भोपाल मास्टर प्लान 2047 पर विवाद, 66 गांवों के किसानों की जमीन के इस्तेमाल पर उठे सवाल
Ramanand Tiwari | Oct 22, 2026, 23:37 IST
भोपाल मास्टर प्लान 2047 को लेकर किसानों का विरोध बढ़ रहा है।
Land dispute erupts over 66 villages under Bhopal Master Plan 2047, farmers question land ownership rights
भोपाल मास्टर प्लान 2047 में जमीन के जमीन के उपयोग को लेकर विवाद सामने आया है। शहर के विस्तार और बड़े तालाब के संरक्षण की प्रस्तावित व्यवस्था से किसान चिंतित हैं। किसानों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लग सकते हैं। इससे जमीन के मालिकाना अधिकार और उसके भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जमीन किसानों की, लेकिन इस्तेमाल की शर्तें कौन तय करेगा?
66 गांवों की जमीन पर विकास का नया नक्शा
किसानों की चिंता खेती के साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़ी है। योजना लागू होने पर जमीन के दूसरे उपयोगों के लिए अनुमति जरूरी हो सकती है। हालांकि वास्तविक प्रतिबंध संबंधित भूखंड की निर्धारित श्रेणी पर निर्भर करेंगे। अंतिम स्वीकृत योजना के प्रावधान भी इसमें महत्वपूर्ण होंगे।
तालाब संरक्षण और किसानों के अधिकारों पर सवाल
किसानों का कहना है कि जल संरक्षण के साथ उनकी आजीविका भी सुरक्षित रहनी चाहिए। विवाद संरक्षण क्षेत्र की सीमाओं और कृषि गतिविधियों पर संभावित असर से जुड़ा है। किसान प्रत्येक गांव की जमीन पर लागू होने वाली शर्तों की स्पष्ट जानकारी चाहते हैं।
पुराने नक्शे में कृषि भूमि, नए प्रारूप में संरक्षण श्रेणी
पुराने और नए नक्शों की तुलना से बदलावों का वास्तविक प्रभाव स्पष्ट हो सकता है। खासकर उन भूखंडों की पहचान जरूरी है जिनकी भू-उपयोग श्रेणी बदली गई है। उपलब्ध समाचार सामग्री में विभाग का भूखंडवार स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
ग्राम सभाओं की सहमति पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने सभी 66 ग्राम पंचायतों में प्रस्तावित भू-उपयोग पर खुली चर्चा की मांग की है। वे स्थानीय जरूरतों और आपत्तियों के आधार पर प्रावधानों की समीक्षा चाहते हैं। हालांकि ग्राम सभाओं की सहमति की कानूनी अनिवार्यता संबंधित योजना कानूनों पर निर्भर करेगी।
संयुक्त किसान मोर्चा ने उठाया आजीविका का मुद्दा
ठाकुर का आरोप है कि संरक्षण क्षेत्र की नई परिभाषा से ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है। उन्होंने वर्ष 2008 से आंदोलन जारी रहने का हवाला दिया। साथ ही जमीन संबंधी प्रतिबंधों की समीक्षा को जरूरी बताया। संयुक्त किसान मोर्चा ग्रामीण जमीनों के भविष्य से जुड़ी आपत्तियों पर स्पष्ट निर्णय चाहता है।
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रहवासियों ने मकानों, मंदिरों, सरकारी संस्थानों और पुराने पेड़ों को सुरक्षित रखने की मांग की। उन्होंने प्रस्तावित सड़क के लिए वैकल्पिक मार्ग का तकनीकी सर्वे कराने को भी कहा।
नीलबड़ में बैरिकेडिंग, सड़क पर बैठे किसान
पुलिस ने नीलबड़ क्षेत्र में बैरिकेडिंग लगाकर किसानों को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए। उन्होंने प्रस्तावित मास्टर प्लान के खिलाफ नारेबाजी की।
अब सरकारी नक्शे और जमीन के वास्तविक उपयोग पर नजर
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