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EPF के 64 साल पुराने नियमों में बदलाव, कर्मचारी संगठन नाराज
Sandeep Kumar | Jul 05, 2026, 17:25 IST
EPF के 64 साल पुराने नियमों में बदलाव
केंद्र सरकार ने ईपीएफ के 64 साल पुराने नियमों में बदलाव किया है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इससे करोड़ों वर्करों को नुकसान होगा। नए नियम में कर्मचारी का अंशदान कम करने की बात कही गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
- केंद्र सरकार ने ईपीएफ नियमों में बदलाव किया है।
- कर्मचारी संगठनों ने इस फैसले पर विरोध जताया है।
- उनका दावा है कि वर्करों को नुकसान होगा।
- नए नियम से नियोक्ताओं को फायदा बताया गया है।
- देशभर में कर्मचारी संगठन विरोध की तैयारी कर रहे हैं।
नए नियम में क्या बदला
सरकार की योजना 2026 के तहत देश के 7.31 करोड़ कर्मचारियों और वर्कर्स पर सीधा असर पड़ने का अनुमान है। संगठनों के मुताबिक इसका परोक्ष असर करीब 30 करोड़ लोगों तक पहुंच सकता है।
पुरानी व्यवस्था में क्या मिलता था
यह व्यवस्था कारखानों, निगम मंडलों, बोर्ड, विश्वविद्यालयों और लिमिटेड कंपनियों तक लागू है। इसमें भेल और भिलाई जैसे बड़े संस्थानों के कर्मचारी भी शामिल हैं। संगठनों का कहना है कि यही ढांचा कर्मचारियों के हितों की रक्षा करता आया है।
पुरानी योजना से कितना फायदा होता था
परसाई के अनुसार नई योजना में यही राशि घटकर 43 हजार 200 रुपए रह जाएगी। इस तरह एक कर्मचारी को सालाना करीब 2 लाख 63 हजार रुपए का सीधा नुकसान होगा।
नियोक्ता को कैसे मिलेगा फायदा
राठौर के मुताबिक इससे नियोक्ता को हर महीने करीब 10200 रुपए की सीधी बचत होगी। साथ ही कर्मचारी को मिलने वाला नियोक्ता अंशदान भी घट जाएगा। इसका असर सीधे रिटायरमेंट के समय मिलने वाले फंड पर पड़ेगा।
राठौर ने यह भी कहा कि कर्मचारी संगठन वर्षों से 15 हजार रुपए की वेतन सीमा हटाने की मांग करते आए हैं। उनका सुझाव है कि पूरे वेतन पर ही समान अंशदान तय होना चाहिए।
संगठनों की सरकार से मांग
दोनों नेताओं का कहना है कि रिटायरमेंट के समय यही फंड कर्मचारी और उसके परिवार के काम आता है। यही वजह है कि देशभर के कर्मचारी संगठन अब लामबंद होकर इस बदलाव का विरोध करने की तैयारी में हैं।
EPF है क्या?
FAQ
- ईपीएफ के नए नियम से किसे फायदा होगा?
कर्मचारी संगठनों के मुताबिक इससे मिल मालिकों और नियोक्ताओं को फायदा होगा। नियोक्ता का मासिक अंशदान काफी कम हो जाएगा। - पुरानी और नई योजना में कितना अंतर है?
पुरानी योजना में एक लाख सैलरी पर सालाना अंशदान 2 लाख 88 हजार रुपए बनता था। नई योजना में यह घटकर 43 हजार 200 रुपए रह जाएगा। - कर्मचारी संगठनों की क्या मांग है?
संगठन चाहते हैं कि सरकार नए नियमों पर पुनर्विचार करे। साथ ही वेतन सीमा हटाकर पूरे वेतन पर अंशदान तय हो।
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