जानवर की कस्टडी निर्जीव वस्तु जैसी नहीं, मिष्टी, कोको और कॉटन पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला बनेगा नजीर
The Sootr | Apr 17, 2026, 12:36 IST
dog custody order
दिल्ली हाई कोर्ट ने तीन टॉय पोमेरेनियन फीमेल डॉग मिष्टी, कोको और कॉटन की कस्टडी उनके गोद लेने वाले माता- पिता को सौंपने का आदेश दिया है। जस्टिस गिरीश कथपालिया ने कहा, जानवर की कस्टडी किसी निर्जीव वस्तु की तरह नहीं तय की जा सकती।
समझें क्या है पूरा मामला
- दिल्ली में तीन पोमेरेनियन फीमेल डॉग की कस्टडी को लेकर कानूनी लड़ाई हुई।
- एक व्यक्ति पर कुत्तों के साथ क्रूरता का आरोप था, पुलिस ने रेड की।
- रेड के बाद तीनों फीमेल डॉग को एनजीओ (Non-Governmental Organization) को सौंपा गया।
- एनजीओ ने तीनों को याचिकाकर्ताओं को गोद दिया, पर मूल मालिक ने कोर्ट में दावा किया।
- दिल्ली हाई कोर्ट ने गोद लेने वालों के पक्ष में फैसला सुनाया।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकी कस्टडी को लेकर एक ऐसा फैसला सुनाया जो भारत में पशु अधिकारों की दिशा में एक नई मिसाल बन सकता है।
जस्टिस गिरीश कथपालिया ने साफ कहा कि किसी जानवर की कस्टडी किसी निर्जीव वस्तु की कस्टडी के बराबर नहीं आंकी जा सकती। इंसान और पालतू जानवर के बीच जो भावनात्मक रिश्ता बनता है, उसे कानून को भी मानना होगा।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
कुछ समय बाद मूल मालिक ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उसने फीमेल डॉग की वापसी की मांग की। ट्रायल कोर्ट ने उसकी बात मान ली और तीनों को उसे लौटाने का आदेश दे दिया।
गोद लेने वाले परिवार ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
मामला पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (Prevention of Cruelty to Animals Act) की धारा 11 के तहत दर्ज था, जो जानवरों के साथ क्रूरता को अपराध मानती है। हाई कोर्ट के सामने असली सवाल यह नहीं था कि मूल मालिक ने क्रूरता की या नहीं।
वह मामला ट्रायल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में है। हाई कोर्ट का सवाल था कि उन फीमेल डॉग पर क्या बीत रही होगी, जो अपने गोद लेने वाले परिवार से अचानक बिछड़ गई हैं।
"वो बेजुबान हैं, पर उनका दर्द असली है"
याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि तीनों कुत्तियां अपने-अपने नाम पर प्रतिक्रिया देती हैं। यानी मिष्टी, कोको और कॉटन तीनों को अपना नाम पहचानना आता है। यह इस बात का सबूत है कि उनका गोद लेने वाले परिवार से गहरा बंधन बन चुका था।
दोनों पक्ष राजी, कोर्ट ने बदला आदेश
उसने फीमेल डॉग की भलाई को देखते हुए उन्हें याचिकाकर्ताओं को लौटाने पर सहमति जताई। हालांकि एक शर्त रखी गई। अगर आपराधिक मामले में मूल मालिक बरी हो जाता है, तो फीमेल डॉग की कस्टडी उनके कल्याण को ध्यान में रखते हुए उसे वापस मिल सकती है।
50-50 हजार का बॉन्ड, शुक्रवार तक सौंपना जरूरी
साथ ही याचिकाकर्ताओं को प्रत्येक कुत्तिया के लिए 50 हजार रुपए की सुपरदारीनामा (जमानत बॉन्ड) ट्रायल कोर्ट में जमा करानी होगी। यह बॉन्ड इस बात की गारंटी होगी कि जरूरत पड़ने पर तीनों को साक्ष्य के चरण में कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
पशु अधिकारों पर बड़ा संदेश
यह खबर क्यों जरूरी है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क (ङ) में यह मौलिक कर्तव्य शामिल है कि नागरिक जीवित प्राणियों के प्रति दया भाव रखें। यह फैसला उस भावना के अनुरूप है। सामाजिक नैतिकता के लिहाज से भी यह जरूरी है कि जो जानवर इंसानों पर भरोसा करते हैं, उनके साथ न्याय हो।
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