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दिल्ली कूच करने को किसान तैयार, जानें क्या हैं किसानों की 12 मांगें

आंदोलन को 'चलो दिल्ली' मार्च नाम दिया गया है। हालांकि, इस आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा शामिल नहीं है। यह कुछ किसान संगठनों का प्रदर्शन है। लेकिन फिर भी किसानों की तैयारियों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

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Pooja Kumari
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Kisaan Aandolan

NEW DELHI. किसान आंदोलन 2.0 के लिए किसानों ने एक बार फिर कमर कस ली है और पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान समेत कई राज्यों से किसान दिल्ली कूच करने की तैयारी में हैं। बता दें कि इस आंदोलन को 'चलो दिल्ली' मार्च नाम दिया गया है। हालांकि, इस बार इस आंदोलन में संयुक्त किसान मोर्चा शामिल नहीं है। यह कुछ किसान संगठनों का प्रदर्शन है। लेकिन फिर भी किसानों की तैयारियों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन कोई भी रिस्क नहीं लेना चाहती। 

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दिल्ली से सटे राज्यों के बॉर्डर पर बढ़े मुस्तैदी

दिल्ली से सटे हरियाणा, पंजाब और यूपी के बॉर्डर पर मुस्तैदी बढ़ा दी गई है। बॉर्डर को कटीले तार, सीमेंट के बैरिकेड्स से कवर किया जा रहा है। किसान मार्च को देखते हुए उत्तर पूर्वी दिल्ली में धारा 144 लागू की गई है। प्रदर्शनकारियों को बॉर्डर पर ही रोके जाने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड और मध्य प्रदेश से भी किसान दिल्ली पहुंच सकते हैं। इस बीच किसानों के आंदोलन को लेकर पंजाब के सीएम भगवंत मान का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार से किसानों के मुद्दों का हल निकालने और मीटिंग करने के लिए कहा है।

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सीसीटीवी और लाउडस्पीकर लगाए गए

बता दें कि किसानों के दिल्ली घेराव को रोकने के लिए हरियाणा और पंजाब से लगने वाले सिंघु बॉर्डर पर कटीले तार लगा दिए हैं। साथ ही सड़कों पर सीमेंट के बैरिकेड हैं। दिल्ली में गाजीपुर टिकरी और सिंधु बॉर्डर पर भी दिल्ली पुलिस इतिहास के तौर पर तैयारी कर रही है, ताकि किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोका जा सके। गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस की गाड़ियां और बैरिकेड खड़े कर दिए गए हैं। साथ ही यहां सीसीटीवी और लाउडस्पीकर भी लगाए जा रहे हैं। ऐसे में पुलिस-प्रशासन को डर है कि कहीं पश्चिम उत्तर प्रदेश के दूसरे संगठन भी इसमें शामिल न हो जाएं। अगर ऐसा होता है तो संभवना है कि दिल्ली-मेरठ राजमार्ग भी इससे बाधित हो सकता है।

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दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी 

दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर यातायात बाधित होने की स्थिति में चंडीगढ़ से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को डेराबस्सी, बरवाला/रामगढ़, साहा, शाहबाद, कुरूक्षेत्र के रास्ते अथवा पंचकूला, एनएच-344 यमुनानगर इंद्री/पिपली, करनाल होते हुए दिल्ली जाने की सलाह दी गई है। इसी प्रकार, दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाले यात्री करनाल, इंद्री/पिपली, यमुनानगर, पंचकूला होते हुए अथवा कुरूक्षेत्र, शाहबाद, साहा, बरवाला, रामगढ़ होते हुए अपने गन्तव्य पर पहुंच सकते हैं। बता दें कि हरियाणा सरकार ने 11 से 13 फरवरी तक अंबाला, कुरूक्षेत्र, कैथल, जिंद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा समेत सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं और बल्क एसएमएस निलंबित कर दिए हैं।

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कौन-कौन होंगे इस आंदोलन में शामिल 

13 फरवरी को होने वाले किसान आंदोलन में किसान मजदूर मोर्चा, सरवन सिंह पंढेर की किसान मजदूर संघर्ष समिति, भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह, भारतीय किसान यूनियन जनरल सिंह और भारतीय किसान यूनियन एकता आजाद दिलबाग सिंह और गुरमननित सिंह की प्रोग्रेसिव फार्मर फ्रंट इस आंदोलन में शामिल होगी।

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किसानों के प्रमुख मांगे कौन-कौन सी हैं?

