Form-6 विवाद: नए वोटर आवेदन में क्या बदला, जिस पर उठे सवाल? 5 किरदारों से समझिए पूरा मामला
Sumit Kumar | Sept 25, 2026, 18:17 IST
SIR विवाद में फॉर्म-6 की चर्चा क्यों हो रही है?
भारत में मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को लेकर इन दिनों विवाद चल रहा है। मामला चुनाव आयोग के फॉर्म-6 और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है। विपक्षी दलों ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं चुनाव आयोग ने अपनी प्रक्रिया को नियमों के तहत बताया है।
इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चर्चा फॉर्म-6 को लेकर हो रही है। नए मतदाता बनने वाले लोगों के लिए जरूरी इस फॉर्म में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों और कुछ संगठनों ने आपत्तियां जताई हैं।
आइए समझते हैं कि फॉर्म-6 में क्या बदलाव हुआ, विवाद क्यों बढ़ा और इस मामले से जुड़े प्रमुख किरदार कौन हैं।
चुनाव आयोग ने 2025 में मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन के लिए SIR प्रक्रिया शुरू की। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और गलत या डुप्लीकेट नामों की पहचान करना बताया गया।
इसके बाद जब ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आई तो कई जगह नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे कुछ मतदाताओं को परेशानी हो सकती है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची में सुधार एक नियमित प्रक्रिया है और इसमें नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाती है।
फॉर्म-6 का इस्तेमाल पहली बार वोटर बनने वाले नागरिक करते हैं। यानी जिन लोगों की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा हो गई है और वे पहली बार मतदाता सूची में नाम जुड़वाना चाहते हैं, उन्हें यह फॉर्म भरना होता है।
इसमें आवेदक का नाम, पता, जन्म तारीख, उम्र और पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।
विवाद तब शुरू हुआ जब फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी जानकारी मांगे जाने लगी। नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनके माता-पिता या पूर्वजों का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।
विपक्ष और कुछ संगठनों का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त जानकारी मांगने से नए मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए सत्यापन जरूरी है।
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर कुछ मुद्दों पर मतभेद थे।
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज किया। आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
1. ज्ञानेश कुमार (
ज्ञानेश कुमार वर्तमान में मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। वे 1988 बैच के केरल कैडर के पूर्व IAS अधिकारी हैं।
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर सवाल उठाए हैं। वहीं आयोग का कहना है कि सभी फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
2. सुखबीर सिंह संधू (
सुखबीर सिंह संधू चुनाव आयुक्त हैं। वे 1988 बैच के उत्तराखंड कैडर के पूर्व IAS अधिकारी हैं।
रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्होंने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। संधू इससे पहले NHAI के अध्यक्ष और उत्तराखंड के मुख्य सचिव जैसे पदों पर रह चुके हैं।
3. विवेक जोशी (
विवेक जोशी चुनाव आयुक्त हैं। वे 1989 बैच के हरियाणा कैडर के पूर्व IAS अधिकारी हैं।
SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों में उनकी आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है। वे वित्त मंत्रालय और हरियाणा सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
4. सीमा खन्ना (
सीमा खन्ना चुनाव आयोग में IT महानिदेशक के पद पर हैं। ECINet डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी भूमिका बताई जाती है।
विपक्ष ने इस डिजिटल सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने तकनीकी प्रक्रिया को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया है।
5. टीवी सोमनाथन (
टीवी सोमनाथन केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिव हैं। रिपोर्टों में चुनाव आयोग के आंतरिक पत्राचार में उनका उल्लेख होने का दावा किया गया है।
वे 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर रह चुके हैं।
नए मतदाता बनने के लिए फॉर्म-6 ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जा सकता है।
आवेदक इसे चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल या ECINet के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है।
फॉर्म जमा करने के बाद चुनाव अधिकारी जानकारी की जांच करते हैं और पात्र पाए जाने पर नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाता है।
फॉर्म-6 और SIR प्रक्रिया को लेकर मामला अब राजनीतिक बहस के साथ कानूनी चर्चा का विषय भी बन गया है। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। वहीं आयोग ने प्रक्रिया को नियमों के अनुसार बताया है।
अब नजर इस बात पर है कि इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है और अदालतों में चल रही याचिकाओं पर क्या स्थिति बनती है।
आइए समझते हैं कि फॉर्म-6 में क्या बदलाव हुआ, विवाद क्यों बढ़ा और इस मामले से जुड़े प्रमुख किरदार कौन हैं।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
इसके बाद जब ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आई तो कई जगह नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठे। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे कुछ मतदाताओं को परेशानी हो सकती है।
चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची में सुधार एक नियमित प्रक्रिया है और इसमें नियमों के अनुसार ही कार्रवाई की जाती है।
फॉर्म-6 में क्या बदला?
