एनालॉग पनीर पर FSSAI सख्त, कहा - हर सफेद टुकड़ा पनीर नहीं होता
Amresh Kushwaha | Sept 24, 2026, 11:19 IST
एनालॉग पनीर पर FSSAI सख्त
FSSAI ने एनालॉग पनीर की लेबलिंग पर नया ड्राफ्ट जारी किया है। यदि उत्पाद दूध से नहीं बना है तो उसे पनीर नाम से नहीं बेचा जा सकेगा। इससे ग्राहक असली और नकली पनीर में फर्क समझ सकेंगे। प्रस्ताव पर 60 दिनों में सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- दूध से नहीं बना तो पनीर नाम से नहीं बिकेगा उत्पाद।
- FSSAI ने एनालॉग पनीर पर नया लेबलिंग ड्राफ्ट जारी किया।
- नकली पनीर में वनस्पति तेल और स्टार्च जैसी चीजें होती हैं।
- कंपनियों को उत्पाद की असली पहचान लेबल पर लिखनी होगी।
- प्रस्ताव पर 60 दिनों में लोगों से राय मांगी गई है।
क्या है एनालॉग पनीर
इनका रूप और इस्तेमाल असली पनीर जैसा ही होता है। खाने-पीने की कई चीजों में यह इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इनकी असली सामग्री पूरी तरह अलग होती है। ग्राहक को अक्सर इसका पता ही नहीं चल पाता।
अब क्या बदलेगा नियम में
FSSAI का कहना है कि ग्राहकों को साफ पता होना चाहिए कि वे क्या खरीद रहे हैं। प्रस्ताव में गैर-डेयरी सामग्री से बने उत्पादों पर पनीर शब्द के इस्तेमाल पर रोक की बात कही गई है। इससे खरीदारी के समय भ्रम की स्थिति खत्म होगी।
ग्राहकों को कैसे मिलेगा फायदा
FSSAI चाहता है कि पैकेट पर उत्पाद की सही पहचान साफ लिखी जाए। इससे ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से सही फैसला ले सकेगा। खासकर वे लोग जो सिर्फ दूध से बना उत्पाद खरीदना चाहते हैं, उनके लिए यह जानकारी बहुत जरूरी होगी।
पुराने उत्पादों पर भी असर
अगर प्रस्तावित नियम अंतिम रूप लेते हैं तो कंपनियों को पैकेजिंग और मार्केटिंग में बदलाव करना होगा। कंपनियों को उत्पाद का नाम और लेबल इस तरह तैयार करना होगा जिससे उसकी असली प्रकृति साफ पता चले। मतलब अगर कोई उत्पाद दूध से नहीं बना है तो उसे सिर्फ पनीर नाम से बेचने की इजाजत नहीं मिलेगी।
FSSAI ने हाल ही में बच्चों के फॉर्मूला मिल्क को लेकर भी एक बड़ी कंपनी से जवाब मांगा था। इससे साफ है कि संस्था लेबलिंग को लेकर लगातार सख्ती बरत रही है।
60 दिनों में मांगी गई राय
इस दौरान मिलने वाले सभी सुझावों की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा। अंतिम फैसला आने के बाद साफ होगा कि प्रस्तावित बदलाव किस रूप में लागू होंगे।
फिलहाल क्या स्थिति है
अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो डेयरी उत्पादों की लेबलिंग और मार्केटिंग के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इसका सीधा असर उन उत्पादों पर पड़ेगा जो पनीर जैसे दिखते हैं लेकिन उनमें दूध की जगह गैर-डेयरी सामग्री इस्तेमाल होती है।
आगे क्या होगा
यह कदम खाद्य पदार्थों में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इसका असर डेयरी बाजार पर साफ दिख सकता है।
यह खबर क्यों जरूरी है
इसमें किसी कंपनी या व्यक्ति पर बेबुनियाद आरोप नहीं लगाया गया है। खबर उपभोक्ता अधिकार और पारदर्शिता के सिद्धांत का पालन करती है। इसका मकसद जनता को सही जानकारी देना है, किसी को भड़काना नहीं। डिजिटल पत्रकारिता के नैतिक मानकों का पूरा ध्यान रखा गया है।
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