जेन-जी बना नया वोट बैंक, 7 राज्यों की तख्तापलट करने का रखते हैं दम
Amresh Kushwaha | Aug 09, 2026, 10:32 IST
जेन-जी बना नया वोट बैंक
2027 में सात राज्यों में चुनाव होने हैं। इन राज्यों में 22 फीसदी वोटर जेन-जी यानी 18 से 29 साल के हैं। पिछली बार 940 में से 257 सीटों पर जीत का मार्जिन सिर्फ पांच फीसदी या उससे कम था। जेन-जी वोट बंटा तो सरकारें बदल सकती हैं।
समझें क्या है पूरा मामला...
- अगले साल 7 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं।
- इन राज्यों में जेन-जी वोटरों की संख्या 22 फीसदी है।
- पिछली बार 940 सीटों में से 257 पर मार्जिन बहुत कम था।
- दिल्ली के जेन-जी आंदोलन के बाद पार्टियां रणनीति बदल रही हैं।
- महिला, पिछड़ा, किसान और दलित के साथ अब जेन-जी भी अहम वर्ग बना है।
इसके अलावा बिहार के बांकीपुर और मध्यप्रदेश के दतिया में युवाओं की भूमिका वाले नतीजों ने भी राजनीतिक दलों को चौंकाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब चुनाव में महिला, पिछड़ा, किसान और दलित की तरह जेन-जी भी एक नया वर्ग बन गया है।
कहां कितने जेन-जी वोटर
उत्तराखंड में 71.3 लाख वोटरों में से 15.8 लाख यानी 22 फीसदी युवा हैं। हिमाचल में 57.1 लाख वोटरों में 12.5 लाख जेन-जी हैं, जो कुल का 22 फीसदी है। मणिपुर में सबसे ज्यादा 24 फीसदी यानी 4.59 लाख वोटर जेन-जी हैं। गोवा में 10.5 लाख वोटरों में से 2.07 लाख यानी 20 फीसदी युवा वोटर हैं।
क्यों जरूरी है यह आंकड़ा
यूपी में 403 सीटों में से 131 सीटों पर मार्जिन पांच फीसदी से कम था। गुजरात में 182 में से 27, पंजाब में 117 में से 24 और उत्तराखंड में 70 में से 15 सीटों पर यही हाल था। मणिपुर में तो पिछली बार 48 फीसदी सीटों पर जीत का मार्जिन 5 फीसदी से भी कम रहा था।
जहां चुनाव हो चुके, वहां का हाल
इससे साफ है कि राजनीतिक दल अपनी पूरी रणनीति जेन-जी वोटरों के इर्दगिर्द बुनने में लगे हैं। भाजपा, कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियों ने इसके लिए अलग मुहिम भी शुरू कर दी है।
2024 लोकसभा चुनाव का उदाहरण
इंडिया गठबंधन को 41.09 फीसदी वोट मिले और उसने 234 सीटें जीतीं, इनमें 51 सीटों पर अंतर बहुत कम था। यह आंकड़ा बताता है कि थोड़ा सा भी वोट शिफ्ट होने पर नतीजे पूरी तरह बदल सकते हैं।
जाति-धर्म का समीकरण बिगड़ सकता है
आने वाले छह से सात महीनों में यह देखा जाएगा कि युवाओं का यह सेंटीमेंट कितना मजबूत रहता है। यदि यह सेंटीमेंट कायम रहा, तो हर पार्टी को अगले कुछ हफ्तों में इन वोटरों को साधने की मजबूरी होगी।
पार्टियों की संभावित रणनीति
दूसरी रणनीति जाति-धर्म के समीकरण से जुड़ी है, क्योंकि युवा अब तक जाति-धर्म के आधार पर पूरी तरह से बंटे नहीं दिखे हैं। हालांकि चुनाव के वक्त इसका थोड़ा-बहुत असर जरूर दिख सकता है।
तीसरी रणनीति महिलाओं जैसे बदलाव से जुड़ी है, जैसे महिलाओं ने जातिगत समीकरण तोड़कर एनडीए को वोट दिया था। चौथी रणनीति मुफ्त योजनाओं से जुड़ी है, क्योंकि युवा अब सिर्फ फ्री रेवड़ी या लुभावने वादों से संतुष्ट नहीं होते। वे ठोस समाधान चाहते हैं जो उनके भविष्य से जुड़ा हो।
एक्सपर्ट की राय भी अहम
आगे क्या हो सकता है
यदि जेन-जी वोटर संगठित होकर वोट करते हैं, तो 2027 के नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं। यही वजह है कि सभी दल अभी से अपनी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।
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