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Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को दूसरा नोटिस भेजा, बैरियर तोड़ने और बग्घी घुसाने को लेकर सवाल।
- प्रशासन ने चेतावनी दी, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर माघ मेले से बैन कर दिया जाएगा।
- अविमुक्तेश्वरानंद ने जवाब दिया, कहा मौनी अमावस्या का स्नान पहले करेंगे, फिर बसंत स्नान।
- योगी आदित्यनाथ ने कहा, धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश हो रही है।
- 18 जनवरी को पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद को रोकने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई, संत धरने पर बैठे।
NEWS IN DETAIL
Prayagraj. प्रयागराज माघ मेला प्रशासन और संत अविमुक्तेश्वरानंद के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को दोबारा नोटिस भेजा है। यह नोटिस खासकर मौनी अमावस्या के दिन बैरियर तोड़ने और बग्घी को जबरन भीड़ में घुसाने को लेकर है।
प्रशासन ने पूछा है कि क्यों न उन्हें हमेशा के लिए माघ मेला से बैन कर दिया जाए। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि अगर संत संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो उन्हें दी गई जमीन और सुविधाएं वापस ले ली जाएंगी।
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नोटिस का जवाब: संत ने प्रशासन को क्या कहा?
अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज ने कहा कि प्रशासन ने बुधवार शाम को नोटिस चस्पा किया था। इस नोटिस में 18 जनवरी की तारीख थी। संत ने गुरुवार को इस नोटिस का जवाब 3 पन्नों में भेजा। संत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि प्रशासन नोटिस का खेल खेल रहा है। उन्होंने कहा, "मेरा मौनी अमावस्या का स्नान अभी बाकी है। पहले मैं वही स्नान करूंगा, फिर बसंत स्नान करूंगा।"
योगी आदित्यनाथ का बयान: 'धर्म की आड़ में साजिश'
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले पर बयान दिया। उन्होंने बिना अविमुक्तेश्वरानंद का नाम लिए कहा, "किसी को भी परंपरा बाधित करने का हक नहीं है।" उन्होंने कहा कि कई लोग धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं। योगी ने आगे कहा कि हमें ऐसे लोगों से सतर्क रहना होगा। संतों के लिए धर्म और राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता है।
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मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था?
18 जनवरी को माघ मेले के दौरान अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पैदल चलने को कहा। इस पर संत ने विरोध किया और उनके शिष्यों से धक्का-मुक्की हो गई। इस घटना से नाराज होकर अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
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