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BRICS समिट: दिल्ली डिक्लेरेशन पास,UNSC सुधार पर PM मोदी का दुनिया को कड़ा संदेश
Jitendra Shrivastava | Sept 12, 2026, 19:10 IST
Photograph: (THESOOTR)
Photograph: (THESOOTR)
NEW DELHI. BRICS समिट में दिल्ली डिक्लेरेशन सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ को नियम बनाने वाला बनने और UNSC सुधार पर जोर दिया है।
नई दिल्ली में 18वां BRICS समिट हुआ। भारत की अध्यक्षता में यह आयोजन किया गया। समापन में दिल्ली डिक्लेरेशन सर्वसम्मति से पास हो गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबल साउथ को नियम बनाने वाला बनने को कहा। उन्होंने UNSC सुधार पर भी जोर दिया।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत की अध्यक्षता में 12 सितंबर को 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शुरू हुआ। पीएम मोदी ने सदस्य देशों के नेताओं का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह साल ऐतिहासिक पड़ाव है, क्योंकि BRICS अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है।
मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से ज्यादा बैठकें हुईं। लगभग 30 भारतीय शहरों में सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि BRICS को आम लोगों से जोड़ने पर खास जोर दिया गया।
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समिट के समापन सत्र में दिल्ली डिक्लेरेशन 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी मिली। पीएम मोदी ने खुद घोषणा का मसौदा सदस्य देशों के सामने रखा। किसी भी देश ने आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद घोषणा को औपचारिक स्वीकृति मिल गई।
मोदी ने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं। लेकिन सहयोग की भावना साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि पुराने संस्थानों के सहारे बदलती दुनिया को आगे नहीं चलाया जा सकता।
डिक्लेरेशन में सबसे पहले जंग रोकने पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने विवादों की जड़ तक पहुंचने की बात कही। साथ ही बातचीत और कूटनीति से समाधान निकालने का संकल्प लिया गया। घोषणा में अलग-अलग देशों के नजरिए का सम्मान करने की बात भी कही गई।
इसके अलावा एकतरफा टैरिफ पर गहरी चिंता जताई गई। BRICS का कहना है कि ऐसे कदम व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं। यह WTO (World Trade Organization) के नियमों के भी खिलाफ माने गए।
परमाणु खतरे को लेकर भी चिंता जाहिर की गई। सदस्य देशों ने परमाणु टकराव के बढ़ते जोखिम पर ध्यान दिलाया। इसके साथ ही क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने पर काम जारी रखने की बात हुई।
घोषणा में एकतरफा दबाव वाले आर्थिक कदमों की निंदा की गई। इन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया गया। साथ ही व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही पर भी जोर दिया गया।
दिल्ली डिक्लेरेशन BRICS समिट 2026 के समापन पर पास हुई एक साझा घोषणा है, जिसे नई दिल्ली में हुए 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सभी सदस्य देशों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
इस घोषणा में जंग रोकने और बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया गया है, साथ ही एकतरफा टैरिफ और परमाणु खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है।
डिक्लेरेशन में व्यापार, सप्लाई चेन और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने की बात भी शामिल है, और एकतरफा दबाव वाले आर्थिक कदमों की निंदा की गई है। सीधे शब्दों में कहें तो यह घोषणा BRICS देशों की आने वाले समय की साझा प्राथमिकताओं और सोच को दर्शाती है।
मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ अब सिर्फ नियम मानने वाला नहीं रहे। उन्होंने कहा कि इसे अब नियम बनाने वाला यानी रूल शेपर बनना होगा। उनका कहना था कि ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की फ्रंट रो में खड़ा है। लेकिन फैसले लेने की प्रक्रिया में यह पीछे छूट जाता है।
उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को पिरामिड जैसा बताया। उनका कहना था कि इस "विशेषाधिकारों के पिरामिड" को "साझेदारी के मंच" में बदलना जरूरी है।
ग्लोबल साउथ एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और ओशिनिया के उन विकासशील और उभरते देशों के लिए किया जाता है, जो आर्थिक और सामाजिक विकास के मामले में अभी आगे बढ़ रहे हैं।
इसमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देश शामिल हैं। यह शब्द सीधे भौगोलिक दक्षिण दिशा से नहीं जुड़ा, बल्कि आर्थिक स्थिति और वैश्विक ताकत के संदर्भ में इस्तेमाल होता है।
इसके उलट "ग्लोबल नॉर्थ" में अमेरिका, यूरोपीय देश, जापान जैसे विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देश आते हैं। BRICS जैसे मंचों पर अक्सर यह बात उठती है कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा सामना करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फैसलों और नियम बनाने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अब भी सीमित रहती है।
पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी यूएनएससी (UNSC – United Nations Security Council) में सुधार पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अब और देरी नहीं की जा सकती। उनका कहना था कि वैश्विक संस्थाओं में प्रतिनिधित्व बढ़ना जरूरी है।
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मोदी मोदी ने वैश्विक गवर्नेंस सुधार के लिए 10-सूत्री रोडमैप का प्रस्ताव रखा, जिसे अगली समिट तक अंतिम रूप दिया जाएगा। मोदी ने BRICS के लिए एक निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र बनाने का प्रस्ताव भी रखा। उनका तर्क था कि अध्यक्षता हर साल बदलती है, लेकिन काम की रफ्तार धीमी नहीं पड़नी चाहिए।
मोदी ने कहा कि एआई (AI – Artificial Intelligence), साइबर स्पेस, आउटर स्पेस और बायोटेक्नोलॉजी जैसी तकनीकें भविष्य के वैश्विक नियम तय करेंगी। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में ग्लोबल साउथ की बराबर भागीदारी जरूरी है। उन्होंने युवा राजनयिकों और नीति-निर्माताओं को बातचीत की ट्रेनिंग देने का प्रस्ताव भी रखा।
समिट के दौरान मोदी ने संगठन के 20 साल पूरे होने पर दो डाक टिकट जारी किए। उन्होंने सभी सदस्य देशों के योगदान के लिए आभार जताया। समापन के बाद मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने हाथ मिलाया और बातचीत की।
मोदी ने कहा कि दिल्ली घोषणा ने BRICS के साझा संकल्प की दिशा तय कर दी है। अब सदस्य देशों की जिम्मेदारी है इन्हें अमल में लाना। संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलना अगला बड़ा कदम होगा।
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18वें समिट का भव्य आगाज
मोदी ने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से ज्यादा बैठकें हुईं। लगभग 30 भारतीय शहरों में सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया गया। उन्होंने कहा कि BRICS को आम लोगों से जोड़ने पर खास जोर दिया गया।
दिल्ली डिक्लेरेशन पास
मोदी ने कहा कि सदस्य देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं। लेकिन सहयोग की भावना साफ नजर आती है। उन्होंने कहा कि पुराने संस्थानों के सहारे बदलती दुनिया को आगे नहीं चलाया जा सकता।
घोषणा के बड़े संकल्प
