अमिताभ बच्चन के नाम पर कमाई करने वालों को झटका! अब बिना इजाजत आवाज और तस्वीर का नहीं कर सकेंगे इस्तेमाल
Kaushiki | Nov 07, 2026, 14:28 IST
बिग बी के नाम, चेहरे और आवाज की नकल से कमाई पर रोक, दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर और आवाज के बिना अनुमति इस्तेमाल को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कई लोगों और कंपनियों को उनकी पहचान का कमर्शियल यूज करने से रोक दिया है। जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 5 नवंबर को यह आदेश दिया।
अमिताभ बच्चन ने शिकायत की थी कि कुछ लोग उनके नाम, चेहरे और आवाज का इस्तेमाल करके पैसा कमा रहे हैं। उन्होंने अदालत से इस पर रोक लगाने और हर्जाने की मांग की थी। यह मामला Personality Rights और Publicity Rights से जुड़ा है। आइए इस पूरे विवाद को जानें।
अमिताभ बच्चन ने कई व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था। उनका आरोप था कि कुछ लोग उनकी पॉपुलैरिटी का फायदा उठाकर उनके नाम, तस्वीर और आवाज का बिना अनुमति इस्तेमाल कर रहे हैं। मुकदमे में कई तरह के कथित उल्लंघनों का जिक्र किया गया था।
इनमें अमिताभ बच्चन वीडियो कॉल नाम का एक मोबाइल एप्लिकेशन शामिल था। इसके अलावा व्हाट्सएप पर कौन बनेगा करोड़पति के नाम से लॉटरी से जुड़े संदेश भेजे जाने का भी मामला सामने आया था।
कुछ लोगों पर अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगाकर सामान्य ज्ञान (GK) की किताबें बेचने का आरोप था। वहीं, उनकी तस्वीरों वाली टी-शर्ट और पोस्टर भी बेचे जा रहे थे। इसके अलावा कुछ वेबसाइटों के डोमेन नाम में अमिताभ बच्चन का नाम इस्तेमाल किया गया था।
इन वेबसाइटों के डोमेन रजिस्टर कराने वालों को भी मुकदमे में प्रतिवादी बनाया गया था। अमिताभ बच्चन का कहना था कि उनकी अनुमति के बिना इस तरह उनकी पहचान का Commercial use करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके नाम, फोटो और आवाज के बिना इजाजत व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह फैसला चार पक्षकारों के खिलाफ सुनाया है। इन चारों ने अमिताभ बच्चन के साथ आपसी सहमति से विवाद सुलझा लिया था।
समझौते में चारों ने माना कि अमिताभ बच्चन को अपने नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़ी दूसरी चीजों पर अधिकार हैं। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आगे से अमिताभ बच्चन की लिखित या स्पष्ट अनुमति (Explicit permission) के बिना उनकी पहचान का इस्तेमाल पैसा कमाने या किसी कारोबार के प्रचार के लिए नहीं करेंगे।
इस मामले में प्रतिवादी नंबर 2, 4, 6 और 9 अदालत में पेश नहीं हुए थे। कोर्ट के मुताबिक, इन Defendants को समन भेजा गया था। इसके बावजूद उन्होंने न तो अदालत में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और न ही लिखित जवाब दाखिल किया।
इसके बाद अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 8 नियम 10 के तहत उनके खिलाफ फैसला सुनाया। हालांकि, जस्टिस कौरव ने साफ किया कि केवल जवाब दाखिल नहीं करने के आधार पर बिना विचार किए फैसला नहीं सुनाया जा सकता। कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद पाया कि ऐसा कोई Significant factual disputes नहीं है, जिसके लिए पूरे ट्रायल की जरूरत हो।
दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के मामले में अज्ञात उल्लंघनकर्ताओं (Unknown violators) यानी 'जॉन डो' के खिलाफ भी आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि वेबसाइटों, ऐप और सोशल मीडिया के जरिए उनकी पहचान का दुरुपयोग हो रहा था। दरअसल, इंटरनेट पर कई बार किसी व्यक्ति की तस्वीर, आवाज या पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों की पहचान तुरंत नहीं हो पाती।
कोर्ट के मुताबिक, समझौता बिना किसी दबाव के हुआ था। इसे CPC के आदेश 23 नियम 3 के तहत कानूनी मान्यता दी गई। सरल भाषा में इसका मतलब है कि समझौते की शर्तों को अदालत के औपचारिक आदेश का दर्जा दे दिया गया। इससे समझौते की शर्तें कानूनी रूप से लागू की जा सकती हैं।
Personality Rights का मतलब किसी व्यक्ति की पहचान से जुड़े अधिकारों से है। आसान भाषा में कहें तो किसी व्यक्ति का नाम, चेहरा, आवाज, तस्वीर और उसकी पहचान से जुड़ी दूसरी खास बातें उसके व्यक्तित्व का हिस्सा होती हैं। जब किसी मशहूर व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल विज्ञापन, प्रोडक्ट बेचने या बिजनेस-रिलेटेड टास्क में किया जाता है, तो उसकी अनुमति का सवाल जरूरी हो जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी बिना अनुमति अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगाकर कोई सामान बेचती है और इससे ऐसा लगता है कि अभिनेता उस सामान का प्रचार कर रहे हैं, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। इस मामले में अदालत ने माना कि अमिताभ की सहमति के बिना उनके नाम और तस्वीर का कमर्शियल यूज लोगों को ये गलत मैसेज दे सकता है कि एक्टर उस प्रोडक्ट का समर्थन कर रहे हैं।
यह मामला सिर्फ एक सुपरस्टार का नहीं है। यह हर उस व्यक्ति के लिए जरूरी है जिसका नाम या चेहरा इंटरनेट पर इस्तेमाल हो सकता है। अपनी पहचान की सुरक्षा का कानूनी रास्ता समझना सबके लिए उपयोगी है। साथ ही फर्जी ऐप और लॉटरी जैसे झांसों से बचने की जागरूकता भी जरूरी है।
FAQs:
क्या है अमिताभ बच्चन का पूरा मामला?
