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News in Short
- खरगे ने बजट को एकतरफा और असमानताओं को नजरअंदाज करने वाला बताया।
- खरगे ने कहा कि सरकार के पास नीति दृष्टि और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी है।
- बजट में किसानों, समाजिक न्याय और राज्यों के लिए कोई ठोस योजना नहीं है।
- खरगे ने वित्त आयोग की सिफारिशों पर सवाल उठाए, राज्य सरकारों को राहत नहीं मिली।
- खरगे ने इसे एक थकी हुई सरकार का बजट बताया, जिसमें समाजिक कल्याण की कोई योजना नहीं है।
News in Detail
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। बजट के बाद राजनीतिक बहस शुरू हो गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे एकतरफा और जनता की उम्मीदों के विपरीत बताया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार के पास विचारों और दूरदृष्टि की कमी हो गई है।
खरगे ने ट्वीट के जरिए साधा निशाना
खरगे ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देश आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहा है। बजट में इन समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं दिखता। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार के पास न तो नीति दृष्टि है और न ही राजनीतिक इच्छाशक्ति। उन्होंने कहा कि यह बजट उस खालीपन को उजागर करता है। खरगे ने कहा कि मोदी सरकार अब विचारों से खाली हो चुकी है। तंज कसते हुए लिखा कि मिशन मोड अब चैलेंज रूट बन गया है और रिफॉर्म एक्सप्रेस शायद ही रिफॉर्म जंक्शन पर रुके।
Modi Govt has run out of ideas. #Budget2026 does not provide a single solution to India’s many economic, social, and political challenges.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) February 1, 2026
“Mission Mode” is now “Challenge Route.”
“Reform Express” rarely stops at any "Reform" Junction.
Net result: NO policy vision, NO…
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देश को दिशा देने वाला विजन गायब
खरगे के अनुसार केंद्रीय बजट 2026 में कोई ठोस नीति नहीं है। न ही ऐसे नारे हैं जो नीति के अभाव को ढक सकें। उन्होंने इसे सरकार की विफलता का प्रतीक बताया। खरगे ने कहा कि देश को दिशा देने वाला विजन गायब है। देश के किसान अभी भी किसी वेलफेयर सपोर्ट की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि असमानता ब्रिटिश राज के स्तर से भी बढ़ चुकी है। बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस और अल्पसंख्यकों के लिए कोई विशेष समर्थन नहीं दिया गया। खरगे के अनुसार, यह बजट सामाजिक न्याय की भावना को नजरअंदाज करता है।
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वित्त आयोग की सिफारिशों पर सवाल
खरगे ने वित्त आयोग की सिफारिशों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इससे राज्यों को कोई राहत नहीं मिल रही। राज्य गंभीर वित्तीय दबाव में हैं। खरगे ने कहा कि फेडरलिज्म इस बजट में हताहत हुआ है। दूसरी ओर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2027 के लिए कैपेक्स लक्ष्य 12.2 लाख करोड़ रुपए किया। यह मौजूदा वर्ष के 11.2 लाख करोड़ रुपए से अधिक है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बात कही गई। कांग्रेस इसे अपर्याप्त मानती है।
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बजट में इसका कोई जिक्र नहीं
खरगे ने कहा कि घरेलू बचत में गिरावट और कर्ज बढ़ने की बात नजरअंदाज की गई है। शिक्षित युवाओं में बेरोजगारी का कोई समाधान नहीं है। वित्त आयोग की सिफारिशों पर और अध्ययन की जरूरत है। बजट राज्य सरकारों को कोई राहत नहीं देता है। कांग्रेस नेता ने कहा कि असमानता ब्रिटिश राज के स्तर को पार कर गई है। बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है। न ही SC, ST, OBC, EWS या अल्पसंख्यकों के लिए कोई सहायता है।
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बजट को भी खर्च नहीं करते: खरगे
केंद्रीय बजट आज: खरगे ने कहा कि पहले की सरकारें शिक्षा, स्वास्थ्य और छात्रों को स्कॉलरशिप पर जोर देती थीं। वित्त मंत्री ने स्कूलों का एक भी जिक्र नहीं किया। सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए कोई घोषणा नहीं की। मनरेगा की जगह आए नए कानून का बजट में कोई जिक्र नहीं था। यह एक थकी हुई और रिटायर सरकार का बजट है। पहले ये पैसा नहीं देना चाहते और फिर मिले बजट को भी खर्च नहीं करते।
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