इन संगठनों का मुद्दा वही है, जो संयुक्त किसान मोर्चा उठा रहा था। इसमें सबसे बड़ी मांग फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून है। इसके अलावा बिजली की दरों में रियायत और कर्ज माफी का भी मुद्दा है। ऑल इंडिया किसान सभा के उपाध्यक्ष आनंद मोहल्ला का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के कुछ स्प्लिंटर संगठन जो अलग हो गए थे, यह उनका आंदोलन है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने किया भारत बंद करने की मांग 

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ऑल इंडिया किसान सभा ने भी किसान के आंदोलन से फिलहाल दूरी बनाई हुई है, जबकि संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले 16 फरवरी को राष्ट्रव्यापी भारत बंद करने आह्नान किया गया है, जिसमें तमाम किसान और मजदूर पूरे दिन हड़ताल और काम बंद करेंगे। इस दौरान दोपहर 12 बजे से लेकर, शाम 4 बजे तक देश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों का घेराव किया जाएगा और हाईवे बंद किए जाएंगे। चुनावी साल में सरकार किसी तरह का रिस्क नहीं लेना चाहती और इसीलिए हर संभव प्रयास करके किसानों को मनाने की मशक्कत की जा रही है। 

किसानों ने लगाए पीएम मोदी पर आरोप 

सरकार की ओर से किसानों से बातचीत के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की कमेटी बनाई गई है। डल्लेवाल का कहना है कि चंडीगढ़ में अभी इन मंत्रियों की किसानों से बातचीत हो रही है लेकिन अगर ये नाकाम रही तो 13 फरवरी को किसान दिल्ली की ओर कूच करेंगे। लेकिन किसान नेताओं ने कहा है कि बातचीत से पहले सरकार किसानों के खिलाफ सख्ती का माहौल बनाने से बाज़ आए ताकि किसानों के बीच शांति का माहौल बने। उन्होंने कहा, ''जिस समय मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम थे, उस समय वो उपभोक्ता मामलों के कमेटी के चेयरमैन भी थे। 2011-12 की इसी कमेटी की रिपोर्ट में किसानों के लिए जो सिफारिशें की गई थीं, वही अब लागू नहीं हो रही हैं।'' इसके बाद डल्लेवाल ने कहा कि 'जब सरकार के मंत्रियों ने किसानों से 8 फरवरी को पहली बार बात की तो कहा कि उनके साथ सरकार ने क्या वादा किया है ये उन्हें नहीं पता. ये तो हास्यास्पद है कि सरकार के मंत्रियों को ही सरकार के वादे के बारे में पता नहीं है।'

किसानों के समर्थन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल 

बता दें कि पंजाब-हरियाणा के किसान ने सरकार से मांग की है कि उन्हें एमएसपी की कानूनी गारंटी दी जाए। किसानों को पेंशन की सुविधा हो और फसल बीमा दिया जाए। किसान और मजदूरों की कर्ज माफी की मांग भी हो रही है। सबसे प्रमुख मांग ये है कि 2020 में हुए किसानों के प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर केस दर्ज किए गए थे, उन्हें रद्द कर दिया जाए। संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा पंजाब-हरियाणा में होने वाले प्रदर्शन की अगुवाई कर रहा है। इन दोनों संगठनों के साथ 200 से अधिक किसान संघ शामिल हैं। किसानों आंदोलन में सियासी दल भी कूदते दिखाई दे रहे हैं। चुनाव में किसानों को साधने के लिए कांग्रेस ने आंदोलन को समर्थन देने का ऐलान किया है। किसानों के समर्थन में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं।

किसान आंदोलन
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