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5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
बीजेपी और AIMIM ने अकोट नगर परिषद में एक अप्रत्याशित गठबंधन किया है।
बीजेपी ने मेयर का पद जीता लेकिन सत्ता में भागीदार बनने के लिए AIMIM को साथ लिया।
इस गठबंधन में बीजेपी, AIMIM, शिवसेना (दो गुट), NCP और अन्य पार्टियां शामिल हैं।
इस महागठबंधन को अकोला जिला मजिस्ट्रेट के पास रजिस्टर कराया गया है।
विपक्षी दलों की सीटें घटकर सिर्फ कांग्रेस और VBA के पास बची हैं।
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अकोट में बीजेपी और AIMIM का गठबंधन
महाराष्ट्र के अकोला जिले में एक राजनीतिक उलटफेर हुआ है, जहां बीजेपी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हाथ मिलाया है। अकोट नगर परिषद के चुनाव परिणामों में किसी एक पार्टी को बहुमत नहीं मिला। इससे बीजेपी ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम से एक महागठबंधन तैयार किया। इसमें बीजेपी के अलावा AIMIM, शिवसेना के दोनों गुट, NCP और कुछ अन्य छोटे दल शामिल हैं।
क्यों खास है यह गठबंधन?
यह गठबंधन इसलिए चौंकाने वाला है, क्योंकि बीजेपी और AIMIM की विचारधारा बिल्कुल अलग है। बीजेपी हिंदुत्व की राजनीति करती है, जबकि AIMIM मुस्लिम समुदाय के हितों की बात करती है। इस गठबंधन के पीछे केवल सत्ता का खेल है, न कि विचारधारा।
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अकोट विकास मंच में शामिल पार्टियां
इस गठबंधन में कुल 25 सीटों का समर्थन मिला है। जिसमें बीजेपी के 11, AIMIM के 5, और अन्य दलों के 9 सदस्य शामिल हैं। इसमें शरद पवार और अजीत पवार दोनों के गुट, शिवसेना के दोनों धड़े और प्रहार जनशक्ति पक्ष भी शामिल हैं।
गठबंधन के प्रमुख विवाद
यह गठबंधन इसलिए भी चौंका देने वाला है क्योंकि राजनीतिक विरोधी (महाराष्ट्र राजनीति) दलों ने एक साथ आकर सत्ता में भागीदारी की है। पहले AIMIM और बीजेपी एक-दूसरे को कटाक्ष करते थे, लेकिन अब सत्ता के लिए एक मंच पर हैं।
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विपक्ष की स्थिति
इस गठबंधन के बाद विपक्षी दलों की संख्या घट गई है, और अब कांग्रेस और VBA के पास ही कुछ सीटें बची हैं। यह गठबंधन बीजेपी के नियंत्रण में मजबूत हुआ है, और इसके समर्थन से उपनगराध्यक्ष और स्वीकृत सदस्यों के चुनाव में एकजुट होकर मतदान किया जाएगा।
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