Census 2027 में लिव-इन जोड़े माने जाएंगे विवाहित, घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा

Amresh Kushwaha | Mar 30, 2026, 11:23 IST
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census 2027 live in couple married status
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जनगणना 2027 में लिव-इन कपल को पहली बार विवाहित माना जाएगा, बशर्ते वे खुद को स्थिर संबंध में बताएं। साथ ही एक अप्रैल से स्व-गणना शुरू, घर बैठे भर सकते हैं फॉर्म, डॉक्यूमेंट की जरूरत नहीं।

News In Short

  • भारत की जनगणना 2027 में पहली बार लिव-इन जोड़ों को विवाहित माना जाएगा।
  • जनगणना 2027 पूरी तरह डिजिटल होगी और घर बैठे ऑनलाइन फॉर्म भरने की सुविधा दी जा रही है।
  • दिल्ली से एक अप्रैल 2026 से स्व-गणना की शुरुआत हो रही है।
  • जनगणना में किसी भी जवाब के साथ कोई दस्तावेज देना जरूरी नहीं।

News In Detail

लिव-इन को मिला विवाहित का दर्जा

एक बड़ी खबर जनगणना 2027 से आ रही है। यदि कोई जोड़ा बिना शादी के साथ (लिव-इन रिलेशनशिप) रह रहा है और वे खुद को एक स्थिर संबंध में मानते हैं, तो जनगणना में उन्हें विवाहित जोड़े जैसा ही दर्जा मिलेगा। यह बात जनगणना के स्व-गणना पोर्टल पर FAQ के जवाब में स्पष्ट की गई है।

अधिकारियों ने पोर्टल पर बताया कि अगर जोड़ा अपने रिश्ते को स्थिर संबंध मानता है, तो उसे विवाहित जोड़े की तरह ही दर्ज किया जाना चाहिए। यह पहली बार है जब ऐसी स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया गया है।


पहले भी होता था ऐसा दर्ज

हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब ऐसे जोड़ों को विवाहित माना गया हो। पिछली जनगणनाओं में शामिल एक अनुभवी अधिकारी ने बताया कि अगर कोई बिना शादी का जोड़ा खुद को विवाहित बताता था, तो जनगणनाकर्ता उसे वैसे ही दर्ज कर लेते थे। इस बार यह बात पहली बार लिखित में स्पष्ट की गई है, शायद इसलिए क्योंकि अब लोग खुद ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं।

जनगणना के हाउसलिस्टिंग (Houselisting) यानी घर सूची बनाने के चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। इनमें से एक सवाल घर में रह रहे विवाहित जोड़ों की संख्या के बारे में है। यह चरण 45 दिनों तक चलेगा।

1 अप्रैल से शुरू होगी स्व-गणना

जनगणना का पहला चरण यानी हाउसलिस्टिंग एक अप्रैल से 30 सितंबर 2026 के बीच होगा। इसमें हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को 30 दिन का समय दिया जाएगा। इससे पहले 15 दिन का स्व-गणना का मौका दिया जाएगा। दिल्ली के NDMC क्षेत्र में यह प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू होगी।

स्व-गणना पोर्टल पर घर का मुखिया या कोई जिम्मेदार वयस्क सदस्य फॉर्म भर सकता है। जरूरी है कि मोबाइल OTP (One Time Password) से पहचान की पुष्टि की जाए। पोर्टल 16 भारतीय भाषाओं और अंग्रेजी में उपलब्ध है।

घर की लोकेशन मार्क करना जरूरी

स्व-गणना में एक अहम कदम है, घर की सही जगह को मानचित्र पर चिह्नित करना। इसके लिए जिले का नाम और पिन कोड डालना होगा। फिर जियोटैगिंग (Geotagging) आधारित मानचित्र खुलेगा जिसमें घर को ठीक-ठाक जगह पर निशान लगाना होगा। अगर यह निशान गलत लगाया गया तो जनगणनाकर्ता के ऐप में घर का डेटा नहीं दिखेगा।

फॉर्म को 15 दिनों के दौरान हिस्सों में भरा जा सकता है और बीच में बचाया भी जा सकता है। फॉर्म जमा होने के बाद एक स्व-गणना आईडी (SE ID) मिलेगी, जो जनगणनाकर्ता के आने पर उन्हें देनी होगी। पूरी प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट से ज्यादा समय नहीं लगेगा।


कोई दस्तावेज नहीं, सिर्फ जानकारी

जनगणना में किसी भी जवाब के लिए कागज या दस्तावेज देना जरूरी नहीं है। जो जानकारी सही लगे और जिस पर विश्वास हो, वही भरनी है। जनगणनाकर्ता को भी वही दर्ज करना होता है जो व्यक्ति बताए। स्व-गणना का पोर्टल केवल भारत की भौगोलिक सीमाओं के अंदर खुलेगा और सभी डेटा सुरक्षित सरकारी सर्वर पर रखा जाएगा।

FAQ

  1. क्या जनगणना 2027 में लिव-इन में रह रहे जोड़े को विवाहित माना जाएगा?
    हां, जनगणना 2027 में लिव-इन जोड़े को विवाहित माना जाएगा, बशर्ते वे खुद अपने रिश्ते को एक 'स्थिर संबंध' मानते हों। यह स्पष्टीकरण जनगणना के स्व-गणना पोर्टल पर FAQ में दिया गया है। अगर जोड़ा खुद कहता है कि वे स्थिर संबंध में हैं, तो जनगणनाकर्ता या खुद गणना करते समय उन्हें विवाहित की श्रेणी में रखा जाएगा। किसी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी।
  2. जनगणना 2027 में स्व-गणना कैसे करें और इसके लिए क्या चाहिए?
    जनगणना 2027 की स्व-गणना के लिए एक सरकारी वेब पोर्टल पर जाना होगा। घर का मुखिया या कोई जिम्मेदार वयस्क सदस्य OTP के जरिए मोबाइल नंबर की पुष्टि करके फॉर्म भर सकता है। घर की जियोटैगिंग यानी मानचित्र पर सही जगह निशान लगाना जरूरी है। पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है। फॉर्म 16 भाषाओं में उपलब्ध है और बीच में बचाकर बाद में पूरा भी किया जा सकता है।
  3. जनगणना 2027 कितने चरणों में होगी और कब तक पूरी होगी?
    जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। पहला चरण हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस, जो अप्रैल से सितंबर 2026 तक चलेगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना, जो फरवरी 2027 में होगी। हिमालयी और बर्फीले इलाकों जैसे लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में यह पहले सितंबर-अक्टूबर 2026 में होगी। यह भारत की 16वीं और पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।
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