अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला: बोले- दुखी मन से लौट रहा हूं
Sanjay Dhiman | Jan 28, 2026, 23:50 IST
Photograph: (the sootr)
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अपमान का आरोप लगाते हुए प्रयागराज माघ मेला छोड़ दिया है। उन्होंने प्रशासन के प्रस्ताव को ठुकरा कर बिना स्नान काशी वापसी की।
NEWS IN SHORT
- स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने माघ मेला छोड़ा, कहा- बिना स्नान दुखी मन से लौट रहे हैं।
- प्रशासन से विवाद के कारण स्वामी ने प्रस्ताव को ठुकरा दिया, सम्मान की मांग की।
- स्वामी ने कहा- घटना ने आत्मा को झकझोर दिया, राज्य सरकार जिम्मेदार है।
- स्वामी ने माफी की मांग की, जब तक गलती नहीं मानी जाएगी, प्रस्ताव स्वीकार नहीं करेंगे।
- स्वामी ने कहा- सनातनी समाज तय करेगा कि किसकी जीत हुई और कौन हारेगा।
NEWS IN DETAIL
यह कोई छोटी बात नहीं है कि एक शंकराचार्य जैसा बड़ा संत कुंभ और माघ मेले की परंपरा को बीच में तोड़कर वापस जा रहा हो। शंकराचार्य ने साफ कहा कि उन्होंने श्रद्धा के साथ इस मेले में कदम रखा था, लेकिन यहां उनके साथ जो हुआ, उसकी उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने कहा कि सनातनी प्रतीकों का अपमान करने वालों को अब उनकी औकात दिखानी होगी।
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प्रशासन का 'पालकी ऑफर' और महाराज का जवाब
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्पष्ट किया कि जब दिल में गहरा घाव हो और मन में गुस्सा भरा हो, तो संगम का पवित्र पानी भी शांति नहीं दे सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर मौनी अमावस्या के दिन पालकी से स्नान करना गलत था, तो अचानक प्रशासन के लिए आज यह सही कैसे हो गया? यह सब केवल एक दिखावा है ताकि असल मुद्दे को दबाया जा सके।
11 दिनों का संघर्ष और आत्मसम्मान की लड़ाई
महाराज जी ने कहा कि असली सम्मान तब होता जब प्रशासन अपनी गलती मानता। अगर वह इस दिखावटी सम्मान को स्वीकार कर लेते, तो उनके उन भक्तों का अपमान हो जाता जिन्होंने उनके लिए लाठियां खाईं और संघर्ष किया। उन्होंने युवाओं से अपील की है कि वे सनातन धर्म के प्रतीकों का अपमान करने वालों के खिलाफ खड़े हों। अब यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट भी पहुंच चुका है, जहां इसकी सीबीआई जांच की मांग की जा रही है।
माघ मेले से पहले विदाई: क्या होगा आगे?
यह लड़ाई अब केवल एक स्नान की नहीं, बल्कि संतों के सम्मान और सरकारी तंत्र के व्यवहार की बन गई है। शंकराचार्य का कहना है कि सनातनी समाज ही अब फैसला करेगा कि किसकी जीत हुई और किसकी हार। उन्होंने साफ कर दिया है कि वह इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और आंदोलन की राह पकड़ेंगे।
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शंकराचार्य की 4 बड़ी बातें...
- आत्मा को झकझोर दिया: स्वामी ने कहा कि इस घटना ने उनकी आत्मा को गहरे स्तर पर आहत किया और यह उनके विश्वास को कमजोर करता है।
- माफी का अभाव: स्वामी ने कहा कि माघ मेला प्रशासन ने माफी नहीं मांगी और जब तक वे अपनी गलती स्वीकार नहीं करते, तब तक कोई सम्मान स्वीकार नहीं किया जा सकता।
- समय बताएगा कौन जीतेगा: स्वामी ने कहा कि अब समय ही बताएगा कि इस मामले में किसकी जीत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले पालकी से स्नान कराना गलत था, तो अब वही बात सही कैसे हो सकती है?
- सनातनी समाज का फैसला: स्वामी ने कहा कि अगर सनातनी समाज चाहता है, तो वे आंदोलन करेंगे और अपने सम्मान की रक्षा करेंगे।
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