इनमें अमिताभ बच्चन वीडियो कॉल नाम का एक मोबाइल एप्लिकेशन शामिल था। इसके अलावा व्हाट्सएप पर कौन बनेगा करोड़पति के नाम से लॉटरी से जुड़े संदेश भेजे जाने का भी मामला सामने आया था।
कुछ लोगों पर अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगाकर सामान्य ज्ञान (GK) की किताबें बेचने का आरोप था। वहीं, उनकी तस्वीरों वाली टी-शर्ट और पोस्टर भी बेचे जा रहे थे। इसके अलावा कुछ वेबसाइटों के डोमेन नाम में अमिताभ बच्चन का नाम इस्तेमाल किया गया था।
इन वेबसाइटों के डोमेन रजिस्टर कराने वालों को भी मुकदमे में प्रतिवादी बनाया गया था। अमिताभ बच्चन का कहना था कि उनकी अनुमति के बिना इस तरह उनकी पहचान का Commercial use करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
समझौते में चारों ने माना कि अमिताभ बच्चन को अपने नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़ी दूसरी चीजों पर अधिकार हैं। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि आगे से अमिताभ बच्चन की लिखित या स्पष्ट अनुमति (Explicit permission) के बिना उनकी पहचान का इस्तेमाल पैसा कमाने या किसी कारोबार के प्रचार के लिए नहीं करेंगे।
कोर्ट में पेश नहीं हुए चार प्रतिवादी
इसके बाद अदालत ने सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 8 नियम 10 के तहत उनके खिलाफ फैसला सुनाया। हालांकि, जस्टिस कौरव ने साफ किया कि केवल जवाब दाखिल नहीं करने के आधार पर बिना विचार किए फैसला नहीं सुनाया जा सकता। कोर्ट ने मामले के तथ्यों पर विचार करने के बाद पाया कि ऐसा कोई Significant factual disputes नहीं है, जिसके लिए पूरे ट्रायल की जरूरत हो।
अदालत ने जॉन डो के खिलाफ भी दिया आदेश
कोर्ट के मुताबिक, समझौता बिना किसी दबाव के हुआ था। इसे CPC के आदेश 23 नियम 3 के तहत कानूनी मान्यता दी गई। सरल भाषा में इसका मतलब है कि समझौते की शर्तों को अदालत के औपचारिक आदेश का दर्जा दे दिया गया। इससे समझौते की शर्तें कानूनी रूप से लागू की जा सकती हैं।
क्या होते हैं Personality Rights
उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी बिना अनुमति अमिताभ बच्चन की तस्वीर लगाकर कोई सामान बेचती है और इससे ऐसा लगता है कि अभिनेता उस सामान का प्रचार कर रहे हैं, तो यह उनके अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है। इस मामले में अदालत ने माना कि अमिताभ की सहमति के बिना उनके नाम और तस्वीर का कमर्शियल यूज लोगों को ये गलत मैसेज दे सकता है कि एक्टर उस प्रोडक्ट का समर्थन कर रहे हैं।
यह खबर क्यों जरूरी है
FAQs:
- अमिताभ बच्चन का पर्सनैलिटी राइट्स मुकदमा किस अदालत में है?
यह मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट में है। मामला Amitabh Bachchan v. Rajat Nagi & Ors. के नाम से चल रहा है। - Personality Rights का क्या मतलब है?
Personality Rights किसी व्यक्ति के नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान से जुड़े अधिकारों को कहा जाता है। इनका उद्देश्य व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल से सुरक्षा देना है। - दिल्ली हाईकोर्ट ने अमिताभ बच्चन के मामले में क्या फैसला सुनाया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने कई प्रतिवादियों को अमिताभ बच्चन के नाम, तस्वीर, आवाज और व्यक्तित्व से जुड़े अन्य पहलुओं का उनकी अनुमति के बिना व्यावसायिक इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
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