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News In Short
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होगी।
19 जनवरी को नामांकन दाखिल होंगे, 20 जनवरी को परिणाम घोषित होगा।
यह चुनाव जेपी नड्डा के कार्यकाल के बाद हो रहे हैं।
नितिन नबीन के निर्विरोध अध्यक्ष बनने की संभावना जताई जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह, राजनाथ सिंह और नड्डा नामांकन में शामिल हो सकते हैं।
News In Detail
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू हो रही है। पार्टी के केंद्रीय चुनाव अधिकारियों ने इस बारे में नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, 19 जनवरी को नामांकन दाखिल किए जाएंगे। अगले दिन यानी 20 जनवरी को नए बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम आधिकारिक तौर पर घोषित किया जाएगा। बता दें कि यह चुनाव जेपी नड्डा के लंबे कार्यकाल के बाद होना है।
इस ऐलान ने बीजेपी के अंदर हलचल मचा दी है, क्योंकि यह पार्टी के भविष्य की दिशा तय करेगा। जानें आखिर बीजेपी में राष्ट्रीय अध्यक्ष कैसे चुना जाता है।
भारतीय जनता पार्टी के 'संगठन पर्व' के अंतर्गत राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी डॉ. के. लक्ष्मण जी द्वारा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्वाचन की आधिकारिक घोषणा।
— BJP (@BJP4India) January 16, 2026
निर्वाचन की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू होकर 20 जनवरी 2026 तक पूर्ण होगी। pic.twitter.com/okmljzwzED
नितिन नबीन की है मुख्य दावेदारी
बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन इस पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, नितिन नबीन के निर्विरोध चुने जाने की संभावना है। यदि नितिन नबीन इस पद पर काबिज होते हैं, तो वह पार्टी के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेंगे। उनकी उम्र सिर्फ 46 साल है, जो पार्टी में बदलाव और युवा नेतृत्व को दिखाता है।
नामांकन के दौरान मौजूद रहेंगे ये दिग्गज नेता
नामांकन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा मौजूद रह सकते हैं। इन नेताओं की मौजूदगी से चुनाव प्रक्रिया और भी अहम हो जाएगी। यह दिखाता है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इस चुनाव को गंभीरता से ले रहा है।
Sootr Knowledge
बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन बन सकता है?
बीजेपी के संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के लिए कुछ खास शर्तें हैं। सबसे पहले, व्यक्ति को कम से कम 15 साल तक पार्टी का सदस्य होना चाहिए। इसके अलावा, उसे चार कार्यकाल तक सक्रिय सदस्य रहना होता है। सक्रिय सदस्य वह होता है, जो कम से कम तीन साल तक पार्टी से जुड़ा हो और संगठनात्मक गतिविधियों में भाग लेता हो।
हालांकि, पार्टी ने कुछ खास परिस्थितियों में अपवाद भी दिए हैं। फिर भी, राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए नियम सख्त होते हैं।
बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष की चुनाव प्रक्रिया
बीजेपी में चुनाव की शुरुआत सबसे निचले स्तर से होती है। सबसे पहले, प्राथमिक समितियों का गठन और चुनाव होते हैं। इसके बाद, मंडल, जिला और प्रदेश स्तर पर संगठन तैयार किया जाता है। प्रदेश स्तर पर एक निर्वाचन मंडल बनता है, जो प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव करता है।
इस मंडल में राज्य की विधानसभा सीटों के बराबर सदस्य होते हैं। इसमें महिलाओं और आरक्षित वर्गों का प्रतिनिधित्व भी होता है।
राष्ट्रीय परिषद क्या होती है?
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के साथ राष्ट्रीय परिषद का गठन होता है। राष्ट्रीय परिषद ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव करती है। इसमें देश की लोकसभा सीटों के बराबर सदस्य होते हैं।
यदि महिला या आरक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता, तो समायोजन किया जाता है। जब कम से कम 50 फीसदी राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे हो जाते हैं, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया शुरू होती है।
नामांकन से लेकर सहमति तक की प्रक्रिया
राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के उम्मीदवार का नाम कम से कम पांच राज्यों की राष्ट्रीय परिषद इकाइयों से आना जरूरी है। इसके साथ, उम्मीदवार से लिखित सहमति भी ली जाती है। आमतौर पर बीजेपी में इस पद के लिए सर्वसम्मति बनाने की कोशिश की जाती है। इससे चुनाव औपचारिक और निर्विरोध हो सके।
आरएसएस की भूमिका कितनी होती है?
बीजेपी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वैचारिक राजनीतिक इकाई माना जाता है। हालांकि, पार्टी के संविधान में आरएसएस की औपचारिक भूमिका का जिक्र नहीं है। वहीं, व्यवहार में संघ की राय को काफी अहम माना जाता है। प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के बड़े फैसलों में बीजेपी और आरएसएस के बीच विचार-विमर्श होता है।
बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री भी परंपरागत रूप से आरएसएस से ही आते हैं। इससे दोनों संगठनों के बीच तालमेल बना रहता है।
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