खदान में चट्टान गिरी, 7 मजदूरों की मौत, मृतकों में 5 एमपी के, एक सीजी का

Sandeep Kumar | Jul 02, 2026, 19:30 IST
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खदान में चट्टान गिरी, 7 दिहाड़ी मजदूरों की मौत
खदान में चट्टान गिरी, 7 दिहाड़ी मजदूरों की मौत

बेंगलुरु की पत्थर खदान में 40 फीट ऊंचाई से चट्टान गिर गई। हादसे में सात दिहाड़ी मजदूरों की मौत हुई। पांच मजदूर घायल हैं। मृतकों में मध्य प्रदेश के पांच, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के एक-एक मजदूर शामिल हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • बेंगलुरु की पत्थर खदान में बड़ा चट्टानी हिस्सा गिर गया।
  • हादसे के समय खदान में 17 मजदूर काम कर रहे थे।
  • सात दिहाड़ी मजदूरों की मौके पर मौत हो गई।
  • हादसे में पांच मजदूर घायल हुए और सभी खतरे से बाहर हैं।
  • खदान मालिक ने मृतकों और घायलों को सहायता देने पर सहमति दी।

सुबह हुआ बड़ा हादसा

कर्नाटक के बेंगलुरु में गुरुवार सुबह बड़ा खदान हादसा हुआ। पत्थर खदान में चट्टान का बड़ा हिस्सा अचानक गिर गया। मलबे की चपेट में वहां काम कर रहे मजदूर आए। घटना बेंगलुरु के साउथ तालुक क्षेत्र में हुई। यहां कावेरी क्रशर कंपनी की पत्थर खदान स्थित है। हादसे के समय खदान में खनन का काम चल रहा था।

पुलिस के अनुसार वहां 17 मजदूर काम कर रहे थे। अचानक करीब 40 फीट ऊंचाई से चट्टान नीचे गिरी। मजदूरों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचने का समय नहीं मिला। हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई। पांच अन्य मजदूर घायल भी हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार सभी घायल खतरे से बाहर हैं। मृतक और घायल स्टोन क्रशर साइट पर कार्यरत थे। सभी मजदूर दैनिक मजदूरी पर काम करते थे।

मृतकों की पहचान बदली

हादसे के बाद मृतकों की पहचान को लेकर भ्रम बना। शुरुआती पुलिस सूत्रों ने सभी को बिहार निवासी बताया। बाद में अधिकारियों ने इस जानकारी को संशोधित किया। नई जानकारी के अनुसार पांच मृतक मध्य प्रदेश निवासी थे। एक मजदूर छत्तीसगढ़ का रहने वाला था। सातवां मजदूर कर्नाटक के यादगीर जिले का निवासी था। इस सुधार से मृतकों की वास्तविक पहचान स्पष्ट हुई। प्रशासन अब संबंधित राज्यों के अधिकारियों से संपर्क करेगा। परिवारों को सूचना देने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

17 या 18 मजदूर

पुलिस ने घटनास्थल पर 17 मजदूर होने की जानकारी दी। हालांकि प्रत्यक्षदर्शी ने लगभग 18 मजदूर बताए हैं। दोनों आंकड़ों में एक मजदूर का अंतर दिखाई देता है। एक्सकेवेटर चालक परशुराम ने घटना का विवरण दिया। उन्होंने कहा कि वह मशीन शुरू करने पहुंचे थे। मशीन चालू करते ही पहाड़ी का हिस्सा ढह गया।

परशुराम ने मजदूरों की संख्या अनुमान के आधार पर बताई। उन्होंने कहा कि नीचे करीब 18 लोग काम कर रहे थे। उन्होंने संख्या को लेकर निश्चितता भी नहीं जताई। इसलिए पुलिस का आधिकारिक आंकड़ा 17 माना गया है। प्रत्यक्षदर्शी का बयान जांच का हिस्सा बन सकता है। उपस्थिति रिकॉर्ड से वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।

