बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने SC में लगाई गुहार, बोले दोबारा नहीं होगी ऐसी गलती, पेशी से पहले फिर मांगी माफी
Sandeep Kumar | Apr 10, 2024, 10:21 IST
एलोपैथी के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन मामले में SC में आज सुनवाई
अपने हलफनामे में रामदेव ने कहा मैं विज्ञापनों के संबंध में बिना शर्त माफी मांगता हूं। मुझे इस गलती पर गहरा अफसोस है और मैं अदालत को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इसे दोहराया नहीं जाएगा। आपको बताते चलें कि आज इस मामले में SC में फिर सुनवाई है।
NEW DELHI. एलोपैथी के खिलाफ भ्रामक विज्ञापन मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले योगगुरु बाबा रामदेव ( Baba Ramdev ) और आचार्य बालकृष्ण ( Acharya Balkrishna ) ने हलफनामा दाखिल किया है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार यानी आज फिर से मामले की सुनवाई करेगा। सुनवाई के पहले रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने बिना शर्त माफी मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल दो अलग-अलग हलफनामों में शीर्ष अदालत के आदेश में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए बिना शर्त माफी मांगी है।
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न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला की पीठ बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करने वाली है। दो अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण की माफी को कोरी बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया। पीठ ने अपने औषधीय उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में पतंजलि के बड़े-बड़े दावों और कोविड महामारी के चरम दौर में एलोपैथी को बदनाम करने पर केंद्र की कथित निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि सरकार ने क्यों अपनी आंखें मूंदे रखीं ?
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शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में रामदेव ने कहा है मैं विज्ञापनों के संबंध में बिना शर्त माफी मांगता हूं। मुझे इस गलती पर गहरा अफसोस है और मैं अदालत को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इसे दोहराया नहीं जाएगा। रामदेव ने हलफनामे में कहा है। मैं इस अदालत के 21 नवंबर 2023 के आदेश के पैरा तीन में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए बिना शर्त माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि बयान का पूरी तरह से अनुपालन किया जाएगा और इस तरह का कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
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रामदेव ने पिछले साल 22 नवंबर को आयोजित संवाददाता सम्मेलन के लिए भी बिना शर्त माफी मांगी और कोई भी सार्वजनिक बयान नहीं देने का आश्वासन दिया, जो अदालत के समक्ष दिए गए वचन का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने कहा मुझे इस चूक पर खेद है और आश्वासन देता हूं कि भविष्य में इसे नहीं दोहराया जाएगा। रामदेव ने कहा मैं कथन के उल्लंघन के लिए क्षमा चाहता हूं। मैं हमेशा कानून का पालन करने का वचन देता हूं।
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आचार्य बालकृष्ण ने भी शीर्ष अदालत के पिछले साल 21 नवंबर के आदेश में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा मुझे प्रतिवादी संख्या पांच ( पतंजलि ) की ओर से विज्ञापन जारी करने पर गहरा खेद है, जो 21 नवंबर, 2023 के आदेश का उल्लंघन है। मैं इस संबंध में अपनी और प्रतिवादी संख्या पांच की ओर से बिना शर्त माफी मांगता हूं। बालकृष्ण ने अपने हलफनामे में कहा अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने का मेरा कभी कोई इरादा नहीं था। मैं वचन देता हूं कि भविष्य में ऐसी कोई चूक नहीं होगी। मैं हमेशा कानून की महिमा को बनाए रखूंगा।
सुप्रीम ने बालकृष्ण के इस बयान को भी खारिज कर दिया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री ( जादुई उपचार) अधिनियम पुराना है और कहा कि पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापन अधिनियम के दायरे में हैं और अदालत से किए गए वादे का उल्लंघन करते हैं।शीर्ष अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए ) द्वारा टीकाकरण अभियान और आधुनिक दवाओं के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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आज सुप्रीम कोर्ट में होनी है सुनवाई
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला की पीठ बुधवार को इस मामले पर सुनवाई करने वाली है। दो अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट ने रामदेव और बालकृष्ण की माफी को कोरी बयानबाजी कहकर खारिज कर दिया। पीठ ने अपने औषधीय उत्पादों की प्रभावकारिता के बारे में पतंजलि के बड़े-बड़े दावों और कोविड महामारी के चरम दौर में एलोपैथी को बदनाम करने पर केंद्र की कथित निष्क्रियता पर भी सवाल उठाया और पूछा कि सरकार ने क्यों अपनी आंखें मूंदे रखीं ?
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हलफनामे में क्या कहा बाबा रामदेव
शीर्ष अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में रामदेव ने कहा है मैं विज्ञापनों के संबंध में बिना शर्त माफी मांगता हूं। मुझे इस गलती पर गहरा अफसोस है और मैं अदालत को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इसे दोहराया नहीं जाएगा। रामदेव ने हलफनामे में कहा है। मैं इस अदालत के 21 नवंबर 2023 के आदेश के पैरा तीन में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए बिना शर्त माफी मांगता हूं। उन्होंने कहा कि बयान का पूरी तरह से अनुपालन किया जाएगा और इस तरह का कोई भी विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
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इससे पहले भी बाबा मांग चुके हैं माफी
रामदेव ने पिछले साल 22 नवंबर को आयोजित संवाददाता सम्मेलन के लिए भी बिना शर्त माफी मांगी और कोई भी सार्वजनिक बयान नहीं देने का आश्वासन दिया, जो अदालत के समक्ष दिए गए वचन का उल्लंघन हो सकता है। उन्होंने कहा मुझे इस चूक पर खेद है और आश्वासन देता हूं कि भविष्य में इसे नहीं दोहराया जाएगा। रामदेव ने कहा मैं कथन के उल्लंघन के लिए क्षमा चाहता हूं। मैं हमेशा कानून का पालन करने का वचन देता हूं।
ये खबर भी पढ़िए...लेडी डॉन : जीवन साथी की भूमिका में शानदार तो क्राइम की दुनिया में जानदार
बालकृष्ण ने भी मांगी माफी
आचार्य बालकृष्ण ने भी शीर्ष अदालत के पिछले साल 21 नवंबर के आदेश में दर्ज बयान के उल्लंघन के लिए बिना शर्त माफी मांगी। उन्होंने कहा मुझे प्रतिवादी संख्या पांच ( पतंजलि ) की ओर से विज्ञापन जारी करने पर गहरा खेद है, जो 21 नवंबर, 2023 के आदेश का उल्लंघन है। मैं इस संबंध में अपनी और प्रतिवादी संख्या पांच की ओर से बिना शर्त माफी मांगता हूं। बालकृष्ण ने अपने हलफनामे में कहा अदालत के आदेशों का उल्लंघन करने का मेरा कभी कोई इरादा नहीं था। मैं वचन देता हूं कि भविष्य में ऐसी कोई चूक नहीं होगी। मैं हमेशा कानून की महिमा को बनाए रखूंगा।
बालकृष्ण के बयान को कोर्ट कर चुकी थी खारिज
सुप्रीम ने बालकृष्ण के इस बयान को भी खारिज कर दिया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री ( जादुई उपचार) अधिनियम पुराना है और कहा कि पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापन अधिनियम के दायरे में हैं और अदालत से किए गए वादे का उल्लंघन करते हैं।शीर्ष अदालत इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ( आईएमए ) द्वारा टीकाकरण अभियान और आधुनिक दवाओं के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है।
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