम को संभव बनाया।
विवेक अब बिल्कुल स्वस्थ हैं और अपने घर लौट चुके हैं। डॉक्टरों की टीम आगे भी उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखेगी। यह मामला मेडिकल साइंस की तरक्की और डॉक्टरों के समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। इससे देश के लाखों मरीजों को नई उम्मीद मिली है। मोटापा
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ऐसे मुश्किल वक्त में विवेक दिल्ली एम्स पहुंचे। दिल्ली एम्स के डॉक्टरों ने एक बार फिर रिमार्केबल मिसाल पेश कर दिया है। डॉक्टरों ने दिन-रात एक करके एक स्पेशल ट्रीटमेंट प्लान बनाया। फिर 32 दिनों तक सख्त डाइट और मेडिकल केयर दी गई। इसके बाद एक जटिल बैरिएट्रिक सर्जरी की गई।
महज 14 दिनों के भीतर विवेक का वजन 49 किलो घट गया। उनका वजन 209 किलो से गिरकर सीधे 160 किलो पर आ गया। एम्स के डॉक्टरों की इस लगन और सफलता ने लाखों बीमार लोगों के दिलों में एक नई उम्मीद जगा दी है।
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अत्यधिक वजन और बीमारियों का गंभीर चक्र
जोड़ों का दर्द और डिप्रेशन भी उनके जीवन को प्रभावित कर रहा था। सबसे खतरनाक समस्या ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) की थी। सोते समय उनके गले की सांस की नली बार-बार बंद हो जाती थी।
शरीर में ऑक्सीजन का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता था। रात में सांस लेने के लिए सीपैप मशीन की जरूरत पड़ती थी। मोटापे ने उनके शरीर के लगभग हर अंग को कमजोर कर दिया था। उनके दिल और फेफड़ों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ रहा था।
सर्जरी से पहले की कठिन तैयारियां
विवेक को लगातार 32 दिनों तक सख्त डाइट प्लान पर रखा गया। उन्हें वेरी लो कैलोरी डाइट (VLCD) दी गई। साथ ही सांस की एक्सरसाइज और ब्लड प्रेशर पर लगातार नजर रखी गई। मरीज का पेट इतना बड़ा था कि सामान्य टेबल पर लिटाना नामुमकिन था।
इसलिए बेड पर ही इमरजेंसी ट्रेकियोस्टॉमी सर्जरी करनी पड़ी। गले में छोटा छेद करके सांस की नली सीधे अंदर डाली गई। 32 दिनों की इस कठिन तैयारी ने मरीज का जीवन सुरक्षित किया।
AIIMS Delhi Bariatric Surgery
बैरिएट्रिक सर्जरी और वजन का घटना
महज 14 दिनों के भीतर विवेक का वजन 49 किलो कम हो गया। उनका वजन 209 किलो से घटकर 160 किलो पर आ गया। उनके पेट का घेरा 198 सेंटीमीटर से घटकर 155 सेंटीमीटर रह गया।
06 अगस्त 2026 को विवेक को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब उनकी सांस लेने की पुरानी समस्या भी पूरी तरह ठीक हो चुकी है। वह बिना किसी मशीन के आसानी से सांस ले रहे हैं।
बैरिएट्रिक सर्जरी क्या होती है
इससे डायबिटीज, हाई बीपी और स्लीप एपनिया में सुधार होता है। एम्स दिल्ली (AIIMS Delhi) के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक जीवन रक्षक सर्जरी (surgery) है। सही समय पर सर्जरी मिलने से मरीज सामान्य जीवन जी सकता है।
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एम्स की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की सफलता
मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. नवल विक्रम ने संक्रमण के खतरे को संभाला। डाइटिशियन ने न्यूट्रिशन और खान-पान का पूरा ध्यान रखा। हर एक विभाग ने मिलकर इस असंभव काम को संभव बनाया।
विवेक अब बिल्कुल स्वस्थ हैं और अपने घर लौट चुके हैं। डॉक्टरों की टीम आगे भी उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखेगी। यह मामला मेडिकल साइंस की तरक्की और डॉक्टरों के समर्पण का अद्भुत उदाहरण है। इससे देश के लाखों मरीजों को नई उम्मीद मिली है। मोटापा
FAQ
- दिल्ली एम्स में मरीज का वजन 14 दिनों में कितना कम हुआ?
दिल्ली एम्स में बैरिएट्रिक सर्जरी के बाद 209 किलो के मरीज विवेक का वजन महज 14 दिनों में 49 किलो घटकर 160 किलोग्राम रह गया। - बैरिएट्रिक सर्जरी (OAGB) क्या होती है और इसके क्या फायदे हैं?
बैरिएट्रिक सर्जरी वजन घटाने की एक मेडिकल प्रक्रिया है। यह पेट का आकार छोटा करती है, जिससे वजन घटने के साथ डायबिटीज, बीपी और स्लीप एपनिया में भी सुधार होता है। - ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (OSA) बीमारी क्या है?
ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया एक गंभीर बीमारी है जिसमें सोते समय गले का रास्ता बंद हो जाता है और सांस रुकने लगती है। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिर जाती है।
स्टेरॉयड से पुरुषों में बढ़ रहे महिलाओं जैसे ब्रेस्ट, सर्जरी कराने को हो रहे मजबूर
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