कुछ सेकंड में गिरी चट्टान

प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार हादसा बहुत अचानक हुआ। पहाड़ी का हिस्सा कुछ सेकंड में नीचे आ गया। मजदूरों को संभलने का मौका नहीं मिला। चट्टान गिरने के बाद आसपास धूल फैल गई। मलबे के नीचे कई मजदूर दब गए। मौके पर मौजूद लोगों ने बचाव का प्रयास शुरू किया। परशुराम के अनुसार चार लोगों को अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने कुल पांच मजदूर घायल बताए हैं। इस अंतर की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से होगी।

बचाव दल ने मलबा हटाने का काम किया। भारी मशीनों की मदद भी ली गई होगी। उपलब्ध रिपोर्ट में अभियान का विस्तृत समय नहीं दिया गया। हादसे के बाद खदान का काम रोकना जरूरी था। घटनास्थल को जांच के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। चट्टानों की स्थिति भी विशेषज्ञों से जांची जाएगी।

ब्लास्टिंग कारण नहीं

घटना के कारणों को लेकर शुरुआती जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार ने ब्लास्टिंग को प्रारंभिक कारण नहीं माना। शुरुआती रिपोर्ट में मिट्टी खिसकने की बात कही गई।

कर्नाटक के सीएम डीके शिवकुमार ने घटना पर दुख जताया। उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की बात कही। जांच पूरी होने पर वास्तविक कारण स्पष्ट होगा। खदान में चट्टान गिरने के कई कारण हो सकते हैं। ढलान की कमजोरी भी खतरा बढ़ा सकती है। बारिश या मिट्टी की नमी भी असर डालती है। हालांकि किसी कारण की पुष्टि अभी नहीं हुई है। तकनीकी जांच के बिना निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। विशेषज्ञों को खदान की संरचना देखनी होगी।

मुआवजे का ऐलान

खदान मालिक ने आर्थिक सहायता देने पर सहमति जताई है। यह जानकारी खान एवं भूविज्ञान विभाग ने दी। अधिकारी रंगप्पा ने मुआवजे का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने मृतकों के परिवारों को दस-दस लाख रुपए मांगे। घायलों को पांच-पांच लाख रुपए देने की बात कही। खदान मालिक ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया।

यह अभी सहायता देने की सहमति है। रकम मिलने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। भुगतान की समयसीमा भी रिपोर्ट में नहीं बताई गई। प्रशासन को भुगतान प्रक्रिया की निगरानी करनी होगी। मृतकों के परिवारों के दस्तावेज भी जुटाए जाएंगे। दूसरे राज्यों में रहने वाले परिवारों तक संपर्क जरूरी होगा।

बनेंगे नए नियम

सीएम डीके शिवकुमार ने नए दिशा-निर्देश जारी करने की बात कही। ये निर्देश राज्य की खनन गतिविधियों पर लागू होंगे। उद्देश्य भविष्य के हादसों को रोकना बताया गया। नए नियमों में ढलान की जांच शामिल हो सकती है। सुरक्षा दूरी और चेतावनी व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होगी। मजदूरों के सुरक्षा उपकरण भी जांचे जाने चाहिए। हालांकि प्रस्तावित नियमों का विवरण अभी सामने नहीं आया। विस्तृत रिपोर्ट के बाद सरकार फैसला करेगी। दोष मिलने पर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई संभव है।

मजदूर सुरक्षा पर सवाल

हादसे ने मजदूरों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खदान में काम करना स्वभाव से जोखिम भरा होता है। कमजोर चट्टान कभी भी जानलेवा बन सकती है। मजदूरों को जोखिम की जानकारी देना जरूरी है। काम शुरू होने से पहले साइट की जांच होनी चाहिए। असुरक्षित क्षेत्र में काम रोकना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। हेलमेट और सुरक्षा जूते पर्याप्त नहीं होते। सुरक्षित दूरी और मजबूत ढलान भी जरूरी हैं। प्रशिक्षित पर्यवेक्षक की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण होती है।

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