प्रशासनिक लापरवाही पर कोर्ट सख्त
सीमांकन रिपोर्ट देने में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, तहसीलदार को 15 दिन की मोहलत
Umeshwari Baghel | Jul 02, 2026, 18:53 IST
तहसीलदार को कड़ा आदेश
बिलासपुर में जमीन का सीमांकन पूरा होने के बाद भी रिपोर्ट न मिलने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई। कोर्ट ने तहसीलदार को 15 दिनों में याचिकाकर्ता सुधीर मिश्रा को सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति देने का आदेश दिया। देरी पर जवाबदेही तय की गई।
समझें क्या है पूरा मामला
मामला बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र स्थित लक्ष्मी निवास कॉलोनी का है। यहां रहने वाले 58 वर्षीय सुधीर मिश्रा ने सीमांकन रिपोर्ट नहीं मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव सहित बिलासपुर कलेक्टर और तहसीलदार को पक्षकार बनाया था।
खसरा नंबर 158/6 की जमीन का मामला
सीमांकन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 अप्रैल 2026 को राजस्व अधिकारियों की टीम बनाई गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर जमीन की जांच और नाप-जोख की। इसके बाद सीमांकन रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई।
रिपोर्ट विभाग के पास पहुंचने के बावजूद उसकी प्रमाणित प्रति जमीन मालिक को नहीं दी गई। इसी कारण याचिकाकर्ता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
प्रमाणित प्रति के लिए किया था आवेदन
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अरविंद सिन्हा ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण उनके मुवक्किल को अपनी ही जमीन से संबंधित सरकारी दस्तावेज के लिए भटकना पड़ रहा है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि सीमांकन रिपोर्ट की प्रति नहीं मिलने से याचिकाकर्ता आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहा है। जमीन से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए भी इस रिपोर्ट की आवश्यकता है।
तहसीलदार को हाईकोर्ट का निर्देश
कोर्ट ने कहा कि संबंधित भूमि की सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर दी जाए। इससे वह अपने कानूनी अधिकारों के अनुसार आगे की कार्रवाई कर सकेगा।
इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत के निर्देश के बाद अब तहसील कार्यालय को तय समयसीमा में रिपोर्ट उपलब्ध करानी होगी।
आदेश से राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ी
ऐसी रिपोर्ट समय पर नहीं मिलने से जमीन मालिक को नामांतरण और स्वामित्व विवाद जैसी प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है। कोर्ट के निर्देश से स्पष्ट है कि सीमांकन पूरा होने के बाद संबंधित व्यक्ति को रिपोर्ट देने में अनावश्यक देरी नहीं की जा सकती।
महत्वपूर्ण तथ्य
याचिकाकर्ता का नाम सुधीर मिश्रा है।
जमीन खसरा नंबर 158/6 में दर्ज है।
भूमि का क्षेत्रफल 0.61 हेक्टेयर है।
सीमांकन टीम 15 अप्रैल 2026 को गठित हुई थी।
रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन किया गया था।
रिपोर्ट तैयार होने के बाद भी उपलब्ध नहीं कराई गई।
हाईकोर्ट ने तहसीलदार को 15 दिन का समय दिया।
आदेश जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने जारी किया।
कोर्ट ने निर्देश के साथ याचिका का निराकरण किया।
FAQ
- हाईकोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
हाईकोर्ट ने बिलासपुर तहसीलदार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता को 15 दिनों के भीतर सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति दी जाए। - याचिका किसने दायर की थी?
यह याचिका बिलासपुर के सरकंडा निवासी सुधीर मिश्रा ने दायर की थी। मामला उनकी जमीन के सीमांकन रिपोर्ट से जुड़ा है। - विवाद की वजह क्या थी?
सीमांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। रिपोर्ट भी तैयार हो गई थी। इसके बाद भी याचिकाकर्ता को उसकी प्रमाणित प्रति नहीं दी जा रही थी।
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