पैंक्रियाज में जमा फैट को न लें हल्के में, डायबिटीज-कैंसर का बढ़ सकता है खतरा
Aman Vaishnav | Jul 20, 2026, 13:35 IST
फैटी पैंक्रियाज
फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर को अब पहली बार एक अलग बीमारी के रूप में माना गया है। नई स्टडी में बताया गया है कि पैंक्रियाज में ज्यादा फैट जमा होने से टाइप-2 डायबिटीज, पैंक्रियाटाइटिस और पैंक्रियाज कैंसर का खतरा बढ़ सकता है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर को पहली बार अलग बीमारी माना है।
- यह जानकारी नेचर रिव्यूज जर्नल में छपी है। इसे मेलबर्न कंसेंसस नाम दिया गया है।
- रिपोर्ट के मुताबिक पैंक्रियाज में जमा फैट डायबिटीज और कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है।
- एक्सपर्ट्स ने इसे मापने और कम करने के तरीके भी बताए हैं।
फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर क्या है
FPD तब होता है जब फैट की मात्रा जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है। इससे पैंक्रियाज की बनावट और उसका काम करने का तरीका बिगड़ने लगता है। इसकी वजह से सूजन, फाइब्रोसिस और कोशिकाओं को नुकसान हो सकता है।
बता दें कि उम्र बढ़ने के साथ पैंक्रियाज में थोड़ा फैट जमा होना आम बात है। लेकिन जेनेटिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारणों से दुबले-पतले लोगों में भी ज्यादा फैट जमा हो सकता है। यानी सिर्फ मोटे लोग ही इसके शिकार नहीं होते।
जांच कैसे होगी
एमआरआई (MRI – Magnetic Resonance Imaging) से यह जांच बेहतर होती है, लेकिन यह महंगी है और अभी ज्यादातर रिसर्च तक सीमित है।
पैनल ने एक खास तकनीक को सबसे बेहतर बताया है। इसका नाम है Proton Density Fat Fraction (PDFF)। यह MRI आधारित तकनीक पैंक्रियाज में फैट को सटीक तरीके से मापती है।
भारत के लिए क्यों जरूरी है यह शोध
मिश्रा की रिसर्च बताती है कि पैंक्रियाज में फैट बढ़ने के साथ लिवर में भी फैट जमा होने लगता है। दोनों अंगों में फैट कम करने से डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। कुछ मामलों में इसे रिवर्स भी किया जा सकता है।
फैटी पैंक्रियाज कैसे करें कम
इसके लिए रोजाना करीब 500 कैलोरी की कमी रखनी होगी। अगर व्यक्ति मोटापे से जूझ रहा है, तो शरीर का 6 से 10 प्रतिशत वजन घटाना फायदेमंद है। इससे पैंक्रियाज में जमा फैट कम हो सकता है।
स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम को आदत बनाना जरूरी है। वजन को नियंत्रित रखकर फैटी पैंक्रियाज का खतरा काफी हद तक टाला जा सकता है। यह शोध आने वाले समय में डायबिटीज और पैंक्रियाज कैंसर की रोकथाम में मददगार साबित हो सकता है।
FAQ
- फैटी पैंक्रियाज डिसऑर्डर क्या है?
यह वह स्थिति है जब पैंक्रियाज में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो जाता है। इससे पैंक्रियाज की बनावट और कार्यक्षमता को नुकसान होता है। यह सूजन और फाइब्रोसिस का कारण बन सकता है। - क्या दुबले लोगों को भी फैटी पैंक्रियाज हो सकता है?
हां, जेनेटिक, पर्यावरणीय और जीवनशैली से जुड़े कारणों से दुबले लोगों में भी यह हो सकता है। यह सिर्फ मोटापे तक सीमित बीमारी नहीं है। - फैटी पैंक्रियाज को कैसे कम किया जा सकता है?
रोजाना करीब 500 कैलोरी की कमी रखने से मदद मिलती है। मोटापे से ग्रस्त लोगों को 6 से 10 प्रतिशत वजन घटाना चाहिए। स्वस्थ खानपान और नियमित व्यायाम भी जरूरी हैं।
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