इसके अलावा एकतरफा टैरिफ पर गहरी चिंता जताई गई। BRICS का कहना है कि ऐसे कदम व्यापार को नुकसान पहुंचाते हैं। यह WTO (World Trade Organization) के नियमों के भी खिलाफ माने गए।
परमाणु खतरे को लेकर भी चिंता जाहिर की गई। सदस्य देशों ने परमाणु टकराव के बढ़ते जोखिम पर ध्यान दिलाया। इसके साथ ही क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने पर काम जारी रखने की बात हुई।
एकतरफा दबाव की निंदा
क्या है दिल्ली डिक्लेरेशन
इस घोषणा में जंग रोकने और बातचीत से समाधान निकालने पर जोर दिया गया है, साथ ही एकतरफा टैरिफ और परमाणु खतरे को लेकर भी चिंता जताई गई है।
डिक्लेरेशन में व्यापार, सप्लाई चेन और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आसान बनाने की बात भी शामिल है, और एकतरफा दबाव वाले आर्थिक कदमों की निंदा की गई है। सीधे शब्दों में कहें तो यह घोषणा BRICS देशों की आने वाले समय की साझा प्राथमिकताओं और सोच को दर्शाती है।
ग्लोबल साउथ अब बने रूल शेपर
उन्होंने मौजूदा वैश्विक व्यवस्था को पिरामिड जैसा बताया। उनका कहना था कि इस "विशेषाधिकारों के पिरामिड" को "साझेदारी के मंच" में बदलना जरूरी है।
समझें... क्या है ग्लोबल साउथ
इसमें भारत, ब्राजील, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देश शामिल हैं। यह शब्द सीधे भौगोलिक दक्षिण दिशा से नहीं जुड़ा, बल्कि आर्थिक स्थिति और वैश्विक ताकत के संदर्भ में इस्तेमाल होता है।
इसके उलट "ग्लोबल नॉर्थ" में अमेरिका, यूरोपीय देश, जापान जैसे विकसित और आर्थिक रूप से मजबूत देश आते हैं। BRICS जैसे मंचों पर अक्सर यह बात उठती है कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का सबसे ज्यादा सामना करते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फैसलों और नियम बनाने की प्रक्रिया में उनकी भागीदारी अब भी सीमित रहती है।
UNSC सुधार अब टल नहीं सकता
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10 प्रस्तावों का रोडमैप
10-सूत्री ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म प्रस्ताव...
1: प्रतिनिधित्व (Representation)
- UNSC सुधार अब और नहीं टलना चाहिए।
- वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर मौजूदा हकीकत के अनुरूप हो।
- नीतियां मौजूदा आर्थिक हालात के हिसाब से तय हों।
2: जवाबदेही (Accountability)
- निर्णयों की निगरानी के लिए डिजिटल रिपॉजिटरी बने।
- हर फैसले का नोडल पॉइंट और समयसीमा तय हो।
- ट्रोइका सिस्टम से निरंतरता बनी रहे।
- समुद्री नाविकों के लिए इमरजेंसी सपोर्ट नेटवर्क बने।
3: नियम निर्माण (Rule-Making)
- AI, साइबरस्पेस, स्पेस और बायोटेक में सबकी भागीदारी हो।
- ग्लोबल साउथ को नियम तय करने में बराबर हिस्सेदारी मिले।
- विशेषाधिकार का पिरामिड, साझेदारी के मंच में बदले।
तकनीक में बराबर भागीदारी
20 साल पूरे होने पर डाक टिकट
मोदी ने कहा कि दिल्ली घोषणा ने BRICS के साझा संकल्प की दिशा तय कर दी है। अब सदस्य देशों की जिम्मेदारी है इन्हें अमल में लाना। संकल्पों को ठोस नतीजों में बदलना अगला बड़ा कदम होगा।
FAQ
- दिल्ली डिक्लेरेशन क्या है?
यह BRICS समिट 2026 में पास हुई साझा घोषणा है। इसमें सदस्य देशों की प्राथमिकताएं शामिल हैं। इसे सभी देशों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। - मोदी ने ग्लोबल साउथ को लेकर क्या कहा?
मोदी ने कहा ग्लोबल साउथ अब नियम बनाने वाला बने। उन्होंने इसे रूल टेकर से रूल शेपर बनाने की बात कही। तकनीक और वैश्विक फैसलों में बराबर भागीदारी की जरूरत बताई। - घोषणा में किन मुद्दों पर चिंता जताई गई?
जंग, एकतरफा टैरिफ और परमाणु खतरे पर चिंता जताई गई। व्यापार और कूटनीति से समाधान पर भी जोर दिया गया। WTO नियमों के उल्लंघन पर भी सवाल उठाए गए।
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