Google Buyout Offer: माइक्रोसॉफ्ट के बाद अब गूगल ने कर्मचारियों को दिया नौकरी छोड़ने का ऑफर, मिलेगा बड़ा पैकेज
Harrison Masih | Nov 05, 2026, 11:28 IST
गूगल का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के लिए शुरू हुआ Buyout Offer
दुनिया की बड़ी टेक कंपनियों में इन दिनों बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंपनियां एक तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी निवेश कर रही हैं। वहीं, दूसरी तरफ खर्च कम करने के लिए कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर भी दे रही हैं। अब इस कड़ी में गूगल का नाम जुड़ गया है।
माइक्रोसॉफ्ट के बाद गूगल ने भी पांच देशों में अपने कुछ कर्मचारियों के लिए Buyout Offer पेश किया है। इसके तहत कर्मचारी अपनी मर्जी से नौकरी छोड़ सकते हैं। बदले में कंपनी उन्हें पैसे देगी। हालांकि, इस योजना में भारत के कर्मचारियों को शामिल नहीं किया गया है।
गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट ने कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, जापान और स्विट्जरलैंड में यह योजना शुरू की है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने न्यूज एजेंसी रायटर्स को बताया कि जून से इन देशों में कुछ कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का विकल्प दिया गया है।
इस योजना को Voluntary Exit Program नाम दिया गया है। इसके तहत कर्मचारी अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ सकते हैं। बदले में उन्हें तय नियमों के अनुसार आर्थिक पैकेज मिलेगा।
गूगल का कहना है कि यह ऑफर उन कर्मचारियों के लिए है, जो कंपनी की नई सोच और काम करने की दिशा से खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते। कंपनी पिछले साल से अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ विभागों में भी यह कार्यक्रम चला रही है।
गूगल ने फिलहाल इस योजना में भारत के कर्मचारियों को शामिल नहीं किया है। यानी भारतीय कर्मचारियों के लिए अभी ऐसा कोई ऑफर नहीं दिया गया है।
कंपनी अब अपने कामकाज को नई प्राथमिकताओं के हिसाब से बदलना चाहती है। इसके लिए वह अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाना चाहती है, जहां भविष्य में ज्यादा संभावनाएं हैं।
AI और
गूगल का सबसे ज्यादा ध्यान अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग पर है। कंपनी इन दोनों क्षेत्रों में तेजी से निवेश कर रही है। साथ ही नई भर्तियों में भी इन्हीं सेक्टरों को प्राथमिकता दी जा रही है।
पिछली बार जब गूगल ने बायआउट ऑफर दिया था, तब Google Cloud और AI यूनिट DeepMind के कर्मचारियों को इससे बाहर रखा गया था। इससे साफ है कि कंपनी इन विभागों को अपने भविष्य के कारोबार के लिए काफी अहम मानती है।
स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख में गूगल का बड़ा इंजीनियरिंग सेंटर है। यहां करीब 5,000 कर्मचारी काम करते हैं। कंपनी ने जून में यहां के कुछ कर्मचारियों को नौकरी छोड़ने का ऑफर दिया था। इसके लिए जुलाई तक आवेदन करने का समय दिया गया था।
इस योजना के तहत कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए हर एक साल के बदले एक महीने की सैलरी मिलेगी। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने की सैलरी तय की गई है। यानी 15 साल काम करने वाले कर्मचारी को भी अधिकतम 12 महीने की सैलरी ही मिलेगी।
गूगल समेत कई बड़ी टेक कंपनियां AI तकनीक पर भारी पैसा खर्च कर रही हैं। इसके लिए डेटा सेंटर, सर्वर और कंप्यूटर चिप्स पर बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है।
इस बढ़ते खर्च से वॉल स्ट्रीट के निवेशक चिंतित हैं। उन्हें डर है कि AI पर ज्यादा पैसा लगाने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से अल्फाबेट के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है।
गूगल से पहले माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपने कर्मचारियों को बायआउट कॉन्ट्रैक्ट का ऑफर दिया था। कंपनी ने करीब 60,000 कर्मचारियों को यह विकल्प दिया था। इसका मकसद खर्चों पर नियंत्रण रखना था।
दिलचस्प बात यह है कि अल्फाबेट में कर्मचारियों की संख्या भी बढ़ी है। सितंबर 2026 के आखिर तक कंपनी में करीब 2.04 लाख कर्मचारी थे। पिछले छह महीनों में कंपनी ने लगभग 10,000 नए कर्मचारी जोड़े।
इस बढ़ोतरी की एक वजह अधिग्रहण भी है। इस साल मार्च में गूगल ने साइबर सिक्योरिटी कंपनी Wiz को खरीदा था। इसके बाद Wiz के करीब 2,000 कर्मचारी गूगल के साथ जुड़ गए।