इसमें आवेदक का नाम, पता, जन्म तारीख, उम्र और पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।
विवाद तब शुरू हुआ जब फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी जानकारी मांगे जाने लगी। नए आवेदकों से यह जानकारी मांगी गई कि उनके माता-पिता या पूर्वजों का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।
विपक्ष और कुछ संगठनों का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त जानकारी मांगने से नए मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए सत्यापन जरूरी है।
चुनाव आयोग के अंदर मतभेद का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
हालांकि चुनाव आयोग ने इन दावों को खारिज किया। आयोग ने कहा कि बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार लिए जाते हैं।
मामले के 5 प्रमुख किरदार
1. ज्ञानेश कुमार (Gyanesh Kumar )
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों ने उन पर सवाल उठाए हैं। वहीं आयोग का कहना है कि सभी फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
2. सुखबीर सिंह संधू (Sukhbir Singh Sandhu )
रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्होंने SIR से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। संधू इससे पहले NHAI के अध्यक्ष और उत्तराखंड के मुख्य सचिव जैसे पदों पर रह चुके हैं।
3. विवेक जोशी (Vivek Joshi )
SIR प्रक्रिया से जुड़े कुछ मामलों में उनकी आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है। वे वित्त मंत्रालय और हरियाणा सरकार में अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
4. सीमा खन्ना (Seema Khanna )
विपक्ष ने इस डिजिटल सिस्टम को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि चुनाव आयोग ने तकनीकी प्रक्रिया को अपनी कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया है।
5. टीवी सोमनाथन (TV Somanathan )
वे 1987 बैच के IAS अधिकारी हैं और केंद्र सरकार में कई अहम पदों पर रह चुके हैं।
फॉर्म-6 कैसे भरते हैं?
आवेदक इसे चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल या ECINet के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके अलावा बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से भी आवेदन किया जा सकता है।
फॉर्म जमा करने के बाद चुनाव अधिकारी जानकारी की जांच करते हैं और पात्र पाए जाने पर नाम मतदाता सूची में जोड़ा जाता है।
अब आगे क्या होगा?
अब नजर इस बात पर है कि इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग आगे क्या कदम उठाता है और अदालतों में चल रही याचिकाओं पर क्या स्थिति बनती है।
- फॉर्म-6 में क्या बदलाव किया गया है?
फॉर्म-6 में बदलाव यह है कि नए मतदाता आवेदकों से अब यह जानकारी मांगी जा रही है कि उनके माता-पिता या पूर्वजों का नाम पहले की मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं, जो कि कुछ संगठनों और विपक्षी दलों के द्वारा आपत्ति का कारण बना है। - चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया की शुरुआत क्यों की है?
चुनाव आयोग ने 2025 में मतदाता सूची में सुधार और सत्यापन के लिए SIR प्रक्रिया शुरू की है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और गलत या डुप्लीकेट नामों की पहचान करना है। - फॉर्म-6 कैसे भरा जा सकता है?
फॉर्म-6 ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से भरा जा सकता है। आवेदक इसे चुनाव आयोग के ऑनलाइन पोर्टल या ECINet के माध्यम से जमा कर सकते हैं, या बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से भी आवेदन कर सकते हैं।
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