दिल्ली दंगा 2020: कोर्ट का शरजील-उमर खालिद को जमानत से इनकार

Sandeep Kumar | Jan 05, 2026, 18:27 IST
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Umar Khalid and Sharjeel Imam
Umar Khalid and Sharjeel Imam

दिल्ली दंगे के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज हो गई है। कोर्ट ने कहा कि वे एक साल तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते।

NEW DELHI. दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वे एक साल तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकेंगे।

पांच अन्य आरोपियों को 12 शर्तों के साथ जमानत दी गई है। यह आदेश सोमवार 5 जनवरी को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने दिया। 10 दिसंबर को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था।

क्या बोलो सुप्रीम कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने उमर और शरजील की जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि दोनों एक साल तक जमानत याचिका दाखिल नहीं कर सकते। वे तभी याचिका दाखिल कर सकते हैं जब मामले की सुनवाई नियमित हो और गवाही से नए तथ्य सामने आएं। इसके आधार पर बेल याचिका फिर से दाखिल की जा सकेगी।

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इनको मिली जमानत

अदालत ने कहा कि अगर एक साल में गवाही पूरी नहीं होती, तो आरोपी निचली अदालत में याचिका दाखिल कर सकते हैं। अदालत ने अन्य आरोपियों गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की जमानत मंजूर कर ली। इन आरोपियों के निरंतर कारावास को आवश्यक नहीं माना गया।

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खालिद पर कोर्ट ने लगाई है रोक

अदालत ने उमर खालिद के लिए कुछ सख्त शर्तें लागू की। खालिद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे। वे गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे और केवल परिवार, रिश्तेदारों, और करीबी दोस्तों से मिलेंगे। जमानत अवधि समाप्त होने पर खालिद ने 29 दिसंबर को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया। दिल्ली पुलिस ने सितंबर 2020 में खालिद को गिरफ्तार किया था।

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खालिद पर दंगों की साजिश रचने का आरोप

खालिद पर फरवरी 2020 में दिल्ली दंगा की साजिश रचने का आरोप है। इस मामले में यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत केस दर्ज किया गया है। खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोग साजिशकर्ता हैं। दिल्ली दंगों में कई लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।

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बहन के निकाह के लिए उमर को मिली थी जमानत

उमर खालिद को सुप्रीम कोर्ट से जमानत नहीं मिली। हालांकि, दिसंबर में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बहन के निकाह के लिए 16 से 29 दिसंबर तक की अंतरिम जमानत दी थी। अदालत ने कुछ सख्त शर्तें लागू की थीं। खालिद सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करेंगे, गवाहों से संपर्क नहीं करेंगे और केवल परिवार, रिश्तेदारों और करीबी दोस्तों से मिलेंगे। उन्हें 29 दिसंबर की शाम तक सरेंडर करना था।





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