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सोशल मीडिया आज युवाओं की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। यह जानकारी और मनोरंजन पाने का एक बड़ा जरिया है, लेकिन बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। सोशल मीडिया के गलत प्रभावों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
आंध्र प्रदेश की नायडू सरकार अब बड़ा फैसला ले सकती है। राज्य सरकार बच्चों के लिए कड़े नियम बनाने पर विचार करेगी। आईटी मंत्री नारा लोकेश ने इस बारे में संकेत दिए हैं। आंध्र प्रदेश बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगा सकता है। सरकार इस मामले में ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपना सकती है।
ऑस्ट्रेलिया का 'बैन मॉडल'
ऑस्ट्रेलिया ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगा दी है। अब वहां 16 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया नहीं चलाएंगे। ऑस्ट्रेलिया दुनिया का ऐसा पहला देश बन गया है जिसने यह कदम उठाया।
इस बड़े फैसले की चर्चा अब पूरी दुनिया (देश दुनिया न्यूज) में बहुत तेजी से हो रही है। दावोस में 'वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम' की एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के दौरान नारा लोकेश ने अपनी बात को रखा था। उन्होंने कहा कि वे ऑस्ट्रेलियाई कानून का बहुत बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं।
क्यों जरूरी है यह प्रतिबंध?
मंत्री नारा लोकेश के अनुसार, सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री (Content) अक्सर बच्चों की समझ और परिपक्वता से परे होती है। उन्होंने कहा कि-
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बच्चों के कोमल मन पर भ्रामक सूचनाओं और साइबर (Cyber ​​security) खतरों का बुरा असर पड़ता है।
निश्चित उम्र तक बच्चों को इन प्लेटफॉर्म्स से दूर रखना उनके सर्वांगीण विकास (Overall Development) के लिए आवश्यक है।
एक सख्त कानून (Strict Law) की मदद से बच्चों को डिजिटल लत से बचाया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन
ऑस्ट्रेलिया में अब बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन नियम आ गया है। यह नया कानून 10 दिसंबर 2025 से लागू हो चुका है। बच्चों को अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से दूर रखा जाएगा। टिकटॉक और इंस्टाग्राम जैसे ऐप्स पर पूरी तरह रोक है। फेसबुक और यूट्यूब का इस्तेमाल भी अब बच्चे नहीं करेंगे। नियमों को तोड़ने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नियमों के उल्लंघन पर 33 करोड़ रुपये तक का दंड मिलेगा। यह जुर्माना लगभग 50 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के बराबर है। ऑस्ट्रेलिया सरकार बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बहुत गंभीर है।
भारत में वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, भारत में बच्चों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर कोई केंद्रीय या राज्य स्तरीय प्रतिबंध लागू नहीं है। यह पूरी तरह से अभिभावकों के विवेक (Parental Consent) पर निर्भर करता है। हालांकि, भारत सरकार का 'डिजिटल इंडिया' विजन और 'डाटा प्रोटेक्शन लॉ' भविष्य में इस दिशा में कुछ कड़े कदम उठा सकता है। आंध्र प्रदेश अगर इसे लागू करता है, तो यह देश का पहला ऐसा राज्य होगा जो बच्चों की डिजिटल सुरक्षा (Digital Safety) के लिए इतना बड़ा कदम उठाएगा।
2047 का लक्ष्य और आर्थिक विजन
नारा लोकेश ने केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आर्थिक प्रगति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश का लक्ष्य 2047 तक 2.4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (Economy) बनना है। इसके लिए युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा में मोड़ना और उन्हें डिजिटल खतरों से बचाकर उत्पादक बनाना अनिवार्य है।
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