/sootr/media/media_files/2026/02/24/cow-vs-buffalo-milk-for-kids-brain-development-facts-2026-02-24-18-56-07.jpg)
बच्चे के जन्म के बाद पहले एक साल तक मां का दूध ही उसका संपूर्ण आहार होता है। लेकिन जैसे ही बच्चा ठोस आहार की शुरुआत करता है, माता-पिता के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा हो जाता है। गाय का दूध या भैंस का दूध?
हाल ही में राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के एक वायरल दावे ने इस चर्चा को और हवा दे दी है। मंत्री ने दावा किया कि गाय का दूध पीने से बच्चे तेज बुद्धि वाले बनते हैं, जबकि भैंस का दूध उन्हें सुस्त बनाता है। लेकिन क्या विज्ञान भी ऐसा ही मानता है? आइए जानते हैं क्या कहती है रिसर्च।
मंत्री का दावा बनाम विज्ञान की कसौटी
कोटा के एक कार्यक्रम में मंत्री मदन दिलावर ने एक तर्क दिया। उन्होंने कहा कि गाय का बछड़ा अपनी मां को तुरंत ढूंढ लेता है। वहीं भैंस का बछड़ा ऐसा नहीं कर पाता है। उन्होंने इस व्यवहार को सीधे दूध के असर से जोड़ दिया।
हालांकि, न्यूट्रिशन रिसर्चर्स और बाल रोग विशेषज्ञों ने इस दावे को खारिज कर दिया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका कोई भी साइंटिफिक एविडेंस नहीं है। गाय का दूध बच्चे के मानसिक विकास में भैंस के दूध से बेहतर नहीं है।
फैट और न्यूट्रिशन में क्या है अंतर?
जब हम गाय और भैंस के दूध की तुलना करते हैं, तो सबसे बड़ा अंतर उनके फैट स्ट्रक्चर में दिखता है। भैंस के दूध में फैट की मात्रा 6 से 15 प्रतिशत तक होती है, जिससे यह अधिक कैलोरी वाला बन जाता है। इसके उलट, गाय के दूध में फैट केवल 3 से 5 प्रतिशत ही होता है।
न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. सीमा गुलाटी के अनुसार, भैंस के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन B12 अधिक होता है, जो नर्व हेल्थ और डीएनए सिंथेसिस के लिए जरूरी है। लेकिन, इससे इंटेलिजेंस पर कोई मापने योग्य प्रभाव नहीं पड़ता।
बुद्धिमानी और दूध का कोई कनेक्शन नहीं
एक्सपर्ट्स के मुताबिक दूध का चुनाव फिटनेस के लिए जरूरी है। इसका बुद्धिमानी बढ़ाने से कोई सीधा लिंक नहीं होता है। दिमाग के विकास के लिए आयोडीन एक जरूरी पोषक तत्व है। यह जानवर को दिए जाने वाले चारे पर निर्भर करता है। इसका पशु की नस्ल से कोई लेना-देना नहीं होता है। यानी बुद्धिमानी का दूध के प्रकार से कोई संबंध नहीं है।
असली जीनियस बनाने वाला दूध कौन सा है?
डॉ. एचपीएस सचदेव के मुताबिक, केवल मां का दूध ही बेहतर इंटेलिजेंस से जुड़ा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ की गाइडलाइंस भी यही कहती हैं। जन्म के पहले 6 महीने तक सिर्फ ब्रेस्टफीडिंग करानी चाहिए। कई वैश्विक शोधों से भी इसके पक्के सबूत मिले हैं। मां के दूध के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स दिमाग को फायदा पहुंचाते हैं। इससे बच्चे की सोचने-समझने की क्षमता बेहतर रहती है।
दूध हल्का या भारी होने का मानसिक संबंध नहीं
पहले के समय में माना जाता था कि गाय का दूध हल्का और पचाने में आसान होता है, इसलिए यह बेहतर है। लेकिन आधुनिक विज्ञान और टफ्ट्स यूनिवर्सिटी (2023) की ताजा रिपोर्ट साफ करती हैं कि गाय के दूध से दिमागी विकास का कोई एक्स्ट्रा फायदा नहीं मिलता। बच्चे को स्मार्ट बनाने का राज किसी पशु के दूध में नहीं, बल्कि 6 महीने की एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग और उसके बाद दिए जाने वाले पौष्टिक ठोस आहार में छिपा है।
ये खबरें भई पढ़ें...
Orange Tulip Scholarship: भारतीय छात्रों के लिए नीदरलैंड्स में पढ़ाई करने का मौका
अब पति नहीं, 58% मामलों में पत्नियां खुद मांग रही हैं तलाक, सामने आया बड़ा कारण
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक: 590 करोड़ की धोखाधड़ी से निवेशकों को 14,000 करोड़ का नुकसान
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us