Android केस में EU कोर्ट का बड़ा फैसला, Google पर 44 हजार करोड़ का जुर्माना बरकरार
Pawan Modiya | Jul 02, 2026, 21:45 IST
गूगल पर भारी जुर्माना
यूरोपीय संघ की सर्वोच्च अदालत ने Google की अपील खारिज करते हुए Android मामले में 4.1 अरब यूरो यानी करीब 44.3 हजार करोड़ रुपए का एंटीट्रस्ट जुर्माना बरकरार रखा है। अदालत ने माना कि कंपनी ने अपने दबदबे का गलत इस्तेमाल किया।
समझें क्या है पूरा मामला
- Google की अंतिम अपील यूरोप की सर्वोच्च अदालत ने खारिज की।
- मामला Android ऑपरेटिंग सिस्टम से जुड़ा है।
- EU ने Google पर बाजार में दबदबा गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
- फोन कंपनियों पर Google ऐप पहले से रखने का दबाव बताया गया।
- अब 4.1 अरब यूरो का जुर्माना अंतिम रूप से बरकरार रहेगा।
यह विवाद केवल जुर्माने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध डिजिटल बाजार में प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं की पसंद से भी जुड़ा है। यूरोपीय नियामकों का कहना है कि बड़ी टेक कंपनियां अपने बाजार प्रभाव का गलत इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। अदालत का ताजा फैसला इसी सोच को मजबूत करता है।
Google पर आरोप क्या थे
आरोपों के अनुसार Google ने मोबाइल निर्माता कंपनियों से ऐसे समझौते किए, जिनमें Google Search, Chrome और Play Store पहले से इंस्टॉल करना जरूरी था। इसके अलावा कुछ मामलों में कंपनियों को Android के दूसरे संस्करण अपनाने से भी रोका गया। इससे प्रतिस्पर्धी कंपनियों को बराबरी का मौका नहीं मिला।
अदालत ने क्या कहा
हालांकि 2022 में निचली अदालत ने जुर्माने की रकम 4.34 अरब यूरो से घटाकर 4.1 अरब यूरो कर दी थी। लेकिन अब सर्वोच्च अदालत ने उसी संशोधित जुर्माने को अंतिम रूप से बरकरार रखा है। इससे कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
Google फैसले से हताश
Google का यह भी कहना है कि उसने 2018 के बाद अपनी कारोबारी नीतियों में बदलाव किए हैं और यूरोप के नियमों का पालन किया है। कंपनी के मुताबिक यह फैसला Android की खुली व्यवस्था को पूरी तरह नहीं समझता।
यूरोपीय आयोग का रुख
आयोग का मानना है कि अगर मोबाइल निर्माता कंपनियों पर पहले से ऐप इंस्टॉल करने की शर्तें थोपी जाएंगी तो नई कंपनियों के लिए बाजार में जगह बनाना मुश्किल हो जाएगा। इसी आधार पर Google के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई थी।
इस फैसले का क्या असर होगा
यह फैसला भविष्य में Digital Markets Act जैसे नए कानूनों को लागू करने में भी मददगार माना जा रहा है। इससे नियामकों का भरोसा और मजबूत होगा।
Android उपयोगकर्ताओं पर असर
हालांकि भविष्य में मोबाइल कंपनियों को अपने ग्राहकों के लिए ज्यादा विकल्प देने पड़ सकते हैं। इससे नए ऐप और सेवाओं को बाजार में जगह मिलने की संभावना बढ़ सकती है। विशेषज्ञ इसे उपभोक्ताओं के लिए सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
आठ साल पुरानी लड़ाई का अंत
अब अंतिम फैसला आ चुका है। अदालत ने Google की सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। इसके साथ ही 4.1 अरब यूरो का जुर्माना बरकरार रखने का रास्ता साफ हो गया है। यह यूरोप के सबसे चर्चित एंटीट्रस्ट मामलों में से एक माना जा रहा है।
जरूरी FAQ
यूरोपीय संघ के Android एंटीट्रस्ट मामले में Google पर 4.1 अरब यूरो का जुर्माना बरकरार रखा गया है। यह राशि पहले 4.34 अरब यूरो थी, जिसे निचली अदालत ने थोड़ा घटाया था।
Google पर मुख्य आरोप क्या था?
आरोप था कि Google ने Android का इस्तेमाल करके अपने Search और Google Chrome जैसे ऐप्स को बढ़ावा दिया। मोबाइल कंपनियों पर इन्हें पहले से इंस्टॉल करने की शर्तें लगाने का भी आरोप था।
क्या इस फैसले का असर भारत के Android यूजर्स पर पड़ेगा?
तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि भविष्य में मोबाइल कंपनियों और ऐप डेवलपर्स को ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को भी लाभ हो सकता है।
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