जब कोई कंपनी कर्मचारियों को सीधे नौकरी से निकालने के बजाय खुद इस्तीफा देने का विकल्प देती है, तो इसे Buyout या Voluntary Exit Program कहते हैं।
इसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ता है। बदले में कंपनी उसे एकमुश्त रकम देती है। इसे Severance Package कहा जाता है। इसके साथ कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी मिल सकती हैं।
इससे कंपनी अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या कम कर सकती है। वहीं, कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद कुछ समय तक आर्थिक मदद मिल जाती है।
कुल मिलाकर, गूगल का यह कदम दिखाता है कि कंपनी अब AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसी के अनुसार वह अपने कर्मचारियों और संसाधनों को व्यवस्थित कर रही है। फिलहाल भारत के कर्मचारी इस योजना से बाहर हैं।
5 देशों में शुरू किया Voluntary Exit Program
इस योजना को Voluntary Exit Program नाम दिया गया है। इसके तहत कर्मचारी अपनी इच्छा से कंपनी छोड़ सकते हैं। बदले में उन्हें तय नियमों के अनुसार आर्थिक पैकेज मिलेगा।
गूगल का कहना है कि यह ऑफर उन कर्मचारियों के लिए है, जो कंपनी की नई सोच और काम करने की दिशा से खुद को जुड़ा हुआ महसूस नहीं करते। कंपनी पिछले साल से अमेरिका और ब्रिटेन के कुछ विभागों में भी यह कार्यक्रम चला रही है।
भारत के कर्मचारियों को नहीं मिलेगा ऑफर
कंपनी अब अपने कामकाज को नई प्राथमिकताओं के हिसाब से बदलना चाहती है। इसके लिए वह अपने संसाधनों को उन क्षेत्रों में लगाना चाहती है, जहां भविष्य में ज्यादा संभावनाएं हैं।
AI और Cloud Computing पर कंपनी का फोकस
पिछली बार जब गूगल ने बायआउट ऑफर दिया था, तब Google Cloud और AI यूनिट DeepMind के कर्मचारियों को इससे बाहर रखा गया था। इससे साफ है कि कंपनी इन विभागों को अपने भविष्य के कारोबार के लिए काफी अहम मानती है।
स्विट्जरलैंड में कितना मिलेगा एग्जिट पैकेज?
इस योजना के तहत कर्मचारियों को कंपनी में काम किए गए हर एक साल के बदले एक महीने की सैलरी मिलेगी। हालांकि, इसकी अधिकतम सीमा 12 महीने की सैलरी तय की गई है। यानी 15 साल काम करने वाले कर्मचारी को भी अधिकतम 12 महीने की सैलरी ही मिलेगी।
AI पर बढ़ते खर्च से निवेशक चिंतित
इस बढ़ते खर्च से वॉल स्ट्रीट के निवेशक चिंतित हैं। उन्हें डर है कि AI पर ज्यादा पैसा लगाने से कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से अल्फाबेट के शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई है।
माइक्रोसॉफ्ट भी दे चुकी है बायआउट ऑफर
2.04 लाख के पार पहुंची कर्मचारियों की संख्या
इस बढ़ोतरी की एक वजह अधिग्रहण भी है। इस साल मार्च में गूगल ने साइबर सिक्योरिटी कंपनी Wiz को खरीदा था। इसके बाद Wiz के करीब 2,000 कर्मचारी गूगल के साथ जुड़ गए।
क्या होता है Buyout Offer?
इसमें कर्मचारी अपनी इच्छा से नौकरी छोड़ता है। बदले में कंपनी उसे एकमुश्त रकम देती है। इसे Severance Package कहा जाता है। इसके साथ कुछ अतिरिक्त सुविधाएं भी मिल सकती हैं।
इससे कंपनी अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या कम कर सकती है। वहीं, कर्मचारी को नौकरी छोड़ने के बाद कुछ समय तक आर्थिक मदद मिल जाती है।
कुल मिलाकर, गूगल का यह कदम दिखाता है कि कंपनी अब AI और क्लाउड कंप्यूटिंग को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसी के अनुसार वह अपने कर्मचारियों और संसाधनों को व्यवस्थित कर रही है। फिलहाल भारत के कर्मचारी इस योजना से बाहर हैं।
RSS की बैठक के बाद शहर के प्रमुख वर्ग के साथ डिनर पर पहुंचे संघ के पदाधिकारी, Gen Z पर भी की चर्चा
By Sanjay Gupta
आईएएस शिखर अग्रवाल पर बोले यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा, कहा- ACB कर रही है जांच, जरूरत पड़ी तो CBI जांच कराएंगे
By Jageshwar Prasad
एमपी में बाल विवाह पर नहीं लग रही लगाम! पांच साल में 47% बढ़े मामले, देवउठनी ग्यारस पर अलर्ट मोड में रहेगा प्रशासन
By Aman Vaishnav
रायपुर में D.Ed अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन, नियुक्ति की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का बंगला घेरा
By Harrison Masih
कम्प्यूटर अनुदेशक और महिला पर्यवेक्षक भर्ती के परिणाम जारी, 12 से 21 नवंबर तक ऑनलाइन स्क्रूटनी फॉर्म भरने का मौका
By Jageshwar Prasad
सीएम मोहन यादव का आज संघ प्रमुख भागवत, दत्तात्रेय और सुरेश सोनी के साथ लंच
By Sanjay Gupta
जयपुर में आज CM भजनलाल का व्यस्त शेड्यूल: अश्विनी वैष्णव से बैठक, SIR पर जनसभा और पदयात्रा
By Ashish Bhardwaj