मुंबई का ऑटो ड्राइवर बिना ऑटो चलाए हर माह कमाता है 8 लाख, बिजनेस जानकर हो जाएंगे हैरान
Reena Sharma Vijayvargiya | Jun 06, 2025, 08:49 IST
The sootr
सोचिए, एक ऑटो ड्राइवर की कमाई क्या हो सकती है? 50 हजार? 1 लाख? ज्यादा हुआ तो 2 लाख? पर अगर कहें कि एक ऑटो वाले भैया हर महीने 5 से 8 लाख रुपए कमा रहे हैं, मुंबई का ये ऑटो वाला खुद ही ब्रांड बन चुका है। यकीन नहीं हो रहा? जानिए पूरी कहानी।
क्या आपने कभी सोचा है कि एक ऑटो ड्राइवर बिना ऑटो चलाए लाखों कमा सकता है...? मुंबई के एक साधारण दिखने वाले ऑटो ड्राइवर ने ऐसा ही एक बिजनेस मॉडल खड़ा किया है, जिसे देखकर एमबीए वाले भी चौंक जाते हैं। वह भी बिना किसी ऐप, फंडिंग या डिजिटल प्लेटफॉर्म के ये ऑटो ड्राइवर रोजाना 20 से 30 हजार रुपए तक की कमाई कर रहा है यानी इसका महीने का टर्नओवर 5 से 8 लाख रुपए तक है।
यह किस्सा लेंसकार्ट के प्रोडक्ट लीडर राहुल रुपानी ने लिंक्डइन पर साझा किया। राहुल अमेरिका के वीज़ा इंटरव्यू के लिए मुंबई स्थित वाणिज्य दूतावास पहुंचे थे। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें बताया कि बैग अंदर नहीं ले जा सकते और वहां कोई लॉकर की सुविधा भी नहीं थी। वो असमंजस में खड़े थे तभी एक ऑटो ड्राइवर ने पास आकर कहा :— "सर, बैग दे दीजिए। सुरक्षित रखूंगा। रोज का काम है। चार्ज 1000 है।" शुरुआत में यह ऑफर अजीब लगा, पर मजबूरी में राहुल ने बैग दे दिया और यहीं से खुला इस अनोखे बिजनेस का राज। खबर यह भी : OLA ऑटो ड्राइवर की शर्मनाक हरकत, बाथरूम करने के बहाने महिला को दिखाया प्राइवेट पार्ट ऑटो ड्राइवर रोज़ अस काउंसलेट (US Consulate) के बाहर खड़ा रहता है और जो लोग बैग लेकर अंदर नहीं जा सकते, उनसे 1000 प्रति बैग चार्ज करता है। रोज़ाना 20-30 ग्राहक इस सेवा का लाभ लेते हैं जिससे ऑटो ड्राइवर 20 से 30 हजार रुपए रोज कमा लेता है जो माह का करीब 5 से 8 लाख होता है। खबर यह भी : मलाइका के ऑटो ड्राइवर के साथ सेल्फी नहीं लेने पर नेटिजेन्स ने सुनाई खरी-खोटी,बोले-जिनसे इनका घर चलता उन्हें ही एटिड्यूड दिखाते है ड्राइवर खुद बैग को ऑटो में नहीं रखता। राहुल के मुताबिक, उसने स्थानीय पुलिस अफसर से साझेदारी कर पास के इलाके में एक सुरक्षित लॉकर स्पेस का इंतज़ाम किया है। ऑटो सिर्फ एक "कलेक्शन प्वाइंट" है। ग्राहक को भरोसा दिलाने के लिए ऑटो वहीं रहता है। बैग वहां से लॉकर में शिफ्ट हो जाते हैं और एकदम सुरक्षित और वैध व्यवस्था। खबर यह भी : उज्जैन में 12 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाला ऑटो ड्राइवर भरत सोनी गिरफ्तार, मुठभेड़ में घायल हुआ आरोपी यह कोई तुक्का या तात्कालिक जुगाड़ नहीं है। यह सोच-समझकर बनाया गया पैसिव इनकम मॉडल है। बिना किसी डिग्री, बिना किसी टेक्नोलॉजी, सिर्फ मौके की नब्ज पहचानकर इस शख्स ने कमाई का रास्ता खोज निकाला है। खबर यह भी : पूर्व जनपद सीईओ युक्ति शर्मा का कारनामा, तबादला हुआ तो सरकारी सामान ऑटो में लादकर ले गईं जहां अधिकतर लोग ऑटो चलाकर 20-30 हजार महीने की उम्मीद करते हैं, वहीं यह ऑटो ड्राइवर अपनी सूझबूझ और भरोसे की वजह से उन पेशेवरों से ज़्यादा कमाई कर रहा है जो बड़े कॉर्पोरेट्स में काम कर रहे हैं। सर्विस
कहानी की शुरुआत - वीज़ा काउंसलेट के बाहर एक ऑफर
कैसे करता है कमाल का काम?
बिजनेस मॉडल - ऑटो नहीं, भरोसे का पुल है
जुगाड़ नहीं, पूरी स्ट्रैटेजी है का है यह काम
सोच बदल देने वाली सच्ची कहानी
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